Sambhal : धूल फांक रही फाइल से पुनर्वास तक... 48 साल बाद सम्भल के दंगा पीड़ित परिवार को मिला न्याय का सहारा
कहना है कि दंगाइयों की धमकियों के कारण उन्हें संभल छोड़कर पलायन करना पड़ा। पिछले वर्ष रामशरण दास के पौत्र कपिल रस्तोगी अपनी वृद्ध मां को लेकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मिले और पूरे मामले की शिकायत दर्ज कराई। मुख्यमं
Report : उवैस दानिश, सम्भल
सम्भल में 48 साल पुराने दंगा पीड़ित परिवार को आखिरकार न्याय की एक नई उम्मीद मिली है। वर्ष 1978 के सांप्रदायिक दंगों में कारोबारी रामशरण दास रस्तोगी की निर्मम हत्या कर दी गई थी। परिवार का आरोप है कि हत्या के बाद शव को कुएं में फेंक दिया गया था और उनकी दुकान को आग के हवाले कर दिया गया था। दशकों तक न्याय और पुनर्वास की आस लगाए बैठे परिवार को अब जिला प्रशासन की ओर से आवासीय भूमि का पट्टा दिया जा रहा है।
29 मार्च 1978 को सम्भल में हुए दंगों के दौरान रामशरण दास रस्तोगी की हत्या कर दी गई थी। परिवार के मुताबिक दंगाइयों ने पहले दुकान में लूटपाट की, फिर रामशरण दास की हत्या कर शव को कुएं में फेंक दिया। घटना के बाद उनके पुत्र ने हत्या और साक्ष्य मिटाने की धाराओं में मुकदमा दर्ज कराया था, लेकिन वर्षों तक मामले में कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। पीड़ित परिवार का कहना है कि दंगाइयों की धमकियों के कारण उन्हें संभल छोड़कर पलायन करना पड़ा। पिछले वर्ष रामशरण दास के पौत्र कपिल रस्तोगी अपनी वृद्ध मां को लेकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मिले और पूरे मामले की शिकायत दर्ज कराई। मुख्यमंत्री के निर्देश पर प्रशासन ने मामले की जांच कराई, जिसके बाद अब परिवार को आवासीय भूमि का पट्टा आवंटित किया जा रहा है। कपिल रस्तोगी का कहना है कि यह केवल जमीन का पट्टा नहीं, बल्कि 48 साल बाद न्याय की शुरुआत है। उन्होंने मुख्यमंत्री और जिला प्रशासन का आभार जताते हुए कहा कि अब उनका परिवार दोबारा सम्भल में बसने की तैयारी कर रहा है।
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