UP Ration Dealer News: कोटेदारों को योगी सरकार की बड़ी सौगात, अब हर कुंतल खाद्यान्न पर मिलेगा ₹125 का लाभांश
उत्तर प्रदेश कैबिनेट ने राशन कोटेदारों को ₹25 प्रति कुंतल अतिरिक्त राज्य मार्जिन देने का निर्णय लिया है। अब कुल लाभांश ₹125 होगा। यह फैसला जुलाई 2026 से प्रभावी होगा।
लखनऊ। उत्तर प्रदेश में सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) की सबसे महत्वपूर्ण जमीनी कड़ी उचित दर विक्रेताओं (राशन कोटेदारों) के आर्थिक हितों को सुरक्षित करते हुए राज्य सरकार ने बड़ा नीतिगत निर्णय लिया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में मंगलवार को संपन्न हुई राज्य मंत्रिपरिषद की बैठक में प्रदेश के राशन कोटेदारों को वितरित किए जाने वाले खाद्यान्न पर 25 रुपये प्रति कुंतल का अतिरिक्त राज्य मार्जिन (स्टेट मार्जिन) देने के प्रस्ताव को औपचारिक स्वीकृति दे दी गई। इस नए प्रावधान के लागू होने के साथ ही कोटेदारों को मिलने वाला कुल लाभांश अब बढ़कर 125 रुपये प्रति कुंतल हो गया है।
कैबिनेट के इस फैसले से राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम-2013 (एनएफएसए) तथा प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना (पीएमजीकेएवाई) के अंतर्गत राज्य के करोड़ों पात्र गृहस्थी और अंत्योदय कार्डधारकों को खाद्यान्न वितरित करने वाले हजारों राशन विक्रेताओं को प्रत्यक्ष आर्थिक लाभ मिलेगा। इससे कोटेदारों की आजीविका सुदृढ़ होगी और ग्रामीण व शहरी क्षेत्रों में सार्वजनिक वितरण व्यवस्था में पारदर्शिता व सक्रियता बढ़ेगी।
100 रुपये के आधारभूत लाभांश के ऊपर मिलेगा 25 रुपये का अतिरिक्त मार्जिन
मंत्रिपरिषद की बैठक के उपरांत राज्य सरकार के वित्त एवं संसदीय कार्य मंत्री सुरेश कुमार खन्ना ने इस फैसले की विस्तृत रूपरेखा साझा की। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार ने इससे पूर्व 1 सितंबर 2026 के एक आदेश के माध्यम से उचित दर विक्रेताओं के आधारभूत लाभांश को 90 रुपये से बढ़ाकर 100 रुपये प्रति कुंतल किया था।
अब कैबिनेट ने कोटेदारों के जमीनी खर्चों को ध्यान में रखते हुए इस 100 रुपये के आधारभूत लाभांश के अतिरिक्त 25 रुपये प्रति कुंतल का अतिरिक्त राज्य मार्जिन अपनी ओर से जोड़ने का निर्णय लिया है। इस प्रकार, उचित दर विक्रेताओं को अब प्रति कुंतल कुल 125 रुपये का शुद्ध लाभांश प्राप्त होगा।
वितरण खर्च से सीमित हो रही थी बचत, डोर-स्टेप डिलीवरी बनी वजह
वर्तमान व्यवस्था में खाद्यान्न को भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) के गोदामों और राज्य भंडारण निगम के केंद्रों से सीधे कोटेदार की दुकान तक पहुंचाने के लिए 'सिंगल स्टेज डोर-स्टेप डिलीवरी' व्यवस्था लागू है। व्यवस्था के तहत अनाज दुकान के दरवाजे तक अवश्य पहुंचता है, लेकिन उसके बाद:
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दुकान पर बोरियों को सुरक्षित उतारना और व्यवस्थित रखरखाव करना।
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कार्डधारकों को इलेक्ट्रॉनिक तराजू और ई-पॉस (e-PoS) मशीनों के जरिए बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण के साथ अनाज तौलकर देना।
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दुकान का मासिक किराया, बिजली का बिल और सहायक कर्मचारियों (पल्लेदारों) की मजदूरी का भुगतान करना।
इन सभी अपरिहार्य खर्चों का वहन कोटेदार को अपने मूल लाभांश से ही करना पड़ता था। परिणामस्वरूप, महीने भर की अथक मेहनत के बावजूद कोटेदारों के पास अपने परिवार के भरण-पोषण के लिए बेहद सीमित बचत रह जाती थी। कई जनपदों से कोटेदार संघों द्वारा लगातार यह मांग उठाई जा रही थी कि महंगाई और संचालन लागत को देखते हुए उनके मार्जिन में तत्काल वृद्धि की जाए। राज्य सरकार द्वारा 25 रुपये का अतिरिक्त मार्जिन दिए जाने से इन व्यावहारिक कठिनाइयों से काफी हद तक राहत मिलेगी।
जुलाई 2026 से प्रभावी होगा फैसला, खजाने पर आएगा 168.75 करोड़ का भार
कैबिनेट के निर्णय के अनुसार, इस अतिरिक्त राज्य मार्जिन को पूर्व प्रभाव से यानी जुलाई 2026 से ही लागू माना जाएगा।
इसके वित्तीय भार का ब्योरा देते हुए वित्त मंत्री ने बताया कि:
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चालू वित्तीय वर्ष का खर्च: वित्तीय वर्ष 2026-27 के शेष 9 महीनों (जुलाई 2026 से मार्च 2027) की अवधि के लिए राज्य सरकार के खजाने पर 168.75 करोड़ रुपये का अतिरिक्त वित्तीय भार पड़ेगा।
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वार्षिक अनुमानित व्यय: पूरे 12 महीनों के आधार पर यदि गणना की जाए, तो राज्य सरकार को अतिरिक्त मार्जिन मद में प्रतिवर्ष लगभग 225 करोड़ रुपये का नियमित व्यय वहन करना होगा।
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वितरण का दायरा: उत्तर प्रदेश में राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम और प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना के तहत सालाना औसतन 90 लाख मीट्रिक टन खाद्यान्न का सुचारु वितरण सुनिश्चित किया जाता है।
सार्वजनिक वितरण व्यवस्था होगी अधिक पारदर्शी और सुदृढ़
राशन कोटेदारों को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने का सीधा सकारात्मक प्रभाव प्रदेश के 15 करोड़ से अधिक राशन लाभार्थियों पर पड़ेगा। जब कोटेदारों को उनके कार्य का उचित और सम्मानजनक पारिश्रमिक प्राप्त होगा, तो खाद्यान्न वितरण में अनियमितता, घटतौली या कालाबाजारी की गुंजाइश स्वतः समाप्त होगी।
खाद्य एवं रसद विभाग के अधिकारियों का कहना है कि लाभांश में वृद्धि होने से कोटेदार अपनी दुकानों पर तकनीकी उपकरणों के रख-रखाव, निर्बाध इंटरनेट कनेक्टिविटी और लाभार्थियों के बैठने व छाया की व्यवस्था को बेहतर बना सकेंगे। कैबिनेट की मंजूरी के बाद खाद्य एवं रसद विभाग द्वारा जल्द ही इसका शासनादेश जारी कर जुलाई 2026 से अब तक के वितरित खाद्यान्न के बकाये एरियर के भुगतान की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।
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