'लगातार 5 रविवारों तक पीड़ित ग्राहक को मुफ्त में खिलानी होगी दस-दस प्लेट बिरयानी', बिरयानी में मरा हुआ कीड़ा मिलने के बाद कोर्ट का अनूठा फैसला
केंद्र शासित प्रदेश पुडुचेरी के जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग से एक बेहद ही अनोखा, ऐतिहासिक और नजीर पेश करने
- लगातार 5 रविवारों तक पीड़ित ग्राहक को मुफ्त में खिलानी होगी दस-दस प्लेट बिरयानी, लापरवाही पर भारी जुर्माना भी लगाया
- बिल भुगतान और डिजिटल सबूतों के आधार पर रेस्टोरेंट प्रबंधन पूरी तरह दोषी करार, खाद्य सुरक्षा मानकों को लेकर कानूनी शिकंजा कड़ा
केंद्र शासित प्रदेश पुडुचेरी के जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग से एक बेहद ही अनोखा, ऐतिहासिक और नजीर पेश करने वाला कानूनी फैसला सामने आया है, जिसने देश भर के होटल और रेस्टोरेंट संचालकों के बीच हड़कंप मचा दिया है। उपभोक्ता अदालत ने भोजन की गुणवत्ता में गंभीर लापरवाही बरतने और ग्राहकों के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ करने के एक मामले में संबंधित रेस्टोरेंट प्रबंधन को न केवल दोषी पाया है, बल्कि उसे एक अत्यंत अनूठा दंडात्मक आदेश भी सुनाया है। आयोग के इस ऐतिहासिक फैसले के तहत दोषी रेस्टोरेंट को पीड़ित उपभोक्ता को आगामी लगातार 5 रविवारों तक हर बार दस-दस प्लेट उच्च गुणवत्ता वाली फ्री (मुफ्त) बिरयानी उपलब्ध करानी होगी। इसके साथ ही, मानसिक प्रताड़ना और कानूनी खर्चों की भरपाई के लिए रेस्टोरेंट पर भारी वित्तीय जुर्माना भी लगाया गया है, जो यह साबित करता है कि उपभोक्ताओं के अधिकारों की रक्षा के लिए देश का विधिक ढांचा पूरी तरह से मुस्तैद और कड़ा रुख अपनाए हुए है।
इस पूरे कानूनी विवाद और दिलचस्प मामले की शुरुआत पिछले वर्ष दिसंबर के महीने में हुई थी, जब पुडुचेरी के रहने वाले पी. सुंदरकुमारा मणिकंदन नामक एक सचेत नागरिक अपने कुछ करीबी दोस्तों के साथ छुट्टियां बिताने और भोजन का आनंद लेने बाहर निकले थे। वे सभी मिलकर आठ दिसंबर दो हजार पच्चीस को शहर के एक बेहद लोकप्रिय और व्यस्त रहने वाले खाद्य प्रतिष्ठान, जिसका नाम 'बिरयानी एंड रेस्टोरेंट' है, में दोपहर का भोजन करने पहुंचे थे। सभी मित्रों ने मिलकर वहां लजीज बिरयानी का ऑर्डर दिया और पूरे चाव से भोजन करना शुरू किया। इस दौरान उन्होंने कुल 558 रुपये का भोजन किया और उसका बाकायदा बिल भुगतान भी किया। हालांकि, भोजन करने की इस प्रक्रिया के बीच में ही मणिकंदन की थाली में परोसी गई बिरयानी के मलबे से एक मरा हुआ और बेहद घिनौना कीड़ा अचानक सामने आ गया, जिसे देखकर सभी मित्र पूरी तरह अवाक रह गए और पूरे रेस्टोरेंट के भीतर तीखी बहस की स्थिति पैदा हो गई।
