UP Farmer Loan Scheme: यूपी में किसानों को 6% ब्याज पर मिलेगा 6 लाख तक का कर्ज, योगी कैबिनेट ने दी ब्याज अनुदान को मंजूरी
मुख्यमंत्री कृषक समृद्धि योजना के तहत यूपी के किसानों को 6% ब्याज पर ₹6 लाख तक का दीर्घकालिक ऋण मिलेगा। समय पर किस्त चुकाने पर 5% ब्याज अनुदान राज्य सरकार देगी।
लखनऊ। उत्तर प्रदेश में ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई गति देने और कृषि क्षेत्र में बुनियादी संपत्तियों के निर्माण के लिए राज्य सरकार ने किसानों के पक्ष में बड़ा वित्तीय फैसला लिया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में मंगलवार को संपन्न हुई राज्य मंत्रिपरिषद की बैठक में 'मुख्यमंत्री कृषक समृद्धि योजना' के अंतर्गत लघु एवं सीमांत किसानों को रियायती दरों पर दीर्घकालिक कृषि ऋण उपलब्ध कराने के प्रस्ताव को औपचारिक स्वीकृति दे दी गई। इस नीतिगत निर्णय के तहत किसानों को 6 लाख रुपये तक का दीर्घकालिक ऋण मात्र 6 प्रतिशत वार्षिक प्रभावी ब्याज दर पर उपलब्ध कराया जाएगा।
कैबिनेट द्वारा अनुमोदित व्यवस्था के तहत यह ऋण उत्तर प्रदेश सहकारी ग्राम विकास बैंक लिमिटेड (यूपीएसजीवीबी) के माध्यम से वितरित किया जाएगा। योजना की सबसे महत्वपूर्ण विशेषता यह है कि राज्य सरकार किसानों द्वारा लिए गए ऋणों पर 5 प्रतिशत वार्षिक ब्याज अनुदान (सब्सिडी) स्वयं वहन करेगी। इससे किसानों को बाजार की उच्च ब्याज दरों और स्थानीय गैर-संस्थागत साहूकारों के भारी वित्तीय चक्रव्यूह से स्थायी मुक्ति मिल सकेगी।
वित्तीय अनुशासन पर इनाम: समय पर भुगतान पर ही मिलेगा 5% का अनुदान
कैबिनेट बैठक के बाद वित्त एवं संसदीय कार्य मंत्री सुरेश कुमार खन्ना ने इस योजना की विधिक और वित्तीय रूपरेखा साझा की। उन्होंने स्पष्ट किया कि राज्य सरकार द्वारा दिया जाने वाला 5 प्रतिशत ब्याज अनुदान बिना किसी शर्त के सभी बकाएदारों के लिए नहीं होगा। इसका सीधा लाभ केवल उन्हीं ऋणी किसानों को अनुमन्य किया जाएगा, जो बैंक द्वारा निर्धारित समय-सारणी के अनुसार अपनी देय किस्तों का नियमित भुगतान नियत तिथि पर करेंगे।
यदि कोई किसान अपनी किस्त के भुगतान में चूक करता है या डिफाल्टर की श्रेणी में आता है, तो उसे उस अवधि के लिए ब्याज उपादान का लाभ नहीं मिलेगा और उसे बैंक की मूल मानक दरों के अनुसार भुगतान करना होगा। इस कड़े और पारदर्शी प्रावधान का उद्देश्य कृषि ऋणों में वित्तीय अनुशासन को बढ़ावा देना, गैर-निष्पादित परिसंपत्तियों (एनपीए) को रोकना और ईमानदार किसानों को प्रत्यक्ष आर्थिक प्रोत्साहन देना है।
सालाना आधार पर होगा बजट और देनदारियों का वैज्ञानिक आकलन
योजना के सुचारु वित्तीय संचालन के लिए शासन ने ब्याज अनुदान के आकलन की एक वैज्ञानिक प्रणाली विकसित की है। वित्त मंत्री के अनुसार, राज्य सरकार द्वारा वहन किए जाने वाले 5 प्रतिशत ब्याज अनुदान का वार्षिक मूल्यांकन दोहरे आधार पर किया जाएगा:
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अवशेष मूलधन: योजना प्रारंभ होने के उपरांत विगत वित्तीय वर्षों में किसानों को वितरित किए गए कुल ऋणों के अवशेष (आउटस्टैंडिंग) मूलधन की स्थिति।
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नए ऋणों का वितरण: आगामी वित्तीय वर्षों में बैंक द्वारा नए पात्र किसानों को वितरित किए जाने वाले अतिरिक्त ऋण की कुल राशि।
इस दोहरे मूल्यांकन से सहकारिता विभाग और राज्य वित्त विभाग को प्रतिवर्ष यह सटीक जानकारी रहेगी कि बजट में ब्याज उपादान मद में कितनी धनराशि सुरक्षित रखनी है, ताकि किसानों के खातों में सब्सिडी का समायोजन बिना किसी प्रशासनिक देरी के सीधे और पारदर्शी ढंग से हो सके।
दीर्घकालिक ऋण से बदलेगी खेती की संरचना: पूंजी निर्माण को मिलेगा बल
कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, सामान्य फसली ऋण (जैसे किसान क्रेडिट कार्ड के तहत मिलने वाले अल्पकालिक ऋण) केवल बीज, खाद, कीटनाशक और जुताई जैसी तात्कालिक मौसमी जरूरतों को पूरा करते हैं। इनसे कृषि क्षेत्र में कोई स्थायी ढांचागत निर्माण नहीं हो पाता। इसके विपरीत, 6 लाख रुपये तक का यह दीर्घकालिक ऋण (Long-term Loan) किसानों को कृषि में पूंजी निर्माण (Capital Formation) करने की क्षमता प्रदान करेगा।
लघु एवं सीमांत किसानों की आय बढ़ाने में होगी क्रांतिकारी पहल
उत्तर प्रदेश में 85 प्रतिशत से अधिक काश्तकार लघु और सीमांत श्रेणी के अंतर्गत आते हैं, जिनके पास 2 हेक्टेयर या उससे कम कृषि भूमि है। कम रकबा होने के कारण इन किसानों के पास बचत बहुत कम होती है, जिससे वे बैंकों से सामान्य दरों (जो सामान्यतः 11 से 14 प्रतिशत तक होती हैं) पर बड़ा कर्ज लेने का जोखिम नहीं उठा पाते थे।
मुख्यमंत्री कृषक समृद्धि योजना के तहत 6 प्रतिशत की रियायती दर और लंबी चुकौती अवधि मिलने से लघु किसानों पर मासिक या छमाही किस्तों का बोझ अत्यधिक कम रहेगा। इससे वे अपनी बंजर या कम उत्पादक जमीन पर आधुनिक तकनीक लागू कर पाएंगे, जिससे प्रति एकड़ पैदावार और शुद्ध आय में उल्लेखनीय वृद्धि होगी।
सहकारिता विभाग के अधिकारियों ने बताया कि मंत्रिपरिषद से मंजूरी मिलने के बाद अब उत्तर प्रदेश सहकारी ग्राम विकास बैंक की सभी जिला और तहसील स्तरीय शाखाओं को आवश्यक परिचालन निर्देश जारी किए जा रहे हैं। बैंक द्वारा जल्द ही आवेदन की सरल मानक प्रक्रिया, आवश्यक दस्तावेज (जैसे भू-अभिलेख खतौनी और पहचान पत्र) और वितरण कैलेंडर की घोषणा की जाएगी, ताकि रबी और आगामी कृषि सीजन में किसान इस योजना का व्यापक लाभ उठा सकें।
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