UP ECHS Polyclinic: यूपी के 13 जिलों में ईसीएचएस पॉलीक्लीनिक के लिए मिलेगी मुफ्त जमीन, योगी कैबिनेट का बड़ा फैसला
उत्तर प्रदेश कैबिनेट ने 13 जिलों में पूर्व सैनिक अंशदायी स्वास्थ्य योजना (ECHS) पॉलीक्लीनिक निर्माण के लिए सेना को निशुल्क जमीन देने के प्रस्ताव को औपचारिक मंजूरी दे दी है।
लखनऊ। देश की सीमाओं की रक्षा कर सेवानिवृत्त हुए पूर्व सैनिकों और उनके परिजनों को घर के नजदीक गुणवत्तापूर्ण एवं निःशुल्क चिकित्सा सेवाएं मुहैया कराने के लिए उत्तर प्रदेश सरकार ने बड़ा नीतिगत कदम उठाया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में मंगलवार को संपन्न हुई राज्य मंत्रिपरिषद की बैठक में पूर्व सैनिक अंशदायी स्वास्थ्य योजना (ईसीएचएस - ECHS) के अंतर्गत प्रदेश के 13 जनपदों में नए पॉलीक्लीनिक भवनों के निर्माण के लिए शासकीय एवं स्थानीय निकायों की भूमि पूरी तरह निःशुल्क हस्तांतरित करने के प्रस्ताव को स्वीकृति प्रदान कर दी गई।
स्वीकृत प्रस्ताव के तहत ग्राम पंचायतों, नगर निकायों और संबंधित स्थानीय विकास प्राधिकरणों की उपयुक्त भूमि को रक्षा मंत्रालय, भारत सरकार के अंतर्गत स्थानीय सैन्य प्राधिकरण (एलएमए) एवं मध्य कमान (सेंट्रल कमांड) के पक्ष में शून्य मूल्य पर स्थानांतरित व नामांतरित किया जाएगा। इस फैसले से उन 13 जिलों में लंबे समय से भूमि की अनुपलब्धता के कारण अटकी पड़ी ईसीएचएस पॉलीक्लीनिक परियोजनाओं के निर्माण का रास्ता पूरी तरह साफ हो गया है।
18 लाख पूर्व सैनिकों और परिवारों को सीधा स्वास्थ्य कवच
उत्तर प्रदेश देश में सबसे अधिक सैनिक और पूर्व सैनिक देने वाले अग्रणी राज्यों में शुमार है। आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, वर्तमान में प्रदेश के विभिन्न अंचलों में लगभग 18 लाख भूतपूर्व सैनिक, युद्ध विधवाएं (वीर नारी) और उनके आश्रित परिवारजन निवास करते हैं।
ईसीएचएस एक ऐसी स्वास्थ्य प्रणाली है जिसके तहत पंजीकृत पूर्व सैनिकों को ओपीडी परामर्श, आवश्यक दवाएं, नैदानिक परीक्षण (पैथोलॉजी व रेडियोलॉजी) और आपातकालीन परिस्थितियों में पैनलबद्ध सुपर-स्पेशियलिटी अस्पतालों में शत-प्रतिशत कैशलेस उपचार प्रदान किया जाता है। हालांकि, कई जिलों में स्थायी पॉलीक्लीनिक भवन न होने अथवा किराए के संकरे परिसरों में सीमित सेवाओं के कारण वयोवृद्ध पेंशनभोगियों को सामान्य जांच के लिए भी दूरदराज के मिलिट्री स्टेशनों या बेस अस्पतालों के चक्कर लगाने पड़ते थे। नए केंद्रों के निर्माण से यह समस्या जड़ से समाप्त होगी।
किन 13 जनपदों में आवंटित होगी जमीन?
