गाजियाबाद में फर्जी डिग्री और मार्कशीट बनाने वाले देशव्यापी रैकेट का भंडाफोड़, 25 हजार का इनामी मयंक भारद्वाज गिरफ्तार

पकड़ा गया आरोपी मयंक भारद्वाज कोई साधारण जालसाज नहीं है, बल्कि वह देश के अलग-अलग राज्यों में फैले एक बहुत बड़े नेटवर्क का संचालन कर रहा था। यह गिरोह देश भर के विभिन्न प्रतिष्ठित और नामी विश्वविद्यालयों, तकनीकी संस्थानों और माध्यमिक शिक्षा बोर्डों के ना

Jun 7, 2026 - 11:40
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गाजियाबाद में फर्जी डिग्री और मार्कशीट बनाने वाले देशव्यापी रैकेट का भंडाफोड़, 25 हजार का इनामी मयंक भारद्वाज गिरफ्तार
गाजियाबाद में फर्जी डिग्री और मार्कशीट बनाने वाले देशव्यापी रैकेट का भंडाफोड़, 25 हजार का इनामी मयंक भारद्वाज गिरफ्तार

  • शिक्षा व्यवस्था में सेंध लगाने वाले अंतरराज्यीय गिरोह के मास्टरमाइंड को पुलिस ने दबोचा, लंबे समय से चल रहा था फरार
  • देशभर के प्रतिष्ठित विश्वविद्यालयों के नाम पर बांटी जा रही थीं फर्जी डिग्रियां, जालसाज की गिरफ्तारी से खुलेंगे कई बड़े राज

देश की शिक्षा व्यवस्था और युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने वाले एक बेहद शातिर और बड़े अंतरराज्यीय फर्जी डिग्री रैकेट के खिलाफ पुलिस प्रशासन को एक बड़ी कामयाबी हासिल हुई है। लंबे समय से कानून की नजरों से बचकर भाग रहे और पच्चीस हजार रुपये के घोषित इनामी अपराधी मयंक भारद्वाज को पुलिस की विशेष टीम ने उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद जिले से गिरफ्तार कर लिया है। इस आरोपी की गिरफ्तारी के लिए पुलिस की कई टीमें लगातार अलग-अलग राज्यों में दबिश दे रही थीं, लेकिन वह बार-बार अपनी लोकेशन बदलकर चकमा दे रहा था। आखिरकार सटीक सूचना और तकनीकी सर्विलांस की मदद से पुलिस ने उसे गाजियाबाद के एक ठिकाने से उस समय धर दबोचा, जब वह किसी नए काम के सिलसिले में वहां छिपकर बैठा हुआ था। इस बड़ी गिरफ्तारी के बाद शिक्षा जगत से लेकर प्रशासनिक हलकों तक में हड़कंप मच गया है।

पकड़ा गया आरोपी मयंक भारद्वाज कोई साधारण जालसाज नहीं है, बल्कि वह देश के अलग-अलग राज्यों में फैले एक बहुत बड़े नेटवर्क का संचालन कर रहा था। यह गिरोह देश भर के विभिन्न प्रतिष्ठित और नामी विश्वविद्यालयों, तकनीकी संस्थानों और माध्यमिक शिक्षा बोर्डों के नाम पर हूबहू असली जैसी दिखने वाली फर्जी डिग्रियां, मार्कशीट और माइग्रेशन सर्टिफिकेट तैयार करता था। शुरुआती जांच में यह बात सामने आई है कि इस गिरोह ने हजारों की संख्या में लोगों को फर्जी दस्तावेज मुहैया कराए हैं, जिनके दम पर कई लोग सरकारी और निजी क्षेत्रों में नौकरियां भी हासिल कर चुके हैं। गिरोह का काम करने का तरीका इतना शातिर था कि आम आदमी के लिए असली और नकली दस्तावेजों में अंतर करना लगभग नामुमकिन था, क्योंकि वे हुंडई पेपर, होलोग्राम और डिजिटल हस्ताक्षरों का इस्तेमाल भी बेहद बारीकी से करते थे।

इस रैकेट के काम करने की पद्धति को देखा जाए तो यह बेहद व्यवस्थित तरीके से एक समानांतर व्यवस्था चला रहे थे। आरोपी मयंक भारद्वाज ने विभिन्न शहरों में फैले शिक्षा सलाहकारों और कंसल्टेंसी सेंटरों के माध्यम से अपना जाल बिछा रखा था। जो छात्र परीक्षाओं में असफल हो जाते थे या कम समय में बिना पढ़ाई किए डिग्री हासिल करना चाहते थे, उन्हें यह गिरोह अपना निशाना बनाता था। इसके एवज में अभ्यर्थियों से मोटी रकम वसूली जाती थी, जो कुछ हजारों से लेकर लाखों रुपयों तक होती थी। इस गिरोह के तार केवल उत्तर प्रदेश तक ही सीमित नहीं थे, बल्कि दिल्ली, हरियाणा, पंजाब, राजस्थान और बिहार जैसे राज्यों से भी जुड़े हुए थे। पुलिस इस बात की गहराई से तफ्तीश कर रही है कि इन राज्यों में इस नेटवर्क को कौन-कौन लोग संरक्षण दे रहे थे और किस तरह से यह धंधा इतने बड़े पैमाने पर फल-फूल रहा था।

