Ghaziabad Girdhari Alive News: तेरहवीं के 39 दिन बाद जिंदा लौटा गाजियाबाद का गिरधारी, पुलिस हैरान

Ghaziabad News: गाजियाबाद के गिरधर सिंह बिष्ट की तेरहवीं के 39 दिन बाद उनके जिंदा लौटने से हड़कंप मच गया है। जानिए क्या है पूरा मामला और अब पुलिस किसकी तलाश कर रही है।

Jun 26, 2026 - 10:48
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Ghaziabad Girdhari Alive News: तेरहवीं के 39 दिन बाद जिंदा लौटा गाजियाबाद का गिरधारी, पुलिस हैरान
गिरधर सिंह बिष्ट, अंतिम संस्कार के बाद जिंदा लौटा
  • Ghaziabad Mystery: जिस बेटे का कर दिया अंतिम संस्कार वह 39 दिन बाद लौटा जिंदा, हत्या केस में नया मोड़
  • गाजियाबाद का 'चमत्कार': तेरहवीं भी हो गई और 39 दिन बाद अचानक घर लौट आया 'मृत' बेटा!
  • गाजियाबाद में बड़ा उलटफेर: मृत घोषित गिरधारी सिंह बिष्ट 39 दिन बाद जिंदा लौटा, पुलिस जांच में जुटी

उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद जिले से एक ऐसा हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है, जिसने कानून व्यवस्था और परिवार दोनों को असमंजस में डाल दिया है। गाजियाबाद के खोड़ा क्षेत्र के रहने वाले गिरधर सिंह बिष्ट, जिन्हें उनके परिवार ने मृत मानकर उनका अंतिम संस्कार कर दिया था और जिनकी तेरहवीं की रस्में भी पूरी हो चुकी थीं, वह करीब 39 दिनों के बाद अचानक सकुशल अपने घर लौट आए हैं। इस नाटकीय घटनाक्रम के बाद जहां एक तरफ परिवार में खुशी और आश्चर्य का माहौल है, वहीं दूसरी तरफ स्थानीय पुलिस प्रशासन के सामने एक बेहद पेचीदा कानूनी और खोजी सवाल खड़ा हो गया है। गिरधर की गुमशुदगी के बाद पुलिस ने एक शव बरामद कर हत्या का मुकदमा दर्ज किया था, जिसे परिवार ने गिरधर समझकर अपना लिया था। अब गिरधर के जिंदा वापस आने के बाद पुलिस इस पूरे हत्याकांड की नए सिरे से तफ्तीश कर रही है कि आखिर वह शव किसका था जिसका अंतिम संस्कार किया गया।

यह पूरा मामला गाजियाबाद के खोड़ा थाना क्षेत्र का है, जहां गिरधर सिंह बिष्ट नाम के एक व्यक्ति अचानक लापता हो गए थे। काफी खोजबीन के बाद जब उनका कोई सुराग नहीं मिला, तो इसी बीच पुलिस को एक अज्ञात शव बरामद हुआ। शव की स्थिति को देखते हुए और कुछ शारीरिक समानताओं के आधार पर परिजनों ने उसे गिरधर सिंह बिष्ट का शव मान लिया। इसके बाद पुलिस ने नियमानुसार पंचनामा भरकर शव को परिजनों को सौंप दिया। परिवार ने समाज और रीति-रिवाजों के अनुसार शव का अंतिम संस्कार किया और शोक संतप्त परिवार ने उनकी आत्मा की शांति के लिए तेरहवीं के संस्कार भी संपन्न कर दिए। इसी बीच पुलिस ने इस मामले को भादंवि (IPC) या नए कानून के तहत हत्या की धाराओं में दर्ज कर जांच शुरू कर दी थी। लेकिन कहानी में मोड़ तब आया जब अंतिम संस्कार के 39 दिन बीत जाने के बाद गिरधारी अचानक अपने घर के दरवाजे पर खड़ा मिला।

सिलसिलेवार ढंग से देखा जाए तो यह घटना किसी फिल्मी स्क्रिप्ट से कम नजर नहीं आती। करीब डेढ़ महीने पहले गिरधर सिंह बिष्ट अचानक अपने घर से बिना बताए कहीं चले गए थे। काफी समय तक वापस न आने पर परिजनों ने स्थानीय पुलिस में उनकी गुमशुदगी की शिकायत दर्ज कराई थी। कुछ दिनों बाद पुलिस को एक अज्ञात व्यक्ति का शव मिला, जिसकी शिनाख्त के लिए गिरधर के परिवार को बुलाया गया। शव की हालत बहुत अच्छी नहीं थी, लेकिन कपड़ों और हुलिए के आधार पर दुखी परिवार ने उसे गिरधर समझ लिया।