रक्षा मंत्रालय के भूतपूर्व सैनिक कल्याण विभाग (DESW) ने उत्तर प्रदेश शासन को पत्र भेजकर पूर्व सैनिकों की सघन आबादी वाले 13 प्रमुख जनपदों में नए पॉलीक्लीनिक भवनों के लिए उपयुक्त भूमि उपलब्ध कराने का आग्रह किया था।
मंत्रिपरिषद द्वारा अनुमोदित सूची के अनुसार, जिन 13 जिलों में ग्राम पंचायत अथवा स्थानीय प्राधिकरण की जमीन हस्तांतरित की जा रही है, उनमें शामिल हैं:
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पश्चिमी उत्तर प्रदेश: मुजफ्फरनगर, बिजनौर और बुलंदशहर
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मध्य एवं रुहेलखंड/तराई क्षेत्र: लखीमपुर खीरी और इटावा
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बुंदेलखंड क्षेत्र: जालौन और बांदा
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पूर्वी उत्तर प्रदेश एवं पूर्वांचल: देवरिया, आजमगढ़, गाजीपुर, मिर्जापुर, सुल्तानपुर और गोंडा
इन सभी चिन्हित जिलों के जिलाधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे राजस्व अभिलेखों में दर्ज ऐसी ग्राम समाज या स्थानीय निकाय की भूमि को चिन्हित करें, जहां सड़क संपर्क, बिजली और पेयजल की सुगम व्यवस्था हो, ताकि बुजुर्ग पूर्व सैनिकों को वहां पहुंचने में कोई असुविधा न हो।
1 अप्रैल 2003 से संचालित है ईसीएचएस मॉडल
भूतपूर्व सैनिक अंशदायी स्वास्थ्य योजना की शुरुआत केंद्र सरकार द्वारा 1 अप्रैल 2003 को की गई थी। इस योजना की बुनियादी संरचना यह है कि पूर्व सैनिकों को प्राथमिक स्तर पर ईसीएचएस पॉलीक्लीनिकों में सैन्य डॉक्टरों द्वारा प्राथमिक उपचार और दवाएं दी जाती हैं। यदि किसी मरीज को गंभीर बीमारी, सर्जरी या गहन चिकित्सा की आवश्यकता होती है, तो पॉलीक्लीनिक के माध्यम से उसे निकटवर्ती सेना के कमांड/बेस अस्पताल अथवा सरकार द्वारा सूचीबद्ध निजी कॉर्पोरेट अस्पतालों में रेफर किया जाता है।
रेफरल के उपरांत मरीज को अस्पताल में भर्ती होने से लेकर डिस्चार्ज होने तक कोई भुगतान नहीं करना पड़ता; सारा वित्तीय भार ईसीएचएस ट्रस्ट वहन करता है। उत्तर प्रदेश में स्थायी भवनों के निर्माण से इन 13 जिलों में आधुनिक जांच लैब, ईसीजी सुविधाएं और नियमित फार्मेसी काउंटर स्थापित किए जा सकेंगे।
जमीन मिलने के बाद रक्षा मंत्रालय शुरू करेगा निर्माण
राज्य सरकार द्वारा भूमि हस्तांतरण की संस्तुति मिलने के बाद अब स्थानीय सैन्य प्राधिकरण (LMA) जमीन का भौतिक कब्जा प्राप्त करेगा। इसके बाद रक्षा संपदा विभाग (Defence Estates) के माध्यम से भूमि का म्यूटेशन मिलिट्री रिकॉर्ड्स में दर्ज होगा।
मध्य कमान के सैन्य इंजीनियरिंग सेवा (एमईएस) द्वारा इन 13 केंद्रों के लिए मानक डिजाइन के अनुसार आधुनिक पॉलीक्लीनिक परिसरों का निर्माण कराया जाएगा। इनमें वरिष्ठ नागरिकों और दिव्यांग पूर्व सैनिकों के लिए व्हीलचेयर रैंप, सुव्यवस्थित प्रतीक्षालय, दवा भंडारण के लिए वातानुकूलित कमरे और डॉक्टर परामर्श कक्ष बनाए जाएंगे।
योगी कैबिनेट के इस फैसले से यह स्पष्ट हुआ है कि राज्य सरकार सीमाओं पर तैनात जवानों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करते हुए उनके सेवानिवृत्त जीवन को सुरक्षित, स्वस्थ और सम्मानजनक बनाने के लिए प्रतिबद्धता से कार्य कर रही है।
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