UP Fisheries News: पूर्वांचल में मछली पालन को लगेंगे आधुनिक पंख, योगी कैबिनेट ने वर्ल्डफिश के साथ एमओयू को दी मंजूरी
उत्तर प्रदेश कैबिनेट ने पूर्वी यूपी में 'वर्ल्डफिश यूपी फिशरीज प्रोजेक्ट सेंटर' की स्थापना के लिए एमओयू को मंजूरी दी। आधुनिक वैज्ञानिक तकनीकों से मछली उत्पादन और किसानों की आय बढ़ेगी।
लखनऊ। उत्तर प्रदेश के ग्रामीण अंचल में आजीविका के साधनों को मजबूत करने और जल संसाधनों के व्यावसायिक उपयोग को बढ़ावा देने के क्रम में राज्य सरकार ने अंतरराष्ट्रीय स्तर की विशेषज्ञता जोड़ने का निर्णय लिया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में मंगलवार को संपन्न हुई राज्य मंत्रिपरिषद की बैठक में पूर्वी उत्तर प्रदेश (पूर्वांचल) में मत्स्य पालन के समग्र विकास के लिए एक ऐतिहासिक प्रस्ताव पर मुहर लगाई गई। कैबिनेट ने राज्य सरकार, मत्स्य विभाग उत्तर प्रदेश और अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त गैर-लाभकारी अनुसंधान संगठन 'वर्ल्डफिश' (WorldFish) के बीच त्रिपक्षीय समझौता ज्ञापन (एमओयू) के अनुमोदन को औपचारिक स्वीकृति प्रदान कर दी है।
इस साझेदारी के तहत पूर्वी उत्तर प्रदेश में 'वर्ल्डफिश उत्तर प्रदेश फिशरीज प्रोजेक्ट सेंटर' की स्थापना और संचालन का मार्ग प्रशस्त हो गया है। इस केंद्र का मुख्य लक्ष्य पूर्वांचल के विभिन्न जनपदों में उपलब्ध अपार जल संपदा जैसे तालाबों, झीलों, जलाशयों और नदियों के कछारी क्षेत्रों का वैज्ञानिक उपयोग कर मछली उत्पादन की आधुनिक तकनीकों को जमीनी स्तर पर उतारना है।
वर्तमान में 13.31 लाख टन उत्पादन, नई ऊंचाई की ओर यूपी
कैबिनेट बैठक के उपरांत वित्त एवं संसदीय कार्य मंत्री सुरेश कुमार खन्ना ने इस नीतिगत समझौते की विस्तृत पृष्ठभूमि साझा की। उन्होंने बताया कि उत्तर प्रदेश अंतर्देशीय मत्स्य उत्पादन (Inland Fisheries) में देश के अग्रणी राज्यों में शामिल है। वर्तमान आंकड़ों के अनुसार, प्रदेश में सालाना लगभग 13.31 लाख टन मछली का उत्पादन दर्ज किया जा रहा है।
हालांकि, राज्य सरकार का मानना है कि पारंपरिक पद्धतियों के चलते उत्पादकता अभी भी अपनी वास्तविक क्षमता से कम है। अंतरराष्ट्रीय संस्था वर्ल्डफिश के तकनीकी सहयोग से आधुनिक वैज्ञानिक मॉडल, उन्नत बीज (फिंगरलिंग्स), संतुलित पोषण प्रबंधन और रोग नियंत्रण प्रणालियों को लागू किया जाएगा। इससे प्रति हेक्टेयर जलक्षेत्र में उत्पादकता में उल्लेखनीय वृद्धि होगी, जिससे राज्य का कुल मत्स्य उत्पादन मौजूदा 13.31 लाख टन के स्तर से कई गुना आगे निकल सकेगा।
पूर्वांचल के जलस्रोतों का वैज्ञानिक कायाकल्प
भौगोलिक दृष्टि से पूर्वी उत्तर प्रदेश में पानी की उपलब्धता पर्याप्त है। गोरखपुर, बस्ती, आजमगढ़, वाराणसी, मीरजापुर, गोंडा, बहराइच और प्रयागराज मंडलों के अंतर्गत हजारों की संख्या में प्राकृतिक ताल, पोखर और बरसाती जलभराव वाले बड़े क्षेत्र मौजूद हैं।
