Barabanki : मठ की जमीन से कब्जा हटाने की मांग को लेकर जिंदा समाधि में बैठे महंत, प्रशासन ने लिखित आश्वासन देकर खत्म कराया अनशन
पूरा विवाद मठ की संपत्ति को लेकर है, जिसे एक बहरूपिये ने फर्जी कागजात के जरिए अपने नाम करवा लिया था। महंत का आरोप है कि प्रशासन ने ढाई साल पहले 45 दिनों के भीतर मामला सुलझाने का भरोसा दिया था, लेकिन कोई
बाराबंकी की तहसील रामसनेहीघाट के भवनियापुर गांव में स्थित श्रीराम जानकी मठ की जमीन को बचाने के लिए महंत मुकुंद पुरी के जिंदा समाधि लेने के फैसले से प्रशासनिक महकमे में हड़कंप मच गया। जमीन पर कब्जे और तहसील प्रशासन की वादाखिलाफी से नाराज होकर महंत मंगलवार तड़के मठ परिसर में खोदे गए गड्ढे में समाधि लेने बैठ गए। इस घटना की जानकारी मिलते ही अलग-अलग जिलों से साधु-संतों और महंतों का जत्था मठ पहुंचने लगा और प्रशासन के खिलाफ विरोध शुरू कर दिया।
पूरा विवाद मठ की संपत्ति को लेकर है, जिसे एक बहरूपिये ने फर्जी कागजात के जरिए अपने नाम करवा लिया था। महंत का आरोप है कि प्रशासन ने ढाई साल पहले 45 दिनों के भीतर मामला सुलझाने का भरोसा दिया था, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। मंगलवार को जब एसडीएम और क्षेत्राधिकारी मौके पर पहुंचे, तो महंत गड्ढे से बाहर आने को तैयार नहीं हुए। कई घंटों की बातचीत और तनाव के बाद एसडीएम ने स्टाम्प पेपर पर 45 दिनों के भीतर जमीन का निस्तारण कराने और घेराबंदी कराने का लिखित आश्वासन दिया। इसके बाद क्षेत्राधिकारी जटाशंकर मिश्रा ने महंत को पानी पिलाकर उनका अनशन खत्म कराया। आश्वासन मिलने के बाद संतों और स्थानीय लोगों ने जयकारे लगाकर महंत का स्वागत किया।
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