यूपी के उच्च शिक्षण संस्थानों में स्थापित होंगी 'भारतीय ज्ञान परंपरा संवर्धन शोधपीठ', जानें पात्रता और बजट
यूपी के 50 वर्ष पुराने विश्वविद्यालयों में स्थापित होंगी भारतीय ज्ञान परंपरा शोधपीठ। चयनित संस्थानों को मिलेगा 2 करोड़ का अनुदान। पढ़ें पूरी खबर।
उत्तर प्रदेश सरकार ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के तहत राज्य के उच्च शिक्षण संस्थानों में प्राचीन धरोहर, दर्शन और विज्ञान को बढ़ावा देने के लिए एक बड़ी योजना की शुरुआत की है। इस योजना के अंतर्गत विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों में 'भारतीय ज्ञान परंपरा संवर्धन शोधपीठ' की स्थापना की जाएगी। इसका उद्देश्य देश की प्राचीन विरासत, संस्कृति और दर्शन को आधुनिक शिक्षा प्रणाली से जोड़कर युवाओं में शोध को प्रोत्साहित करना है।
इस योजना के तहत आवेदन करने के लिए संस्थानों के पास कम से कम 50 वर्ष की स्थापना का अनुभव होना अनिवार्य है। साथ ही संस्थान में 5,000 से अधिक विद्यार्थी होने चाहिए और यूजीसी अधिनियम 1956 की धारा 2(f) और 12(B) के तहत मान्यता प्राप्त होनी चाहिए। चयनित होने वाली प्रत्येक शोधपीठ को पांच वर्षों के लिए 2 करोड़ रुपये का एकमुश्त अनुदान दिया जाएगा। इस राशि को सावधि जमा (एफडी) में रखा जाएगा और उसके ब्याज से शोधपीठ की नियमित गतिविधियों का संचालन होगा।
उच्च शिक्षा मंत्री योगेंद्र उपाध्याय के अनुसार, इन शोधपीठों के जरिए वेद, उपनिषद, रामायण, महाभारत, बौद्ध व जैन दर्शन, आयुर्वेद, योग, भारतीय गणित और खगोल विज्ञान जैसे विषयों पर शोध को बढ़ावा दिया जाएगा। शोधार्थियों, पीएचडी और पोस्ट-डॉक्टरेट छात्रों को इसके जरिए वित्तीय सहायता और शैक्षणिक संसाधन मिलेंगे। इसके अलावा, प्राचीन ग्रंथों और दुर्लभ पांडुलिपियों का डिजिटलीकरण करके उन्हें डिजिटल प्लेटफॉर्म और ओपन-एक्सेस लाइब्रेरी पर उपलब्ध कराया जाएगा।
योजना का संचालन सुचारू रूप से करने के लिए प्रत्येक संस्थान में कुलपति या प्राचार्य की अध्यक्षता में एक उच्चस्तरीय समिति बनेगी। शोधपीठों के चयन और प्रस्तावों की जांच के लिए उच्च शिक्षा निदेशक की अध्यक्षता में पांच सदस्यीय समिति का गठन किया गया है।
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