अब तक इन जलस्रोतों का उपयोग स्थानीय स्तर पर बिना किसी वैज्ञानिक प्रबंधन के किया जाता रहा है। वर्ल्डफिश के साथ हुए इस करार के बाद:
-
गुणवत्तापूर्ण मत्स्य बीज: स्थानीय जलवायु और जल गुणवत्ता के अनुकूल उन्नत किस्मों के मत्स्य बीज किसानों को आसानी से सुलभ कराए जाएंगे।
-
पारिस्थितिकी संरक्षण: जलीय पर्यावरण को नुकसान पहुंचाए बिना टिकाऊ और प्राकृतिक तरीके से मछलियों के संवर्धन पर काम होगा।
-
आधुनिक पद्धतियां: बायोफ्लॉक तकनीक, रीसर्क्युलेटरी एक्वाकल्चर सिस्टम (आरएएस) और केज कल्चर जैसी कम लागत व उच्च मुनाफे वाली तकनीकों का व्यावहारिक प्रशिक्षण किसानों को दिया जाएगा।
किसानों और मत्स्य पालकों की आय में होगा सीधा इजाफा
राज्य सरकार का प्राथमिक उद्देश्य केवल उत्पादन का आंकड़ा बढ़ाना नहीं है, बल्कि ग्रामीण स्तर पर छोटे और सीमांत किसानों, पट्टाधारकों और निषाद-कश्यप समाज सहित पारंपरिक मछुआरा समुदाय की आर्थिक स्थिति को सुदृढ़ करना है।
कृषि के साथ मत्स्य पालन को एक पूरक उद्यम के रूप में विकसित करने से किसानों की जोखिम वहन क्षमता बढ़ती है। जब किसी एक मौसम में सामान्य फसल सूखे या बाढ़ से प्रभावित होती है, तो मत्स्य पालन एक स्थिर और नकद आय का स्रोत बनकर परिवार को वित्तीय सुरक्षा प्रदान करता है। नए प्रोजेक्ट सेंटर के माध्यम से सीधे गांवों में फील्ड ट्रायल और प्रदर्शन इकाइयां (डेमो फार्म्स) स्थापित की जाएंगी, जिससे किसान आधुनिक तकनीकों को प्रत्यक्ष देखकर सीख सकें।
कोल्ड चेन, मार्केटिंग और रोजगार के नए अवसर
मत्स्य उत्पादन के विस्तार के साथ ही उसके भंडारण और सुरक्षित विपणन की एक मजबूत सप्लाई चेन तैयार की जाएगी। पूर्वांचल में ताजा मछली की मांग बड़े पैमाने पर स्थानीय बाजारों, पड़ोसी राज्य बिहार और पूर्वोत्तर राज्यों में बनी रहती है।
-
मछली पकड़े जाने के बाद होने वाले नुकसान (पोस्ट-हार्वेस्ट लॉस) को रोकने के लिए स्थानीय स्तर पर छोटे कोल्ड स्टोरेज और बर्फ कारखानों के नेटवर्क को प्रोत्साहित किया जाएगा।
-
मत्स्य फीड (मछली के चारे) के स्थानीय निर्माण के लिए लघु कुटीर उद्योगों की स्थापना होगी, जिससे ग्रामीण युवाओं को रोजगार मिलेगा।
-
महिला स्वयं सहायता समूहों को मछली की प्रोसेसिंग, मूल्य संवर्धन (जैसे फिश पिकल, ड्राइड फिश और रेडी-टू-कुक उत्पाद) और स्थानीय बाजारों में खुदरा बिक्री के कार्यों से जोड़ा जाएगा।
कैबिनेट की इस मंजूरी से यह स्पष्ट है कि राज्य सरकार पूर्वांचल के आर्थिक पिछड़ेपन को दूर करने के लिए पारंपरिक कृषि से आगे बढ़कर ब्लू इकोनॉमी (नीली क्रांति) को एक बड़े औजार के रूप में उपयोग करने की दिशा में अग्रसर है। मत्स्य विभाग अब वर्ल्डफिश के तकनीकी दल के साथ मिलकर परियोजना केंद्र के लिए स्थल चयन और प्रशासनिक प्रोटोकॉल को तेजी से अंतिम रूप देने की प्रक्रिया शुरू करेगा।
What's Your Reaction?