शव मिलने के बाद पुलिस ने अज्ञात आरोपियों के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज किया और तफ्तीश में जुट गई। इधर घर पर रोते-बिलखते परिवार ने शव का दाह संस्कार किया और समाज को भोज देकर तेरहवीं की रस्म भी निभा दी। सभी यह मान चुके थे कि गिरधर अब इस दुनिया में नहीं हैं। लेकिन 39वें दिन अचानक जब गिरधर सिंह बिष्ट वापस लौटे, तो उन्हें देखकर एक बार के लिए परिवार के लोग डर गए। जब स्थिति साफ हुई कि सामने खड़ा व्यक्ति कोई परछाई नहीं बल्कि खुद गिरधर हैं, तो घर में कोहराम मच गया। इसके तुरंत बाद इस बात की सूचना स्थानीय पुलिस को दी गई।

गिरधर सिंह बिष्ट के अचानक वापस लौटने पर उनके परिवार के सदस्यों का कहना है कि शव की स्थिति ऐसी थी कि वे भ्रमित हो गए और उन्होंने उसे अपना बेटा समझ लिया। परिवार अब इस बात से राहत में है कि उनका बेटा सुरक्षित है, लेकिन वे इस बात को लेकर भी चिंतित हैं कि उन्होंने किसी अनजाने व्यक्ति का अंतिम संस्कार कर दिया।

वहीं दूसरी ओर, गाजियाबाद पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों का कहना है कि यह मामला अब बेहद संवेदनशील और पेचीदा हो गया है। पुलिस क्षेत्राधिकारी (CO) और जांच अधिकारी के मुताबिक, गिरधर के बयान दर्ज किए जा रहे हैं ताकि यह पता लगाया जा सके कि वह इतने दिनों तक कहां थे और घर छोड़कर क्यों गए थे। पुलिस ने यह भी स्पष्ट किया है कि हत्या का जो मुकदमा दर्ज किया गया था, उसे बंद नहीं किया जाएगा, बल्कि अब जांच की दिशा पूरी तरह बदल जाएगी।

इस घटना ने पुलिस की शिनाख्त प्रक्रिया और फोरेंसिक जांच पर भी सवालिया निशान खड़े कर दिए हैं। हालांकि, अक्सर ऐसे मामलों में परिजनों की गवाही और शिनाख्त को ही प्राथमिक आधार माना जाता है, लेकिन बिना पुख्ता डीएनए (DNA) टेस्ट या पुख्ता वैज्ञानिक साक्ष्यों के शव को सौंप देना अब पुलिस के लिए सिरदर्द बन गया है। इस घटना का सबसे बड़ा सामाजिक और कानूनी प्रभाव यह है कि जिस अज्ञात व्यक्ति की हत्या हुई थी, उसके असली कातिल तो दूर की बात है, अभी तक उस मृतक की पहचान भी गायब हो चुकी है। कानूनी रूप से अब पुलिस को पहले यह साबित करना होगा कि वह शव किसका था ताकि उसके वास्तविक परिजनों तक सूचना पहुंचाई जा सके।

गाजियाबाद पुलिस के सामने अब दो सबसे बड़ी चुनौतियां हैं। पहली चुनौती यह पता लगाना है कि जिस शव का अंतिम संस्कार गिरधर सिंह बिष्ट समझकर किया गया, वह वास्तविक रूप से किसका था? इसके लिए पुलिस आसपास के जिलों और राज्यों के थानों से लापता लोगों की सूची (Missing Complaints) खंगाल रही है। दूसरी चुनौती उस अज्ञात व्यक्ति की हत्या के कारणों और उसके आरोपियों का पता लगाना है। पुलिस गिरधर सिंह बिष्ट का कोर्ट में बयान दर्ज कराने की प्रक्रिया पूरी कर रही है और साथ ही उस शव के समय सुरक्षित रखे गए डीएनए सैंपल (यदि उपलब्ध हों) या पोस्टमार्टम रिपोर्ट के आधार पर मृतक की पहचान स्थापित करने की कोशिश में जुट गई है।

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