फर्रुखाबाद में आठ महीने पुराने रहस्यमयी गुमशुदगी का सनसनीखेज अंत: खेत की खुदाई में मिला साइकिल मिस्त्री का नरकंकाल।

उत्तर प्रदेश के फर्रुखाबाद जिले में पिछले कई महीनों से चल रहे एक रहस्यमयी गुमशुदगी के मामले का पुलिस ने अंततः पर्दाफाश कर दिया है। यह मामला

Apr 1, 2026 - 13:17
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फर्रुखाबाद में आठ महीने पुराने रहस्यमयी गुमशुदगी का सनसनीखेज अंत: खेत की खुदाई में मिला साइकिल मिस्त्री का नरकंकाल।
फर्रुखाबाद में आठ महीने पुराने रहस्यमयी गुमशुदगी का सनसनीखेज अंत: खेत की खुदाई में मिला साइकिल मिस्त्री का नरकंकाल।
  • अपराध की गहराइयों से निकलकर सामने आई खौफनाक सच्चाई: लापता मिस्त्री की हत्या कर साक्ष्यों को मिटाने के लिए जमीन में गाड़ा गया था शव
  • पुलिस की तकनीकी जांच और मुखबिर की सूचना ने सुलझाई अनसुलझी गुत्थी: हत्यारे ने दोस्ती का कत्ल कर रची थी मौत की ऐसी साजिश

उत्तर प्रदेश के फर्रुखाबाद जिले में पिछले कई महीनों से चल रहे एक रहस्यमयी गुमशुदगी के मामले का पुलिस ने अंततः पर्दाफाश कर दिया है। यह मामला एक साधारण साइकिल मिस्त्री से जुड़ा है, जो लगभग आठ महीने पहले अचानक लापता हो गया था और उसके परिजनों ने उसकी काफी तलाश की थी, लेकिन तब पुलिस के हाथ खाली थे। अब पुलिस ने एक खेत की गहराई से मृतक का नरकंकाल बरामद किया है, जिसने पूरे इलाके में सनसनी फैला दी है। इस घटना ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि अपराध कितना भी पुराना क्यों न हो जाए, अपराधी का कोई न कोई सुराग अंततः उसे सलाखों के पीछे ले ही जाता है। जिस खेत से कंकाल मिला है, वह गांव के बाहरी इलाके में स्थित है और वहां की मिट्टी के नीचे दबे अवशेषों ने उस खौफनाक रात की दास्तान बयां कर दी है जब इस जघन्य हत्याकांड को अंजाम दिया गया था।

साइकिल मिस्त्री के गायब होने के बाद से ही उसके परिजन स्थानीय थाने के चक्कर लगा रहे थे, लेकिन प्रारंभिक जांच में पुलिस को कोई ठोस सुराग नहीं मिल सका था। गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज होने के बाद पुलिस ने कई संदिग्धों से पूछताछ की थी और मृतक के मोबाइल कॉल रिकॉर्ड्स की भी जांच की गई थी। हालांकि, हत्यारे ने बहुत ही शातिराना तरीके से मोबाइल को नष्ट कर दिया था ताकि कोई भी डिजिटल साक्ष्य शेष न रहे। आठ महीने तक परिजनों के मन में एक आस थी कि शायद उनका बेटा वापस लौट आए, लेकिन समय बीतने के साथ उनकी उम्मीदें टूटने लगी थीं। हाल ही में पुलिस को एक गोपनीय सूचना प्राप्त हुई, जिसके आधार पर जांच की दिशा बदली गई और एक पुराने परिचित पर शक की सुई घूमी, जिसके बाद इस पूरे घटनाक्रम की परतें एक-एक कर खुलने लगीं।

पुलिस ने जब संदिग्ध व्यक्ति को हिरासत में लेकर कड़ाई से पूछताछ की, तो वह ज्यादा देर तक झूठ नहीं बोल सका और उसने अपना जुर्म स्वीकार कर लिया। आरोपी ने बताया कि उसने पुरानी रंजिश या किसी निजी विवाद के चलते साइकिल मिस्त्री को धोखे से बुलाया और उसकी हत्या कर दी। हत्या के बाद सबसे बड़ी चुनौती शव को ठिकाने लगाने की थी, जिसके लिए उसने गांव के एक सुनसान खेत को चुना। रात के अंधेरे में उसने कई फीट गहरा गड्ढा खोदा और शव को उसमें दबाकर ऊपर से मिट्टी और फसल के अवशेष डाल दिए ताकि किसी को दुर्गंध न आए और न ही जमीन के धंसने का पता चले। आठ महीने तक वह चैन से रहा, लेकिन कानून की गिरफ्त से बचना उसके लिए मुमकिन नहीं था। घटनास्थल पर पहुंची फॉरेंसिक टीम और डॉग स्क्वायड ने साक्ष्यों को एकत्र करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। खेत से बरामद नरकंकाल के अवशेषों को अब डीएनए परीक्षण के लिए भेजा गया है ताकि यह वैज्ञानिक रूप से सिद्ध हो सके कि यह कंकाल लापता साइकिल मिस्त्री का ही है। इसके अलावा, मौके से कुछ फटे हुए कपड़े और जूते भी बरामद हुए हैं, जिनकी पहचान परिजनों ने कर ली है। पुलिस अब हत्या में इस्तेमाल किए गए हथियार और अन्य साक्ष्यों की तलाश कर रही है ताकि कोर्ट में एक मजबूत केस प्रस्तुत किया जा सके।

खेत की खुदाई के दौरान भारी पुलिस बल की मौजूदगी में नरकंकाल को बाहर निकाला गया। जैसे-जैसे कंकाल के हिस्से जमीन से ऊपर आ रहे थे, वहां मौजूद ग्रामीणों की भीड़ में आक्रोश और दुख साफ देखा जा सकता था। पुलिस ने पंचनामा भरकर अवशेषों को पोस्टमार्टम और फॉरेंसिक लैब के लिए भेज दिया है। आरोपी ने जिस तरह से इस पूरी वारदात को अंजाम दिया और इतने महीनों तक सामान्य जीवन जीता रहा, उसने अपराधियों की बढ़ती संवेदनहीनता को दर्शाया है। स्थानीय लोगों का मानना है कि मृतक एक सीधा-सादा व्यक्ति था और उसकी किसी से कोई बड़ी दुश्मनी नहीं थी, लेकिन छोटी सी बात पर उसकी जान ले लेना समाज के लिए एक बड़ा खतरा है।

इस खुलासे के बाद पुलिस अब इस बात की भी जांच कर रही है कि क्या इस हत्याकांड में मुख्य आरोपी के साथ कुछ अन्य लोग भी शामिल थे। शव को इतनी गहराई में दबाने और इतने महीनों तक राज छुपाए रखने में किसी और की मदद होने की प्रबल संभावना है। पुलिस ने गांव के कुछ अन्य संदिग्धों को भी रडार पर लिया है और उनके बयानों का मिलान किया जा रहा है। फर्रुखाबाद पुलिस ने इस सफलता को अपनी एक बड़ी उपलब्धि माना है, क्योंकि आठ महीने पुराने बंद हो चुके मामले को फिर से जीवित कर उसके मुकाम तक पहुँचाना एक चुनौतीपूर्ण कार्य था। अब पुलिस चार्जशीट दाखिल करने की तैयारी कर रही है ताकि दोषी को फांसी या आजीवन कारावास जैसी कठोरतम सजा मिल सके।

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