Ayodhya NSG Hub: अयोध्या में बनेगा राष्ट्रीय सुरक्षा गार्ड का क्षेत्रीय केंद्र, योगी कैबिनेट ने 65 एकड़ जमीन निशुल्क देने को दी मंजूरी
अयोध्या में एनएसजी (NSG) का क्षेत्रीय हब बनेगा। योगी कैबिनेट ने मिल्कीपुर के पूरे लालखां में 16.90 करोड़ रुपये मूल्य की 26 हेक्टेयर बंजर जमीन गृह मंत्रालय को निशुल्क देने की मंजूरी दी।
लखनऊ/अयोध्या। मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम की पावन नगरी अयोध्या धाम और नवनिर्मित भव्य श्रीराम जन्मभूमि मंदिर परिसर की सुरक्षा व्यवस्था को अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप अभेद्य बनाने की दिशा में केंद्र और राज्य सरकार ने निर्णायक कदम उठाया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में मंगलवार को संपन्न हुई राज्य मंत्रिपरिषद की बैठक में अयोध्या जनपद में राष्ट्रीय सुरक्षा गार्ड (एनएसजी) का एक पूर्ण क्षेत्रीय केंद्र (रीजनल हब) स्थापित करने के प्रस्ताव को औपचारिक स्वीकृति दे दी गई।
इस रणनीतिक फैसले के तहत मंत्रिपरिषद ने अयोध्या की मिल्कीपुर तहसील स्थित ग्राम 'पूरे लालखां' में स्थित 26 हेक्टेयर (लगभग 65 एकड़) बंजर भूमि भारत सरकार के गृह मंत्रालय (एमएचए) के पक्ष में पूरी तरह निःशुल्क हस्तांतरित और नामांतरित किए जाने को मंजूरी दी है। राजस्व मूल्यांकन के अनुसार, हस्तांतरित की जाने वाली इस सरकारी भूमि का मौजूदा बाजार मूल्य लगभग 16.90 करोड़ रुपये आंका गया है। इस क्षेत्रीय केंद्र के अस्तित्व में आने के बाद किसी भी प्रकार की आकस्मिक सुरक्षा चुनौती, आतंकी खतरे या आपात स्थिति से निपटने के लिए अयोध्या में अत्याधुनिक ब्लैक कैट कमांडो की त्वरित प्रतिक्रिया टीम (क्विक रिस्पॉन्स टीम) चौबीसों घंटे तैनात रहेगी।
प्राण-प्रतिष्ठा के बाद बढ़ा सामरिक महत्व: स्थायी तैनाती अनिवार्य
कैबिनेट बैठक के उपरांत राज्य सरकार के वित्त एवं संसदीय कार्य मंत्री सुरेश कुमार खन्ना ने इस फैसले के सामरिक और विधिक पहलुओं की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि जनवरी 2024 में श्रीराम मंदिर में विग्रह की प्राण-प्रतिष्ठा के उपरांत अयोध्या केवल एक प्रमुख धार्मिक एवं सांस्कृतिक नगरी ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर का एक अत्यंत संवेदनशील सामरिक केंद्र बन चुका है।
वर्तमान समय में अयोध्या में सामान्य दिनों में भी लाखों श्रद्धालु पहुंचते हैं, जबकि विशिष्ट पर्वों, उत्सवों और महत्वपूर्ण राष्ट्रीय आयोजनों पर देश-विदेश से राष्ट्राध्यक्ष, विदेशी राजनयिक, केंद्रीय मंत्री, उद्योगपति और विशिष्ट अतिथि (वीवीआईपी) लगातार आ रहे हैं। इस विशाल जनसमूह और वैश्विक प्रतिष्ठा के चलते अयोध्या विभिन्न आतंकी और विध्वंसक तत्वों के रडार पर भी मानी जाती रही है। ऐसे में क्षेत्र की संवेदनशीलता को ध्यान में रखते हुए यहां अर्धसैनिक बलों और स्थानीय पुलिस के अतिरिक्त विशेष आतंकवाद-रोधी बल 'एनएसजी' की स्थायी रणनीतिक मौजूदगी राष्ट्रीय सुरक्षा की दृष्टि से अनिवार्य मानी जा रही थी।
कड़े नियमों में अपवादस्वरूप शिथिलता, 3 साल में उपयोग की बाध्यता
राज्य सरकार के सामान्य राजस्व नियमों के अनुसार बहुमूल्य सरकारी या बंजर भूमि का हस्तांतरण बिना किसी शुल्क या प्रीमियम के नहीं किया जाता। हालांकि, इस मामले में राष्ट्रीय सुरक्षा के सर्वोच्च महत्व और अयोध्या की विशिष्ट सुरक्षा जरूरतों को देखते हुए राज्य सरकार ने राजस्व विभाग के प्रचलित शासनादेशों में अपवादस्वरूप विशेष शिथिलता (रिलैक्सेशन) प्रदान करते हुए 16.90 करोड़ रुपये की जमीन को शून्य लागत पर केंद्र सरकार को सौंपा है।
मंत्रिपरिषद द्वारा स्वीकृत प्रस्ताव में भूमि के उपयोग को लेकर अत्यंत सख्त और स्पष्ट शर्तें निर्धारित की गई हैं:
