प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना में उत्तर प्रदेश ने हासिल की बड़ी उपलब्धि, लक्ष्य से अधिक महिलाओं का हुआ पंजीकरण
उत्तर प्रदेश में प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना के तहत लक्ष्य से अधिक पंजीकरण दर्ज। 4.06 लाख से अधिक गर्भवती व धात्री महिलाओं को मिला योजना का लाभ।
उत्तर प्रदेश ने प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना के सुचारु और प्रभावी क्रियान्वयन में एक नया रिकॉर्ड स्थापित किया है। राज्य ने तय समय-सीमा के भीतर निर्धारित लक्ष्य का 102 प्रतिशत से अधिक हासिल करके देश के अग्रणी राज्यों में अपनी स्थिति और मजबूत कर ली है। महिला एवं बाल विकास विभाग के आंकड़ों के अनुसार, तीन लाख सत्तानवे हजार से अधिक महिलाओं के पंजीकरण के लक्ष्य के मुकाबले अब तक चार लाख छह हजार से अधिक गर्भवती और धात्री महिलाओं का सफलता पूर्वक पंजीकरण कराया जा चुका है।
इस योजना की सफलता के पीछे जमीनी स्तर पर तैनात आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं, आशा बहुओं और विभागीय अधिकारियों का बेहतर समन्वय रहा है। राज्य सरकार ने योजना को प्रशासनिक औपचारिकता तक सीमित रखने के बजाय एक विशेष अभियान का रूप दिया। इसके लिए गांव-गांव और शहरी वार्डों तक विशेष पहुंच बनाकर पात्र महिलाओं की पहचान की गई। नियमित ऑनलाइन मॉनिटरिंग और जिला स्तर पर लगातार समीक्षा बैठकों के जरिए पंजीकरण प्रक्रिया को तेजी से आगे बढ़ाया गया, जिससे हर जिले में लक्ष्य से अधिक प्रगति दर्ज की गई।
गर्भवती और धात्री महिलाओं के स्वास्थ्य तथा पोषण की जरूरतों को पूरा करने के लिए वित्तीय सहायता भी सीधे उनके बैंक खातों में भेजी जा रही है। चालू वित्तीय वर्ष में अब तक दो लाख इक्यावन हजार से अधिक किस्तों के माध्यम से छियासी करोड़ पचपन लाख रुपये से अधिक की राशि डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर यानी डीबीटी के जरिए सीधे हस्तांतरित की जा चुकी है। योजना के प्रावधानों के अनुसार पहली संतान के जन्म पर दो चरणों में पांच हजार रुपये तथा दूसरी संतान बालिका होने की स्थिति में छह हजार रुपये की आर्थिक सहायता दी जाती है, जिससे महिलाओं को गर्भावस्था के दौरान जरूरी पोषण प्राप्त करने में मदद मिलती है।
पूरी प्रक्रिया को पूरी तरह से डिजिटल, पारदर्शी और तकनीक आधारित बनाया गया है। आवेदन दर्ज करने से लेकर उसके सत्यापन, स्वीकृति और खातों में राशि भेजने का पूरा काम ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से निष्पादित किया जा रहा है। प्रक्रिया में पारदर्शिता और प्रामाणिकता बनाए रखने के लिए लाभार्थी के चेहरे का मिलान उसकी पहचान प्रणाली से किया जाता है। इससे किसी भी तरह की गड़बड़ी की गुंजाइश खत्म हो गई है और सही पात्र व्यक्ति तक समय पर सहायता पहुंच रही है।
महिला कल्याण एवं बाल विकास विभाग की अपर मुख्य सचिव लीना जौहरी के अनुसार, डिजिटल ट्रैकिंग और मजबूत जमीनी ढांचे के चलते ही योजना का लाभ निर्धारित समय सीमा के भीतर जरूरतमंदों तक पहुंचाना संभव हो पा रहा है। शत-प्रतिशत से अधिक नामांकन इस बात का प्रमाण है कि राज्य में मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है। पारदर्शी भुगतान व्यवस्था और तकनीकी सुधारों के बल पर सुरक्षित मातृत्व और स्वस्थ बचपन के लक्ष्य को हासिल करने की दिशा में लगातार कदम बढ़ाए जा रहे हैं।
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