उत्तर प्रदेश की किसान रजिस्ट्री में बड़ी छलांग: टॉप-10 में शामिल हुआ राज्य, 2.45 करोड़ से अधिक किसानों का हुआ डिजिटल पंजीकरण
उत्तर प्रदेश किसान रजिस्ट्री अभियान में देश के शीर्ष 10 राज्यों में शामिल। 2.45 करोड़ किसानों का सफल पंजीकरण, गाजियाबाद व रामपुर ने हासिल किया शत-प्रतिशत लक्ष्य।
उत्तर प्रदेश में किसानों को सरकारी योजनाओं का पारदर्शी और त्वरित लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से चलाया जा रहा किसान रजिस्ट्री अभियान एक नया कीर्तिमान स्थापित कर रहा है। राज्य में अब तक 85 प्रतिशत से अधिक लक्ष्य पूरा कर लिया गया है, जिसके चलते उत्तर प्रदेश ने राष्ट्रीय स्तर पर शीर्ष दस राज्यों की सूची में अपनी जगह बना ली है। डिजिटल कृषि प्रशासन को बढ़ावा देने के लिए राज्य सरकार प्रदेश भर में बचे हुए किसानों के पंजीकरण का काम भी जल्द से जल्द पूरा करने के लिए अभियानात्मक स्तर पर काम कर रही है।
केंद्र सरकार द्वारा उत्तर प्रदेश के लिए दो करोड़ अड़तालीस लाख से अधिक किसानों के पंजीकरण का लक्ष्य तय किया गया था। विभागीय आंकड़ों के अनुसार, इसमें से दो करोड़ पैंतालीस लाख से अधिक किसानों का सफल पंजीकरण कराया जा चुका है। अब राज्य में शेष बचे किसानों को इस व्यवस्था से जोड़ने के लिए पंजीकरण प्रक्रिया की गति को और बढ़ाया जा रहा है। विभागीय रिपोर्ट के मुताबिक, उत्तर प्रदेश राष्ट्रीय रैंकिंग में नौवें स्थान के बेहद करीब पहुंच चुका है और प्रशासनिक तंत्र शत-प्रतिशत लक्ष्य हासिल करने में जुटा हुआ है।
जनपद स्तर पर प्रदर्शन की बात करें तो गाजियाबाद और रामपुर ने केंद्र सरकार द्वारा निर्धारित लक्ष्य का शत-प्रतिशत पंजीकरण पूरा करके राज्य में पहला स्थान हासिल किया है। वहीं, भूमि अभिलेखों में अंश निर्धारण के कार्य में झांसी और हरदोई का प्रदर्शन सबसे शानदार रहा है। प्रदेश में अंश निर्धारण का कार्य लगभग नब्बे प्रतिशत के करीब पहुंच गया है, जिससे राजस्व अभिलेखों के कंप्यूटरीकरण और किसानों की सटीक पहचान सुनिश्चित करने में काफी सहूलियत मिल रही है।
राज्य सरकार इस डिजिटल डेटाबेस के माध्यम से किसानों तक प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि, फसल बीमा, कृषि ऋण, उर्वरक सब्सिडी और अन्य कल्याणकारी सुविधाओं का सीधा और निर्बाध लाभ पहुंचाना चाहती है। एकीकृत डेटाबेस तैयार होने के बाद योजनाओं के क्रियान्वयन में पूर्ण पारदर्शिता आएगी और किसानों को बिचौलियों के बिना अपनी डिजिटल पहचान के बल पर सरकारी सहायता प्राप्त हो सकेगी।
अभियान की समयबद्धता बनाए रखने के लिए कृषि और राजस्व विभाग की संयुक्त टीमों को पंचायत स्तर पर तैनात किया गया है। अधिकारियों का लक्ष्य है कि आने वाले समय में राज्य के प्रत्येक पात्र किसान को डिजिटल पहचान प्रदान की जाए, ताकि किसी भी सरकारी योजना या आपात राहत का लाभ तुरंत उनके खातों तक पहुंच सके।
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