‘ऐसे नहीं चलेगा लोकतंत्र...’: CJP प्रमुख अभिजीत दीपके ने चुनाव आयोग और संवैधानिक संस्थाओं पर दागे तीखे सवाल
कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दीपके ने चुनाव आयोग और न्यायपालिका की साख पर गंभीर सवाल खड़े करते हुए 'क्या बोलती पब्लिक' अभियान की शुरुआत की।
- Election Commission Row: CJP प्रमुख अभिजीत दीपके ने निर्वाचन आयोग पर उठाए सवाल, बोले- ऐसे नहीं चलेगा लोकतंत्र
- Abhijeet Dipke Target Election Commission: कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके का बड़ा हमला, निष्पक्षता पर उठाई आवाज
- Election Commission News: सीजेपी प्रमुख अभिजीत दीपके का बड़ा बयान, निर्वाचन आयोग और संस्थाओं की जवाबदेही पर उठाया सवाल
कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक और राष्ट्रीय संयोजक अभिजीत दीपके ने देश की लोकतांत्रिक संस्थाओं की निष्पक्षता और साख पर गंभीर सवाल उठाए हैं। छत्रपति संभाजीनगर में दो दिवसीय राष्ट्रीय कार्यकारिणी बैठक के बाद पत्रकारों को संबोधित करते हुए दीपके ने निर्वाचन आयोग (ECI), न्यायपालिका और मीडिया की निष्पक्षता पर सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में संस्थाओं का तटस्थ रहना आवश्यक है, लेकिन वर्तमान में जनता का इन पर से भरोसा कम हो रहा है। संस्थागत जवाबदेही तय करने के उद्देश्य से सीजेपी ने 'क्या बोलती पब्लिक' अभियान शुरू करने की घोषणा की है। संगठन का कहना है कि वे चुनावी राजनीति में उतरने के बजाय जनमुद्दों पर एक जन दबाव समूह की तरह काम जारी रखेंगे।
देश के युवाओं के बीच सोशल मीडिया और सड़क स्तर पर प्रभाव बना रहे संगठन 'कॉकरोच जनता पार्टी' (सीजेपी) के प्रमुख अभिजीत दीपके ने भारत के निर्वाचन आयोग और अन्य संवैधानिक निकायों की भूमिका पर कड़े सवाल दागे हैं। महाराष्ट्र के छत्रपति संभाजीनगर में आयोजित दो दिवसीय कोर कमेटी बैठक के समापन के अवसर पर अभिजीत दीपके ने कहा कि लोकतंत्र में स्वायत्त संस्थाओं की तटस्थता सबसे महत्वपूर्ण स्तंभ होती है। यदि चुनाव आयोग या न्यायपालिका जैसी संस्थाओं के प्रति आम जनता और विशेष रूप से युवाओं का विश्वास डगमगाता है, तो यह देश के लोकतांत्रिक ढांचे के लिए चिंताजनक संकेत है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि संस्थाओं की जवाबदेही तय किए बिना लोकतंत्र सुचारू रूप से नहीं चल सकता।
यह पूरा घटनाक्रम छत्रपति संभाजीनगर में सीजेपी की दो दिवसीय राष्ट्रीय कोर कमेटी बैठक के बाद सामने आया। बैठक में संगठन के संगठनात्मक विस्तार, भावी रणनीतियों और देश भर में युवाओं से जुड़े ज्वलंत मुद्दों पर चर्चा की गई। बैठक की समाप्ति पर आयोजित प्रेस वार्ता में अभिजीत दीपके, मुख्य प्रवक्ता सौरव दास और प्रवक्ता आशुतोष रांका ने संगठन के नए पदाधिकारियों और रोडमैप की घोषणा की। इसी दौरान पत्रकारों से बात करते हुए दीपके ने देश के मौजूदा सामाजिक और राजनीतिक परिदृश्य पर अपनी राय रखी।
अभिजीत दीपके ने कहा कि चाहे राजनीति हो, न्यायपालिका हो, मीडिया हो या निर्वाचन आयोग, इन सभी प्रमुख संस्थाओं की विश्वसनीयता में गिरावट आई है। उन्होंने कहा कि इन संस्थाओं को अधिक निष्पक्ष, पारदर्शी और जनता के प्रति जवाबदेह बनाने की तत्काल आवश्यकता है। इसके लिए एक व्यापक जन-आंदोलन की जरूरत है, ताकि आम नागरिकों की आवाज शासन और प्रशासन के शीर्ष स्तर तक पहुंच सके। संस्थागत पारदर्शिता और जवाबदेही को बढ़ावा देने के लिए सीजेपी ने 'क्या बोलती पब्लिक' नाम से एक नया राष्ट्रव्यापी अभियान शुरू करने की योजना बनाई है।