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उद्देश्य की विशिष्टता: हस्तांतरित 26 हेक्टेयर भूमि का उपयोग विशेष रूप से और केवल राष्ट्रीय सुरक्षा गार्ड के क्षेत्रीय केंद्र, प्रशासनिक कार्यालयों, प्रशिक्षण परिसरों और कमांडो बैरकों की स्थापना के लिए ही किया जाएगा।
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अन्य गतिविधियों पर पूर्ण प्रतिबंध: इस भूमि का कोई भी हिस्सा किसी अन्य उद्देश्य, व्यावसायिक गतिविधि या तीसरे पक्ष को हस्तांतरित नहीं किया जा सकेगा।
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समय-सीमा का कड़ा नियम: गृह मंत्रालय को इस आवंटित भूमि पर अगले तीन वर्षों की निर्धारित अवधि के भीतर परियोजना का निर्माण कार्य शुरू कर उसका उपयोग सुनिश्चित करना होगा।
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स्वतः वापसी की शर्त: यदि अगले तीन वर्षों में भूमि का उपयोग प्रस्तावित उद्देश्य के लिए नहीं किया जाता है, या भविष्य में एनएसजी को इस भूमि की आवश्यकता समाप्त हो जाती है, तो यह संपूर्ण 26 हेक्टेयर भूमि बिना किसी विवाद या मुकदमेबाजी के स्वतः (ऑटोमेटिकली) उत्तर प्रदेश राजस्व विभाग के स्वामित्व में वापस आ जाएगी।
आपात स्थिति में शून्य प्रतिक्रिया समय (Zero Response Time)
अब तक उत्तर प्रदेश या मध्य भारत के किसी हिस्से में आतंकी घटना या गंभीर बंधक संकट की स्थिति में एनएसजी कमांडो को दिल्ली के पास मानेसर (हरियाणा) स्थित मुख्य गैरीसन से हवाई मार्ग द्वारा जुटाना पड़ता था। वायुसेना के विमानों से कमांडो को लाने और फिर घटनास्थल तक पहुंचाने में कई महत्वपूर्ण घंटों का समय लग जाता था।
अयोध्या के मिल्कीपुर में क्षेत्रीय केंद्र बनने से यह दूरी और समय पूरी तरह समाप्त हो जाएगा। अयोध्या में तैयार होने वाले इस हब में:
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अत्याधुनिक हथियारों, नाइट-विजन उपकरणों और स्नाइपर राइफलों से लैस एनएसजी के 51 व 52 स्पेशल एक्शन ग्रुप (एसएजी) के कमांडो तैनात रहेंगे।
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हवाई और त्वरित जमीनी मूवमेंट के लिए समर्पित बुनियादी ढांचा तैयार किया जाएगा।
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किसी भी आपातकालीन खुफिया इनपुट पर कमांडो दल मात्र कुछ ही मिनटों के भीतर श्रीराम मंदिर परिसर, अयोध्या एयरपोर्ट, रेलवे स्टेशन या शहर के किसी भी रणनीतिक कोने में सीधे ऑपरेशन शुरू करने में सक्षम होगा।
पूरे उत्तर प्रदेश और सीमावर्ती राज्यों को मिलेगा सुरक्षा कवच
मिल्कीपुर में स्थापित होने वाला यह केंद्र केवल अयोध्या जिले तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि यह समूचे मध्य और पूर्वी उत्तर प्रदेश सहित नेपाल की अंतरराष्ट्रीय सीमा से सटे संवेदनशील क्षेत्रों के लिए भी एक मजबूत सुरक्षा दीवार का कार्य करेगा।
लखनऊ, गोरखपुर, प्रयागराज, वाराणसी और कानपुर जैसे बड़े प्रशासनिक व औद्योगिक केंद्रों से अयोध्या की सड़क और हवाई कनेक्टिविटी बेहतरीन है। ऐसे में पूर्वांचल और बुंदेलखंड के किसी भी संवेदनशील प्रतिष्ठान, तेल रिफाइनरी, रेलवे पुल या धार्मिक स्थल पर सुरक्षा संकट उत्पन्न होने की स्थिति में अयोध्या बेस से एनएसजी के ब्लैक कैट कमांडो को तत्काल हेलीकॉप्टर या सड़क मार्ग से एयरड्रॉप किया जा सकेगा।
कैबिनेट से प्रस्ताव पारित होने के साथ ही अयोध्या जिला प्रशासन को निर्देश दिए गए हैं कि वे गृह मंत्रालय के अधिकारियों के साथ मिलकर मिल्कीपुर के पूरे लालखां गांव में भूमि की पैमाइश और औपचारिक कब्जा हस्तांतरण की प्रक्रिया को शीघ्र पूरा करें, ताकि केंद्र सरकार इसका मास्टर प्लान तैयार कर निर्माण कार्य को आगे बढ़ा सके।
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