लखनऊ के इटौंजा में जी-9 टिश्यू कल्चर केले के पौधों का वितरण शुरू, किसानों की आय बढ़ाने के लिए इजरायली तकनीक

लखनऊ के इटौंजा में इजराइल तकनीक पर आधारित जी-9 टिश्यू कल्चर केले के पौधों के केंद्र की शुरुआत हुई। 16 रुपये में मिलने वाले यह पौधे बंपर पैदावार देंगे।

Jul 8, 2026 - 22:59
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लखनऊ के इटौंजा में जी-9 टिश्यू कल्चर केले के पौधों का वितरण शुरू, किसानों की आय बढ़ाने के लिए इजरायली तकनीक
लखनऊ के इटौंजा में इजरायली तकनीक आधारित जी-9 केले के पौधों का केंद्र शुरू, कम लागत में किसानों को मिलेगी बंपर पैदावार

लखनऊ के बख्शी का तालाब (बीकेटी) क्षेत्र के अंतर्गत इटौंजा-महोना मार्ग पर ईंट भट्ठे के पास ग्रीनलैंड एग्री बायोटेक के एक नए पौधे वितरण केंद्र की शुरुआत की गई है। इस केंद्र के माध्यम से स्थानीय किसानों को आधुनिक और वैज्ञानिक कृषि तकनीक से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है। यहां इजराइल की उन्नत तकनीक पर आधारित जी-9 टिश्यू कल्चर केले के पौधों का वितरण किया जाएगा। इस नए केंद्र का औपचारिक उद्घाटन क्षेत्र के प्रगतिशील किसान जसकरण लोधी ने फीता काटकर किया। इस अवसर पर आस-पास के गांवों के बड़ी संख्या में किसान, स्थानीय जनप्रतिनिधि और गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।

समारोह में आए ग्रीनलैंड एग्री बायोटेक के प्रबंधकों ने बताया कि संस्थान का मुख्य कार्यालय दुर्गापुर (पश्चिम बंगाल) में स्थित है। कंपनी के मैनेजर श्रीकांत ने तकनीक की जानकारी देते हुए बताया कि जी-9 टिश्यू कल्चर केले के इन पौधों को बेहद आधुनिक प्रयोगशाला (लैब) में वैज्ञानिक विधि से तैयार किया जाता है। वर्तमान समय में इन उन्नत पौधों की मांग बहुत अधिक है और इनकी आपूर्ति पश्चिम बंगाल, ओडिशा, बिहार तथा उत्तर प्रदेश सहित देश के कई अन्य राज्यों में बड़े पैमाने पर की जा रही है। इस परियोजना का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों के किसानों को उच्च गुणवत्ता वाली रोपण सामग्री उपलब्ध कराना है, जिससे वे अपनी फसलों से बेहतर और रिकॉर्ड तोड़ उत्पादन प्राप्त कर सकें।

संस्थान के उत्तर प्रदेश इकाई के प्लांट प्रभारी प्रकाश पॉल ने बताया कि किसानों की सहूलियत को देखते हुए एक पौधे की कीमत मात्र 16 रुपये तय की गई है। सामान्य पारंपरिक केले के पौधों की तुलना में इन जी-9 टिश्यू कल्चर पौधों की फसल उत्पादन क्षमता बहुत अधिक होती है। इसके साथ ही इन पौधों में विभिन्न प्रकार के रोगों, वायरस और कीटों से लड़ने की क्षमता भी सामान्य से कहीं ज्यादा होती है। उन्होंने क्षेत्र के किसानों से अनुरोध किया कि वे शुरुआत में पहले कम संख्या में इन पौधों को अपने खेतों में लगाकर देखें और खुद इसकी बेहतरीन गुणवत्ता व उत्पादन का अनुभव प्राप्त करें।

प्लांट प्रभारी ने यह भी जानकारी दी कि ये विशेष पौधे मुख्य रूप से मई, जून और जुलाई के महीनों के दौरान ही बिक्री के लिए उपलब्ध रहेंगे। उन्होंने एक सराहनीय सामाजिक संकल्प साझा करते हुए कहा कि इस केंद्र से होने वाली आय का एक निश्चित हिस्सा क्षेत्र के गरीब और जरूरतमंद स्कूली बच्चों की पढ़ाई-लिखाई और उनके विकास से जुड़े कार्यों में मदद के रूप में खर्च किया जाएगा। उद्घाटन के इस विशेष मौके पर गोहना खुर्द के प्रधान प्रतिनिधि रंजीत रावत और मनोज रावत सहित क्षेत्र के कई प्रगतिशील किसान मौजूद रहे, जिन्होंने आधुनिक कृषि पद्धतियों को अपनाकर अपनी आय दोगुनी करने और वैज्ञानिक खेती को बढ़ावा देने के तरीकों पर विस्तार से चर्चा की।

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