देवास में पेट्रोल का संकट: बुलेट छोड़ घोड़े पर सवार होकर बैंक ड्यूटी पहुंचे गोपाल ठाकुर।
मध्य प्रदेश के औद्योगिक शहर देवास में पिछले कुछ दिनों से पेट्रोल और डीजल की भारी किल्लत महसूस की जा रही है। शहर के लगभग हर छोटे-बड़े
- ईंधन की किल्लत और पंपों पर भारी भीड़ से परेशान युवक ने अपनाया 'शाही' विकल्प, सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल
- आधुनिक परिवहन फेल होने पर काम आया पारंपरिक साधन, समय की पाबंदी ने युवक को बनाया 'घुड़सवार कर्मचारी'
मध्य प्रदेश के औद्योगिक शहर देवास में पिछले कुछ दिनों से पेट्रोल और डीजल की भारी किल्लत महसूस की जा रही है। शहर के लगभग हर छोटे-बड़े पेट्रोल पंप पर दोपहिया और चारपहिया वाहनों की लंबी कतारें सूरज ढलने के बाद भी कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। स्थिति यह है कि कई पंपों पर 'स्टॉक खत्म' के बोर्ड लटक गए हैं, जिससे काम पर जाने वाले मध्यमवर्गीय परिवारों और नौकरीपेशा लोगों के सामने समय पर अपने गंतव्य तक पहुंचने की एक बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है। इसी अनिश्चितता के माहौल में राधागंज क्षेत्र के निवासी गोपाल ठाकुर की कहानी ने सबका ध्यान खींचा, जिन्होंने पेट्रोल के लिए घंटों इंतजार करने के बजाय एक साहसिक और व्यावहारिक निर्णय लिया।
गोपाल ठाकुर, जो पेशे से एक बैंक कर्मचारी हैं, के पास एक बुलेट मोटरसाइकिल है जिसे वह रोजाना अपने दफ्तर जाने के लिए इस्तेमाल करते हैं। हालांकि, जब उन्होंने देखा कि उनके घर के आसपास के सभी पेट्रोल पंपों पर हजारों की संख्या में लोग अपनी बारी का इंतजार कर रहे हैं और कई घंटों तक लाइन में खड़े रहने के बाद भी ईंधन मिलने की कोई गारंटी नहीं है, तो उन्हें अपनी ड्यूटी पर समय से पहुंचने की चिंता सताने लगी। बैंक में समय की पाबंदी अनिवार्य होती है और पेट्रोल की कमी के कारण वे अपने कार्यस्थल पर देरी से नहीं पहुंचना चाहते थे। ऐसे में उन्होंने अपनी बुलेट को गैरेज में ही खड़ा रहने दिया और परिवहन के उस माध्यम को चुना जो पेट्रोल की कीमतों या उसकी उपलब्धता से पूरी तरह मुक्त है।
गोपाल के पास एक घोड़ा है, जिसका उपयोग आमतौर पर वह शौक या विशेष आयोजनों के लिए करते थे। लेकिन इस बार, ईंधन के संकट ने इस जानवर को एक अनिवार्य सवारी बना दिया। उन्होंने घोड़े पर जीन कसी और अपनी बैंक की वर्दी पहनकर पूरी तैयारी के साथ ऑफिस के लिए निकल पड़े। जैसे ही गोपाल घोड़े पर सवार होकर देवास की व्यस्त सड़कों से गुजरे, राह चलते लोग उन्हें हैरतभरी नजरों से देखने लगे। शहर के शोर-शराबे और वाहनों के धुएं के बीच एक युवक का घोड़े पर बैठकर गरिमा के साथ दफ्तर जाना एक ऐसा दृश्य था, जो लंबे समय से इस आधुनिक शहर ने नहीं देखा था।
- संकट में समाधान की तलाश
पेट्रोल पंपों की कतारें आम नागरिक के धैर्य की परीक्षा ले रही हैं, और गोपाल ठाकुर जैसे उदाहरण यह सोचने पर मजबूर करते हैं कि क्या हम अपनी गति के लिए पूरी तरह से जीवाश्म ईंधन पर निर्भर होकर अपनी स्वावलंबन की क्षमता खो चुके हैं। राधागंज से बैंक तक का रास्ता तय करते हुए गोपाल ने न केवल पेट्रोल की समस्या से निजात पाई, बल्कि उन्होंने ट्रैफिक जाम में फंसने की परेशानी को भी पीछे छोड़ दिया। उनके इस अनोखे सफर को देखकर कई लोगों ने अपने मोबाइल कैमरों में उनकी तस्वीरें और वीडियो कैद किए। सड़क पर दौड़ते वाहनों के बीच घोड़े की टापों की आवाज ने लोगों को एक पल के लिए रुकने और इस स्थिति पर विचार करने के लिए मजबूर किया। इस सफर के दौरान उन्हें कहीं भी रुकने की आवश्यकता नहीं पड़ी और वे बिल्कुल सटीक समय पर अपने बैंक परिसर में पहुंच गए, जिससे उनके सहकर्मी भी अपनी हंसी और आश्चर्य नहीं रोक पाए।
गोपाल ठाकुर का कहना है कि पेट्रोल की समस्या ने शहर के हर व्यक्ति को मानसिक रूप से परेशान कर दिया है। लोग काम छोड़कर लाइनों में लगे हैं, जिससे आर्थिक नुकसान भी हो रहा है। उन्होंने बताया कि उनके लिए बैंक पहुंचना प्राथमिकता थी, क्योंकि वहां ग्राहकों का काम प्रभावित होता। घोड़े का उपयोग करने से न तो उन्हें पेट्रोल के खर्च की चिंता रही और न ही लाइन में लगकर समय बर्बाद करने की। यह निर्णय उनके लिए पूरी तरह से सुविधाजनक रहा, हालांकि शहर के आधुनिक यातायात के बीच इस तरह सवारी करना थोड़ा अलग अनुभव था, लेकिन उद्देश्य की प्राप्ति ने इसे सार्थक बना दिया। देवास की इस घटना ने प्रशासन और आपूर्ति व्यवस्था पर भी कई सवाल खड़े कर दिए हैं। शहर में ईंधन की कमी के कारणों को लेकर विभिन्न कयास लगाए जा रहे हैं, लेकिन धरातल पर आम आदमी की परेशानी कम होती नहीं दिख रही।
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