अदालत की अवमानना मामले में एडटेक कंपनी Byju के संस्थापक को बड़ा झटका, सिंगापुर की अदालत ने सुनाई छह महीने की कैद की सजा।

भारत के स्टार्टअप जगत में कभी 'पोस्टर बॉय' के रूप में पहचान बनाने वाले और एडटेक कंपनी Byju के संस्थापक Byju रवींद्रन

May 27, 2026 - 13:14
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अदालत की अवमानना मामले में एडटेक कंपनी Byju के संस्थापक को बड़ा झटका, सिंगापुर की अदालत ने सुनाई छह महीने की कैद की सजा।
अदालत की अवमानना मामले में एडटेक कंपनी Byju के संस्थापक को बड़ा झटका, सिंगापुर की अदालत ने सुनाई छह महीने की कैद की सजा।
  • न्यायालय के आदेशों की अनदेखी और संपत्तियों की जानकारी छिपाने के आरोप भारी पड़े, साथ ही सत्तर हजार पांच सौ डॉलर का जुर्माना भी लगा
  • वित्तीय संकट और कानूनी लड़ाइयों के भंवर में फंसा कभी भारत का सबसे मूल्यवान स्टार्टअप, अरबपति शिक्षक की मुश्किलें अब और बढ़ीं

भारत के स्टार्टअप जगत में कभी 'पोस्टर बॉय' के रूप में पहचान बनाने वाले और एडटेक कंपनी Byju के संस्थापक Byju रवींद्रन की मुश्किलें लगातार बढ़ती जा रही हैं। वैश्विक स्तर पर वित्तीय और कानूनी संकटों का सामना कर रहे रवींद्रन को अब एक विदेशी अदालत से बेहद बड़ा झटका लगा है। सिंगापुर की एक अदालत ने अदालत की अवमानना से जुड़े एक गंभीर मामले में सुनवाई करते हुए Byju रवींद्रन को छह महीने की जेल की सजा सुनाई है। इसके साथ ही न्यायालय ने उन पर नब्बे हजार सिंगापुर डॉलर, जो कि लगभग सत्तर हजार पांच सौ अमेरिकी डॉलर के बराबर है, का भारी-भरकम कानूनी जुर्माना भी ठोक दिया है। यह कानूनी कार्रवाई उस वक्त सामने आई है जब उनकी कंपनी पहले से ही दिवालियापन और कर्जदारों के अरबों डॉलर के दावों से जूझ रही है।

सिंगापुर की अदालत द्वारा दिए गए इस कड़े फैसले के पीछे अदालत के आदेशों की लगातार की गई अनदेखी को मुख्य वजह बताया गया है। अदालत से जुड़े आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, अप्रैल २०२४ से ही Byju रवींद्रन की निजी और व्यावसायिक संपत्तियों से जुड़े खुलासे करने के लिए अदालत की तरफ से कई बार स्पष्ट आदेश और निर्देश जारी किए गए थे। इन आदेशों के तहत उन्हें अपनी संपत्तियों का पूरा विवरण न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत करना था। हालांकि, रवींद्रन ने इन वैधानिक आदेशों का समय पर पालन नहीं किया और बार-बार चेतावनियों के बावजूद जरूरी जानकारियां साझा करने में कोताही बरती। इसे अदालत की गरिमा और आदेशों की खुली अवमानना मानते हुए न्यायाधीश ने उनके खिलाफ यह दंडात्मक कदम उठाया है।

इस पूरे अदालती विवाद की पृष्ठभूमि में कतर के सॉवरेन वेल्थ फंड यानी कतर इन्वेस्टमेंट अथॉरिटी की एक प्रमुख उपकंपनी 'कतर होल्डिंग्स' का नाम शामिल है। कतर होल्डिंग्स ने ही Byju रवींद्रन और उनकी संबंधित व्यावसायिक संस्थाओं के खिलाफ सिंगापुर की अदालत में इस कानूनी लड़ाई की शुरुआत की थी। कतर की इस बड़ी निवेश संस्था ने उस दौर में Byju के एक फंडिंग राउंड के दौरान भारी-भरकम निवेश किया था, जब यह एडटेक कंपनी वैश्विक स्तर पर अपने विस्तार की योजनाएं बना रही थी। हालांकि, बाद के दिनों में कंपनी के भीतर बड़े पैमाने पर छंटनी, वित्तीय गड़बड़ियों के आरोप और कुप्रबंधन की खबरें आने के बाद निवेशकों को अपने पैसे डूबने का खतरा सताने लगा, जिसके बाद उन्होंने कानूनी रिकवरी का रास्ता चुना। सिंगापुर कोर्ट ने Byju रवींद्रन को तुरंत संबंधित अधिकारियों के समक्ष आत्मसमर्पण करने, जुर्माने की राशि का भुगतान करने और 'Beeaar Investco Pte' नामक कंपनी की वैध मालिकी के सभी जरूरी दस्तावेज सौंपने का आदेश दिया है।

