देवबंद में शत्रु संपत्ति मामले की जांच में बड़ी कार्रवाई: लापरवाही पर एसएसआई निलंबित, संयुक्त जांच की मांग
सहारनपुर के देवबंद में करोड़ों की शत्रु संपत्ति पर अवैध कब्जे की जांच में लापरवाही बरतने पर एसएसपी ने विवेचना अधिकारी को निलंबित किया। निष्पक्ष जांच की मांग तेज।
सहारनपुर जनपद के देवबंद में करोड़ों रुपये मूल्य की शत्रु संपत्ति पर अवैध कब्जे के मामले में जांच प्रक्रिया को लेकर बड़ा प्रशासनिक कदम उठाया गया है। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक अभिनंदन सिंह ने मामले की जांच में लापरवाही बरतने के आरोपों के चलते देवबंद कोतवाली में तैनात वरिष्ठ उपनिरीक्षक और विवेचना अधिकारी आदेश कुमार को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। इस कार्रवाई के बाद से पुलिस महकमे के साथ-साथ प्रशासनिक हलकों में भी हड़कंप मच गया है।
यह पूरा मामला वर्ष 1989 में पाकिस्तान चली गई सालेहा खातून के नाम दर्ज करोड़ों रुपये की शत्रु संपत्ति से जुड़ा हुआ है। आरोप है कि इस बेहद कीमती सरकारी संपत्ति पर अवैध रूप से कब्जा जमाकर वहां मदरसा संचालित किया जा रहा है। मामले की शिकायत बजरंग दल के पूर्व प्रांत संयोजक विकास त्यागी द्वारा की गई थी। शिकायतकर्ता ने उच्च अधिकारियों से मिलकर आरोप लगाया था कि देवबंद पुलिस स्थानीय स्तर पर प्रभावशाली लोगों को बचाने का प्रयास कर रही है। उनका यह भी आरोप था कि पुलिस ने एक नामजद आरोपी को पकड़ने के बाद बिना किसी ठोस कानूनी कार्रवाई के छोड़ दिया और मामले को खत्म करने की तैयारी की जा रही थी।
शिकायत के आधार पर मंडलायुक्त डॉ. रूपेश कुमार, जिलाधिकारी अरविंद चौहान और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक अभिनंदन सिंह से मुलाकात कर निष्पक्ष जांच कराने और आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की गई थी। इसके बाद पुलिस कप्तान ने मामले को गंभीरता से लेते हुए विवेचक के खिलाफ निलंबन की कार्रवाई की। क्षेत्राधिकारी देवबंद अमित कुमार ने पुष्टि करते हुए बताया कि प्रकरण में लापरवाही के आरोप सिद्ध होने पर विवेचना अधिकारी को निलंबित किया गया है और वरिष्ठ अधिकारियों से मिलने वाले निर्देशों के आधार पर आगे की जांच आगे बढ़ाई जाएगी।
इस कार्रवाई के बाद पुलिस विभाग के कुछ अन्य अधिकारियों और राजस्व विभाग के कर्मचारियों की भूमिका पर भी सवाल उठने लगे हैं। माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में जांच का दायरा बढ़ने पर कुछ और लोगों के खिलाफ भी कार्रवाई हो सकती है।
दूसरी ओर, शिकायतकर्ता ने पूरे प्रकरण की पारदर्शिता बनाए रखने के लिए जांच को देवबंद पुलिस के स्थान पर पुलिस और राजस्व विभाग की एक स्वतंत्र संयुक्त टीम को सौंपने की मांग की है। इसके साथ ही शत्रु संपत्ति को जल्द से जल्द पूरी तरह से खाली कराकर सरकारी नियंत्रण में लेने की मांग भी की गई है। फिलहाल पुलिस उच्च अधिकारियों के मार्गदर्शन में निष्पक्ष साक्ष्य जुटाने में लगी हुई है।
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