दुग्ध उत्पादन में उत्तर प्रदेश देश में अव्वल, 38.8 मिलियन मीट्रिक टन उत्पादन के साथ बना नंबर-1 राज्य

उत्तर प्रदेश 38.8 मिलियन मीट्रic टन दुग्ध उत्पादन के साथ देश में पहले स्थान पर पहुंचा। दुग्धशाला विकास विभाग की स्वर्ण जयंती पर सभी जिलों में डेयरी कॉन्क्लेव।

Aug 5, 2026 - 22:57
 0  5
दुग्ध उत्पादन में उत्तर प्रदेश देश में अव्वल, 38.8 मिलियन मीट्रिक टन उत्पादन के साथ बना नंबर-1 राज्य

उत्तर प्रदेश ने दुग्ध उत्पादन के क्षेत्र में एक नया रिकॉर्ड बनाते हुए देश भर में पहला स्थान हासिल किया है। राज्य में कुल 38.8 मिलियन मीट्रिक टन दूध का उत्पादन हुआ है, जो देश के कुल दुग्ध उत्पादन का लगभग 16 प्रतिशत हिस्सा है। दुग्धशाला विकास विभाग की स्थापना के 50 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में राज्य के सभी 75 जिलों में डेयरी कॉन्क्लेव का आयोजन किया गया, जिसमें डेयरी क्षेत्र को मजबूत करने और पशुपालकों की आय बढ़ाने पर जोर दिया गया।

दुग्ध आयुक्त धनलक्ष्मी के. ने जानकारी दी कि भारत विश्व का सबसे बड़ा दुग्ध उत्पादक देश है, जिसमें उत्तर प्रदेश का योगदान सबसे प्रमुख है। उन्होंने कहा कि डेयरी क्षेत्र ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ करने, महिलाओं के सशक्तिकरण और युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा करने का एक मजबूत माध्यम बनकर उभरा है। राज्य सरकार नंद बाबा दुग्ध मिशन और अन्य कल्याणकारी योजनाओं के जरिए हजारों दुग्ध उत्पादकों को सीधा लाभ पहुंचा रही है।

डेयरी कॉन्क्लेव के अवसर पर पूरे प्रदेश में विभिन्न योजनाओं के लाभार्थियों को चयन पत्र वितरित किए गए। इनमें मुख्यमंत्री स्वदेशी गो-संवर्धन योजना के 2100 नव चयनित लाभार्थी, मिनी नंदिनी कृषक समृद्धि योजना के 1500 से अधिक और नंदिनी कृषक समृद्धि योजना के 450 से अधिक लाभार्थी शामिल हैं। इसके अलावा, प्रारंभिक दुग्ध सहकारी समितियों के गठन से राज्य में दो लाख से अधिक लोगों को प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रोजगार मिला है।

राज्य में डेयरी क्षेत्र के विस्तार के लिए 28,000 करोड़ रुपये से अधिक मूल्य के 829 सहमति पत्रों पर हस्ताक्षर किए गए हैं। उत्तर प्रदेश दुग्धशाला विकास एवं दुग्ध उत्पाद प्रोत्साहन नीति के माध्यम से प्रतिदिन 39 लाख लीटर दूध के प्रसंस्करण और उसे ठंडा रखने की क्षमता में वृद्धि दर्ज की गई है। इस नीति के तहत निवेशकों को सीधे उनके खातों में 42 करोड़ रुपये से अधिक की अनुदान राशि प्रदान की गई है, जिससे लगभग 10,000 नए रोजगार के अवसर सृजित हुए हैं।

राज्य भर के जिलों में आयोजित इस कॉन्क्लेव में जनप्रतिनिधियों, प्रशासनिक अधिकारियों, पशुपालन विशेषज्ञों, कृषि विज्ञान केंद्रों के वैज्ञानिकों और प्रगतिशील पशुपालकों ने हिस्सा लिया। कार्यक्रम के दौरान विशेषज्ञों ने पशुपालकों को आधुनिक डेयरी तकनीकों, नस्ल सुधार, वैज्ञानिक पशुपालन, पशु स्वास्थ्य सुरक्षा और संतुलित आहार प्रबंधन के बारे में विस्तार से जानकारी दी।

Also Click : Sambhal: सम्भल हातिम सराय रेलवे स्टेशन का नाम बदलने की उठी मांग, विहिप बोला- 'हरिहर नगर' रखा जाए नाम

What's Your Reaction?

like

dislike

love

funny

angry

sad

wow