इसके साथ ही, सीजेपी के राष्ट्रीय प्रवक्ताओं ने साफ किया कि उनका संगठन फिलहाल खुद को राजनीतिक दल में तब्दील नहीं करेगा। उनका मानना है कि एक और राजनीतिक पार्टी बनाने के बजाय जमीनी स्तर पर जन-जागरूकता फैलाना और एक मजबूत दबाव समूह के रूप में काम करना युवाओं और समाज के व्यापक हित में होगा। संगठन ने अगले छह महीनों में देश भर में राज्य समन्वय समितियों और विभिन्न स्तरों पर इकाइयां गठित करने की समयसीमा तय की है।
सीजेपी प्रमुख के इस बयान और चुनाव आयोग पर उठाए गए सवालों के बाद राजनीतिक हलकों और नागरिक समाज में अलग-अलग प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। युवा संगठनों और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे छात्रों ने सीजेपी की मांगों का समर्थन किया है। छात्रों का कहना है कि सरकारी पारदर्शी व्यवस्था और परीक्षाओं की शुचिता बनाए रखने के लिए चुनाव आयोग व प्रशासनिक तंत्र की तटस्थता बेहद जरूरी है।
दूसरी ओर, सत्तारूढ़ दलों के प्रतिनिधियों ने इन आरोपों को निराधार बताया है। उनका तर्क है कि भारत का निर्वाचन आयोग एक स्वतंत्र और संवैधानिक रूप से स्वायत्त संस्था है, जिसकी कार्यप्रणाली पर सवाल उठाना पूरी तरह अनुचित है। वहीं विपक्षी खेमे के कुछ प्रतिनिधियों ने कहा कि लोकतांत्रिक संस्थाओं की स्वायत्तता और जन-भरोसा बनाए रखना किसी भी सरकार की पहली जिम्मेदारी होनी चाहिए। इसके अलावा, सूरत के एक आरटीआई कार्यकर्ता अमित तिवारी ने सीजेपी के वैधानिक स्वरूप और फंडिंग को लेकर चुनाव आयोग तथा अन्य अधिकारियों से जांच की मांग की है।
अभिजीत दीपके और सीजेपी द्वारा चुनाव आयोग व अन्य संवैधानिक निकायों की विश्वसनीयता पर उठाए गए सवालों ने देश में संस्थागत सुधारों पर नए सिरे से बहस छिड़ दी है। हाल ही में नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए छात्र प्रदर्शनों और शिक्षा मंत्रालय में हुए प्रशासनिक बदलावों के बाद सीजेपी की गतिविधियों पर युवाओं की गहरी नजर है। संगठन द्वारा घोषित 'क्या बोलती पब्लिक' अभियान के माध्यम से सोशल मीडिया और जमीनी स्तर पर युवाओं को जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है। इससे मुख्यधारा के राजनीतिक दलों पर भी युवाओं के रोजगार, पारदर्शी शासन और चुनावी प्रक्रियाओं में स्वच्छता लाने का नैतिक दबाव बढ़ेगा।
सीजेपी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी ने अपने संगठनात्मक विस्तार का पहला चरण शुरू कर दिया है। आने वाले दिनों में संगठन के शीर्ष पदाधिकारी विभिन्न राज्यों का दौरा करेंगे। विशेष रूप से झारखंड में परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के विरोध में जारी छात्र आंदोलनों को समर्थन देने के लिए सीजेपी का एक प्रतिनिधिमंडल वहां का दौरा करेगा। संगठन की योजना अगले छह महीनों में देश भर में राज्य और लोकसभा स्तर पर समन्वय समितियां बनाकर अपनी पहुंच का दायरा बढ़ाना है। आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि संस्थागत जवाबदेही को लेकर शुरू किया गया यह अभियान भारतीय राजनीति और प्रशासनिक व्यवस्था पर क्या असर डालता है।
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