इस पूरे घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया देते हुए Byju रवींद्रन ने अपना रुख भी स्पष्ट करने का प्रयास किया है। उनका कहना है कि इस मामले को जिस तरह से पेश किया जा रहा है, वह उनके बारे में समाज में एक भ्रामक और गलत धारणा तैयार करता है। उन्होंने दावा किया कि कतर इन्वेस्टमेंट अथॉरिटी और अमेरिकी कर्जदाताओं सहित अन्य सभी प्रमुख पक्षों के साथ उनकी समझौता वार्ता पहले से ही काफी आगे बढ़ चुकी है और सैद्धांतिक रूप से एक व्यापक समझौते पर सहमति बन गई है। रवींद्रन के अनुसार, वे केवल विवादों को बढ़ाने के बजाय शांतिपूर्ण समाधान की दिशा में काम कर रहे थे, इसलिए उन्होंने हाल के महीनों में कई अदालती कार्यवाहियों का आक्रामक तरीके से विरोध नहीं किया था। उनका तर्क है कि इस संवेदनशील मोड़ पर इस तरह की कानूनी कार्रवाई केवल उन पर अतिरिक्त दबाव बनाने की एक रणनीति का हिस्सा है।

कभी साल 2022 में करीब बाईस अरब अमेरिकी डॉलर के रिकॉर्ड मूल्यांकन पर पहुंचने वाली इस कंपनी का पतन भारतीय कॉपोरेट इतिहास की सबसे नाटकीय घटनाओं में से एक माना जा रहा है। एक समय पर देश और दुनिया के सबसे अमीर शिक्षकों में गिने जाने वाले Byju रवींद्रन ने खुद पिछले साल एक मीडिया संवाद के दौरान यह स्वीकार किया था कि वर्तमान में उनकी कंपनी की वैल्यू घटकर व्यावहारिक रूप से शून्य हो चुकी है। कोरोना महामारी के दौर में जब ऑनलाइन पढ़ाई का चलन चरम पर था, तब इस कंपनी ने आक्रामक तरीके से कई अन्य कंपनियों का अधिग्रहण किया और दुनिया के सबसे महंगे विज्ञापनों और खेल आयोजनों को प्रायोजित किया। लेकिन महामारी का असर कम होते ही और ऑफलाइन कक्षाओं की बहाली के बाद, इनका पूरा बिजनेस मॉडल कर्ज के बोझ तले पूरी तरह चरमरा गया।

सिंगापुर के अलावा Byju रवींद्रन के खिलाफ संयुक्त राज्य अमेरिका की अदालतों में भी समानांतर रूप से बेहद कड़े मुकदमे चल रहे हैं। अमेरिका में कर्ज देने वाली संस्थाओं और बैंकों ने कंपनी को दिए गए 1.2 अरब डॉलर के सावधि ऋण की वसूली के लिए अमेरिकी अदालतों का दरवाजा खटखटाया हुआ है। वहाँ की एक दिवालियापन अदालत ने भी पूर्व में रवींद्रन को अपनी संपत्तियों के प्रकटीकरण से जुड़े आदेशों का पालन न करने के कारण नागरिक अवमानना का दोषी पाया था और उन पर प्रतिदिन दस हजार डॉलर का जुर्माना भी लगाया था। इसके अतिरिक्त, भारत के भीतर भी भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड के बकाए और अन्य वित्तीय देनदारियों के कारण कंपनी के खिलाफ कॉपोरेट दिवाला समाधान प्रक्रिया चल रही है, जिसने कंपनी के संचालन को पूरी तरह ठप कर दिया है।

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