बलिया में अकीदत के साथ निकला चेहल्लुम का जुलूस, या हुसैन की सदाओं के बीच गूंजा शहर

बलिया के बिशुनीपुर स्थित इमामबाड़े से गमगीन माहौल में जुलूसे चेहल्लुम बरामद हुआ। जंजीरी मातम और नौहाख्वानी के साथ शोहदा-ए-कर्बला को श्रद्धांजलि दी गई।

Aug 8, 2026 - 21:55
Aug 8, 2026 - 22:00
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बलिया में अकीदत के साथ निकला चेहल्लुम का जुलूस, या हुसैन की सदाओं के बीच गूंजा शहर

रिपोर्टर: सैयद आसिफ हुसैन ज़ैदी

बलिया में गमगीन माहौल में संपन्न हुआ जुलूसे चेहल्लुम, जंजीरी मातम के बीच गूंजी 'या हुसैन' की सदाएं

बलिया शहर के बिशुनीपुर स्थित मुनीर हसन ज़ैदी के प्राचीन इमामबाड़े से जुलूसे चेहल्लुम पूरे एहतराम, गम और शांतिपूर्ण माहौल में बरामद हुआ। 'या हुसैन' के नारों और गमगीन माहौल के बीच निकले इस जुलूस में अमारी, जुल्जनाह, अलम और ताबूत की शबीह शामिल रही।

जुलूस की शुरुआत से पहले आयोजित मजलिस को संबोधित करते हुए हुज्जतुल इस्लाम मौलाना आज़ीम जौरासी किब्ला ने हज़रत इमाम हुसैन और कर्बला के 72 शहीदों के बलिदान पर विस्तार से चर्चा की। कार्यक्रम का प्रारंभ सोजख्वानी से हुआ, जिसका कुशल संचालन मौलाना कुमैल और सिमाब गाजीपुरी ने किया। मजलिस का समापन मौलाना वसीम रजा ज़ैदी के वक्तव्य के साथ हुआ।

जुलूस के दौरान आजमगढ़ की अंजुमन मुहिब्बाने हुसैन सम्मनपुर और बनारस की सदा-ए-अब्बास के नौहाख्वाहों के अलावा कुमैल, सुहैल और अली ज़ैदी ने करुण नौहे पढ़े। इस दौरान अंजुमन के सदस्यों ने जंजीरी मातम कर जनाबे जैनब को पुरसा दिया।

मार्ग में अकीदतमंदों के लिए पेयजल और सबीलों की समुचित व्यवस्था की गई थी।

पुलिस और स्थानीय प्रशासन के पुख्ता सुरक्षा प्रबंधों के बीच पूरा आयोजन आपसी सौहार्द और शांति के साथ पूरा हुआ। कार्यक्रम के अंत में अंजुमन हाशिमियां के अध्यक्ष शहनशाह हुसैन ज़ैदी और अन्य पदाधिकारियों ने जिला प्रशासन, मातमी अंजुमनों और मीडियाकर्मियों के प्रति धन्यवाद व्यक्त किया।

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