पुलिस टीम के लिए मयंक भारद्वाज तक पहुंचना एक बेहद चुनौतीपूर्ण काम था, क्योंकि वह लगातार अपने मोबाइल नंबर और ठिकानों को बदल रहा था। उसके खिलाफ पूर्व में दर्ज हुए मुकदमों के आधार पर पुलिस ने उसकी गिरफ्तारी पर पच्चीस हजार रुपये का इनाम घोषित किया था, जिसके बाद उस पर शिकंजा कसने के लिए दबाव और बढ़ गया था। गाजियाबाद पुलिस और स्पेशल टास्क फोर्स की संयुक्त कार्रवाई के दौरान जब उसे घेरा गया, तो उसने भागने की कोशिश भी की, लेकिन सतर्क पुलिसकर्मियों ने उसे मौके पर ही दबोच लिया। तलाशी के दौरान उसके पास से कई महत्वपूर्ण डिजिटल उपकरण, विभिन्न विश्वविद्यालयों के फर्जी होलोग्राम, जाली मोहरें और बड़ी मात्रा में तैयार किए गए फर्जी दस्तावेज बरामद हुए हैं, जिन्हें पुलिस ने अपने कब्जे में ले लिया है। आरोपी के पास से 4 लैपटॉप, 3 हाई-टेक प्रिंटर, 50 से अधिक नामी विश्वविद्यालयों की जाली मोहरें, और लगभग 200 से अधिक अर्ध-निर्मित फर्जी डिग्रियां बरामद की गई हैं।

इस गिरफ्तारी के बाद अब उन लोगों के बीच भी भारी खलबली मच गई है, जिन्होंने इस गिरोह से पैसे देकर फर्जी डिग्रियां और प्रमाणपत्र खरीदे थे। पुलिस विभाग अब उन सभी लाभार्थियों की सूची तैयार करने में जुट गया है, जिन्होंने मयंक भारद्वाज और उसके सहयोगियों से जाली दस्तावेज बनवाए थे। इन दस्तावेजों का उपयोग करके जिन लोगों ने विभिन्न विभागों में नौकरियां पाई हैं या उच्च शिक्षा संस्थानों में दाखिला लिया है, उन सभी के खिलाफ भी कानूनी कार्रवाई की तलवार लटक गई है। जांच अधिकारियों का कहना है कि फर्जी दस्तावेज बनवाने वाले भी इस अपराध में बराबर के साझीदार हैं, इसलिए आने वाले दिनों में कई और गिरफ्तारियां संभव हैं और संबंधित विभागों को इन संदिग्ध डिग्रीधारकों के सत्यापन के लिए पत्र लिखे जा रहे हैं।

इस पूरे मामले के सामने आने के बाद देश की यूनिवर्सिटी और शिक्षा बोर्डों की सुरक्षा प्रणालियों पर भी गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। आखिर कैसे कोई बाहरी गिरोह इतनी आसानी से हूबहू असली जैसी मार्कशीट और डिग्रियां तैयार कर लेता है और सिस्टम को इसकी भनक तक नहीं लगती। मयंक भारद्वाज से की जा रही पूछताछ में यह जानने का प्रयास किया जा रहा है कि क्या विभिन्न विश्वविद्यालयों या शिक्षा विभागों के कुछ अंदरूनी कर्मचारी भी इस काले धंधे में शामिल थे, जो उन्हें डेटा या असली दस्तावेजों के पैटर्न उपलब्ध कराते थे। इस पहलू पर जांच केंद्रित होने से इस बात की पूरी संभावना है कि जल्द ही शिक्षा जगत से जुड़े कुछ बड़े नामों और अधिकारियों की संलिप्तता का भी पर्दाफाश हो सकता है।

फिलहाल पुलिस ने आरोपी मयंक भारद्वाज को संबंधित धाराओं के तहत अदालत में पेश कर दिया है, जहां से उसे आगे की सघन पूछताछ के लिए पुलिस रिमांड पर भेज दिया गया है। रिमांड अवधि के दौरान पुलिस उसके बैंक खातों, वित्तीय लेन-देन और इस अवैध धंधे से अर्जित की गई चल-अचल संपत्ति का पूरा ब्योरा खंगाल रही है ताकि इस पूरे आर्थिक साम्राज्य को ध्वस्त किया जा सके। इस बड़ी कार्रवाई से यह साफ संदेश गया है कि शिक्षा जैसी पवित्र व्यवस्था को धूमिल करने वाले तत्वों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा। आने वाले समय में पुलिस इस गिरोह के बाकी बचे सदस्यों को भी दबोचने के लिए अलग-अलग ठिकानों पर छापेमारी की कार्रवाई को और तेज करने जा रही है।

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