गाजियाबाद में दिनदहाड़े 25 लाख की सनसनीखेज लूट: बदमाशों ने गन पॉइंट पर ड्राइवर को बनाया बंधक।
उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद जिले में दिनदहाड़े हुई कैश वैन लूट की वारदात ने सुरक्षा तंत्र और पुलिसिया चौकसी की पोल खोलकर
- एनएच-9 पर फिल्मी स्टाइल में लूटी गई कैश वैन, पुलिस की मुस्तैदी को धता बताकर फरार हुए बदमाश
- सुरक्षा मानकों की अनदेखी या गहरी साजिश? क्रॉसिंग रिपब्लिक लूटकांड ने प्रशासनिक तंत्र को झकझोरा
उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद जिले में दिनदहाड़े हुई कैश वैन लूट की वारदात ने सुरक्षा तंत्र और पुलिसिया चौकसी की पोल खोलकर रख दी है। क्रॉसिंग रिपब्लिक थाना क्षेत्र में एनएच-9 (NH-9) पर बदमाशों ने जिस दुस्साहस के साथ इस घटना को अंजाम दिया, उसने पूरे एनसीआर में हड़कंप मचा दिया है। करीब 25 लाख रुपये की नकदी लेकर निकले कर्मचारियों को उस वक्त निशाना बनाया गया जब वे एटीएम में कैश भरने की प्रक्रिया में थे। फिल्मी अंदाज में हुई इस डकैती ने न केवल अपराधियों के बुलंद हौसलों को दिखाया है, बल्कि यह भी संकेत दिया है कि इस पूरी वारदात के पीछे कोई गहरी साजिश या 'इनसाइड जॉब' (भीतरी सांठगांठ) हो सकती है। पुलिस की आठ टीमें इस गुत्थी को सुलझाने में जुटी हैं, लेकिन घटना के कई पहलू अब भी रहस्य बने हुए हैं। गाजियाबाद के क्रॉसिंग रिपब्लिक थाना क्षेत्र में हुई यह लूट किसी सोची-समझी पटकथा की तरह प्रतीत होती है। बुधवार दोपहर करीब 1 बजे, जब दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे और एनएच-9 पर वाहनों की भारी आवाजाही रहती है, तब 'इंडिया-1' नामक वित्तीय संस्था की कैश वैन को निशाना बनाया गया। वैन में कुल पांच कर्मचारी सवार थे और वे सुबह से ही विभिन्न एटीएम में कैश लोडिंग का काम कर रहे थे। जानकारी के अनुसार, वे करीब 25 लाख रुपये की नकदी लेकर कार्यालय से निकले थे। चार एटीएम में सफलतापूर्वक कैश डालने के बाद जब वे पांचवें गंतव्य की ओर बढ़े, तभी बदमाशों ने घात लगाकर हमला किया। बदमाशों की संख्या तीन से चार बताई जा रही है, जो पूरी तरह हथियारों से लैस थे और जिन्होंने वैन के ड्राइवर को गन पॉइंट पर लेकर उसे गाड़ी से नीचे फेंक दिया और पूरी वैन लेकर फरार हो गए।
इस लूटकांड की सबसे रहस्यमयी बात यह रही कि वैन के साथ मौजूद सुरक्षाकर्मी और कर्मचारी घटना के वक्त गाड़ी से कुछ दूरी पर थे। बताया जा रहा है कि कर्मचारी एक एटीएम बूथ के पास रुककर खाना खाने लगे थे, जबकि ड्राइवर वैन के भीतर ही बैठा था। बदमाशों ने इसी समय का फायदा उठाया। उन्होंने पहले हवा में फायरिंग की ताकि आसपास के लोग और कर्मचारी दहशत में आ जाएं। इसके बाद उन्होंने ड्राइवर को बंधक बनाकर वैन को अपने कब्जे में लिया। पुलिस को इस बात पर गहरा संदेह है कि बदमाशों को वैन के रुकने के सटीक समय और स्थान की जानकारी पहले से थी। यह संयोग मात्र नहीं हो सकता कि जिस वक्त गार्ड वैन से दूर था, तभी हमला हुआ। यह स्थिति स्पष्ट रूप से सुरक्षा प्रोटोकॉल में एक बड़ी सेंध की ओर इशारा करती है। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस मुख्यालय में खलबली मच गई। एडिशनल पुलिस कमिश्नर और डीसीपी सिटी समेत तमाम वरिष्ठ अधिकारी मौके पर पहुंचे। शुरुआती जांच में यह पाया गया कि लुटेरों ने वैन को करीब 10 किलोमीटर दूर मसूरी थाना क्षेत्र के पास लावारिस हालत में छोड़ दिया। वैन के भीतर से करीब 20 से 25 लाख रुपये गायब थे। पुलिस का मानना है कि बदमाशों ने वैन को सुरक्षित स्थान पर ले जाकर उसमें रखे कैश बॉक्स को तोड़ा या चाबियों के जरिए उसे खोला और फिर नकदी लेकर अपनी दूसरी गाड़ी से फरार हो गए। वैन की बरामदगी से यह स्पष्ट हो गया कि अपराधियों का उद्देश्य केवल नकदी थी और उन्होंने वैन का इस्तेमाल केवल भागने और सुरक्षित जगह तक पहुंचने के लिए एक अस्थायी साधन के रूप में किया। कैश वैन के साथ आमतौर पर दो सशस्त्र गार्ड और जीपीएस ट्रैकिंग का होना अनिवार्य है। लेकिन इस घटना में यह पाया गया कि सुरक्षा मानकों का पालन नहीं किया गया था। वैन को मुख्य सड़क से हटाकर सुनसान जगह पर खड़ा करना और सुरक्षा गार्ड का वैन को अकेला छोड़ना जांच के घेरे में है।
जांच के दौरान पुलिस को कर्मचारियों के बयानों में काफी विरोधाभास मिला है। सूत्रों के मुताबिक, वैन में सवार कर्मचारी बार-बार अपने बयान बदल रहे हैं, जिससे पुलिस का शक गहरा गया है। कर्मचारियों से यह पूछा जा रहा है कि उन्होंने एटीएम बूथ से 150 मीटर दूर वैन क्यों खड़ी की थी? साथ ही, सुरक्षा के लिए तैनात गार्ड उस समय कहां था और उसने जवाबी फायरिंग क्यों नहीं की? पुलिस अब उन सभी मोबाइल नंबरों की कॉल डिटेल खंगाल रही है जो घटना के समय उस इलाके में सक्रिय थे। इसके अलावा, वैन संचालित करने वाली कंपनी के पुराने और वर्तमान कर्मचारियों की पृष्ठभूमि की भी जांच की जा रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि क्या किसी ने बदमाशों को अंदरूनी जानकारी लीक की थी।
गाजियाबाद पुलिस ने इस मामले के खुलासे के लिए आठ विशेष टीमों का गठन किया है, जो नोएडा, दिल्ली और मेरठ तक दबिश दे रही हैं। पुलिस सीसीटीवी कैमरों की फुटेज के आधार पर उन हमलावरों की पहचान करने की कोशिश कर रही है जिन्होंने वारदात को अंजाम दिया। फुटेज में एक संदिग्ध दिल्ली नंबर की गाड़ी वैन का पीछा करते हुए देखी गई है। यह भी अंदेशा जताया जा रहा है कि बदमाश पेशेवर लुटेरों के गिरोह से जुड़े हो सकते हैं जिन्होंने पहले भी इस तरह की वारदातों को अंजाम दिया है। गाजियाबाद के पुलिस अधिकारियों ने दावा किया है कि उनके पास कुछ महत्वपूर्ण सुराग हाथ लगे हैं और जल्द ही इस बड़ी साजिश का पर्दाफाश कर दिया जाएगा। इस लूटकांड ने कैश हैंडलिंग कंपनियों की कार्यप्रणाली पर भी बड़े सवाल खड़े किए हैं। नियमानुसार, कैश वैन को कभी भी लावारिस या केवल ड्राइवर के भरोसे नहीं छोड़ा जाना चाहिए। वैन में पैनिक बटन और रीयल-टाइम मॉनिटरिंग सिस्टम का होना जरूरी है। लेकिन इस मामले में तकनीकी खामियां और मानवीय लापरवाही का मिश्रण देखने को मिला है। यदि वैन में सक्रिय जीपीएस सिस्टम होता, तो पुलिस उसे 10 किलोमीटर दूर जाने से पहले ही इंटरसेप्ट कर सकती थी। दिनदहाड़े हुई इस वारदात ने गाजियाबाद के व्यापारिक जगत में भी असुरक्षा की भावना पैदा कर दी है, क्योंकि व्यस्ततम मार्ग पर इस तरह की डकैती पुलिस की पेट्रोलिंग और गश्त के दावों को चुनौती देती है।
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