गोरखपुर में 'मातृ सेवा' मॉडल बना वरदान, हाई रिस्क गर्भवती महिलाओं को मिल रहा नया जीवन
गोरखपुर का मातृ सेवा मॉडल साबित हुआ जीवनरक्षक। जानिए कैसे व्हाट्सएप नेटवर्क और त्वरित रेफरल से बच रही हैं हाई रिस्क गर्भवती महिलाओं की जानें।
मातृ मृत्यु दर को कम करने के उद्देश्य से गोरखपुर जिले में शुरू किया गया 'मातृ सेवा' प्रयोग प्रदेशभर के लिए एक बेहतरीन नजीर साबित हो रहा है। मुख्यमंत्री के निर्देशों के तहत संचालित इस पायलट प्रोजेक्ट के माध्यम से उच्च जोखिम वाली गर्भवती महिलाओं की समय रहते पहचान कर उन्हें तुरंत बड़े चिकित्सा संस्थानों में रेफर किया जा रहा है। पिछले दो महीनों के दौरान इस पहल से प्रसव के बाद अत्यधिक रक्तस्राव से पीड़ित 15 अतिगंभीर महिलाओं सहित दर्जनों मरीजों को नया जीवन मिला है। अब आसपास के पड़ोसी जिलों से भी गंभीर स्थिति वाली गर्भवती महिलाओं को बेहतर इलाज के लिए गोरखपुर में भर्ती कराया जा रहा है।
राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन और स्वास्थ्य विभाग के इस संयुक्त प्रयास में त्वरित सूचना के आदान-प्रदान के लिए एक समर्पित व्हाट्सएप नेटवर्क तैयार किया गया है। इसमें एम्स, बीआरडी मेडिकल कॉलेज, जिला महिला अस्पताल, सामुदायिक व प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों के वरिष्ठ डॉक्टरों के साथ-साथ आशा, एएनएम, नर्स और एम्बुलेंस समन्वयकों को भी जोड़ा गया है। जैसे ही ग्रामीण क्षेत्रों के अस्पतालों में कोई गंभीर मामला सामने आता है, स्वास्थ्य टीम तुरंत मरीज की पहचान कर रेफरल प्रक्रिया शुरू कर देती है। व्हाट्सएप नेटवर्क पर मामला साझा होते ही एम्बुलेंस और उच्च चिकित्सा केंद्र की इमरजेंसी टीम अलर्ट हो जाती है, जिससे अस्पताल पहुंचते ही मरीज का बिना समय गंवाए उपचार शुरू हो जाता है।
स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के मुताबिक, इस नेटवर्क के सक्रिय रहने से पिछले दो महीनों में 363 उच्च जोखिम वाली गर्भवती महिलाओं का उपचार किया गया है। इसमें प्रसवोत्तर रक्तस्राव के 55 मामले शामिल थे, जिनमें से 15 मरीज बेहद नाजुक स्थिति में थे। इसके अलावा गंभीर खून की कमी से जूझ रहीं 43 महिलाओं और गर्भावस्था के दौरान दौरों की समस्या से पीड़ित 19 मरीजों का भी सफलता पूर्वक इलाज किया गया। हाल ही में देवरिया जिले से अतिगंभीर अवस्था में रेफर की गई एक महिला को भी समय पर बीआरडी मेडिकल कॉलेज पहुंचाकर बेहतर इलाज उपलब्ध कराया गया, जिससे उसकी जान बच सकी। इस दो महीने के सफल परीक्षण की रिपोर्ट शासन को भेजी जाएगी, जिसके बाद इस मॉडल को अन्य जिलों में लागू करने पर विचार किया जा सकता है।
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