कारगिल युद्ध में अदम्य साहस दिखाने वाले कर्नल ओम प्रकाश मिश्रा लेह में सम्मानित, हरदोई का बढ़ाया मान
कारगिल युद्ध में शौर्य का प्रदर्शन करने वाले सेवानिवृत्त कर्नल ओम प्रकाश मिश्रा को लद्दाख के उपराज्यपाल ने लेह में आयोजित विशेष समारोह में सम्मानित किया।
कारगिल युद्ध के दौरान टाइगर हिल पर अपने अदम्य साहस और सटीक तोपखाने की गोलाबारी से दुश्मन सेना को पीछे हटने पर मजबूर करने वाले जांबाज सेवानिवृत्त कर्नल ओम प्रकाश मिश्रा को लद्दाख की राजधानी लेह में सम्मानित किया गया।
हरदोई में जिला सैनिक कल्याण अधिकारी के रूप में अपनी सेवाएं दे चुके भारतीय सेना के इस वीर अधिकारी को लद्दाख के उपराज्यपाल द्वारा आयोजित एक गरिमामय समारोह में यह सम्मान प्रदान किया गया।
ऑपरेशन विजय के दौरान अपनी असाधारण वीरता के लिए वीरता पुरस्कार से नवाजे जा चुके कर्नल मिश्रा के इस सम्मान से पूरे क्षेत्र में गर्व और हर्ष का माहौल है। आर्मी हेडक्वार्टर नई दिल्ली के तोपखाना निदेशालय की ओर से कारगिल युद्ध में तोपखाने के अहम योगदान को स्मरण करने के उद्देश्य से एक विशेष मोटरसाइकिल रैली निकाली गई थी।
इस रैली के लेह पहुंचने पर समापन के अवसर पर आयोजित समारोह में उन सभी शूरवीरों को आमंत्रित किया गया था जिन्होंने युद्ध के मैदान में अपने असाधारण पराक्रम से देश का मस्तक ऊंचा किया था। इस कार्यक्रम में कर्नल ओम प्रकाश मिश्रा को विशेष रूप से आमंत्रित कर उनके अप्रतिम योगदान को सराहा गया।
भारतीय तोपखाना रेजिमेंट से सेवानिवृत्त कर्नल मिश्रा ने वर्ष 1999 के कारगिल युद्ध में अपनी यूनिट के ऑब्जर्वेशन पोस्ट अफसर के रूप में जिम्मेदारी निभाई थी। बेहद विपरीत और दुर्गम परिस्थितियों में टाइगर हिल की चोटी पर उन्होंने अपनी सूझबूझ और सटीक तोपखाने की दिशा तय कर पाकिस्तानी घुसपैठियों के बंकरों को ध्वस्त किया था, जिससे दुश्मन सेना के पैर उखड़ गए थे। युद्ध के मैदान में उनकी इस असाधारण बहादुरी और राष्ट्र के प्रति उनके सर्वोच्च समर्पण को याद करते हुए उन्हें यह सम्मान दिया गया।
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