भोजन में इस तरह की जानलेवा गंदगी और कीड़ा मिलने के तुरंत बाद पीड़ित ग्राहक पी. सुंदरकुमारा मणिकंदन ने बेहद जिम्मेदारी और कूटनीतिक सूझबूझ का परिचय दिया। उन्होंने रेस्टोरेंट के भीतर किसी भी प्रकार की हिंसा या हुड़दंग करने के बजाय तुरंत अपने मोबाइल फोन का कैमरा निकाला और बिरयानी की थाली में पड़े मरे हुए कीड़े की कई स्पष्ट तस्वीरें खींच लीं और साथ ही उसका एक विस्तृत वीडियो भी बना लिया। इसके तुरंत बाद उन्होंने मौके पर मौजूद मुख्य मैनेजर और वेटर को अपनी टेबल पर बुलाकर इस गंभीर लापरवाही की प्रत्यक्ष शिकायत दर्ज कराई और भोजन की खराब गुणवत्ता पर कड़ा विरोध प्रकट किया। हालांकि, रेस्टोरेंट प्रबंधन और वहां के कर्मचारियों ने ग्राहक की इस वैध शिकायत पर कोई ध्यान नहीं दिया और अपनी गलती स्वीकार करने के बजाय बेहद गैर-जिम्मेदाराना और अड़ियल रवैया अपनाया, जिससे दोनों पक्षों के बीच विवाद काफी ज्यादा बढ़ गया। जब व्यावसायिक प्रतिष्ठानों द्वारा ग्राहकों की जायज शिकायतों को पूरी तरह से नजरअंदाज कर दिया जाता है, तो देश की उपभोक्ता अदालतें आम नागरिकों के लिए सबसे बड़ा और प्रभावी सहारा बनती हैं। पुडुचेरी का यह मामला इसी कूटनीतिक और कानूनी लड़ाई का एक बेहतरीन उदाहरण है, जहां एक जागरूक नागरिक ने रेस्टोरेंट के अहंकार के सामने घुटने टेकने के बजाय कानून के लंबे हाथों का सहारा लेकर अपनी लड़ाई को तार्किक परिणति तक पहुंचाया।
रेस्टोरेंट प्रबंधन के इस संवेदनशीलता से परे और अपमानजनक व्यवहार से आहत होकर पीड़ित मणिकंदन ने इस मामले को यहीं न छोड़ने का कड़ा संकल्प लिया और उन्होंने सीधे पुडुचेरी के जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग का दरवाजा खटखटाया। अदालत के भीतर चली लंबी कानूनी जिरह के दौरान पीड़ित के वकीलों ने घटना के समय का वैध कैश मेमो यानी बिल और मोबाइल फोन से रिकॉर्ड की गई डिजिटल तस्वीरों और वीडियो साक्ष्यों को पूरी तरह से साक्ष्य के रूप में न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किया। इन अकाट्य और तकनीकी रूप से प्रमाणित सबूतों के सामने रेस्टोरेंट के वकीलों की तमाम दलीलें और बचाव के दावे पूरी तरह से ध्वस्त हो गए। आयोग ने सभी दस्तावेजों और विजुअल साक्ष्यों का गहनता से अवलोकन करने के बाद यह माना कि रेस्टोरेंट ने न केवल उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम के तहत प्रदत्त 'सेवा में कमी' की है, बल्कि खाद्य सुरक्षा मानकों का भी खुला उल्लंघन किया है।
जिला उपभोक्ता आयोग के माननीय अध्यक्ष और सदस्यों की पीठ ने इस मामले में एक बेहद कड़ा और सुधारात्मक रुख अपनाते हुए अपना अंतिम फैसला सुनाया। अदालत ने रेस्टोरेंट को आदेश दिया कि वह पीड़ित मणिकंदन को मानसिक और शारीरिक प्रताड़ना के एवज में बीस हजार रुपये का हर्जाना और कानूनी लड़ाई में हुए खर्च के रूप में अलग से 5 हजार रुपये की नकद राशि का भुगतान करे। इसके साथ ही, सजा को अधिक व्यावहारिक और सुधारात्मक बनाने के लिए आयोग ने वह ऐतिहासिक आदेश जोड़ा जिसके तहत रेस्टोरेंट को लगातार 5 रविवारों तक पीड़ित को हर बार दस प्लेट के हिसाब से कुल पचास प्लेट फ्री बिरयानी की होम डिलीवरी या टेक-अवे की सुविधा प्रदान करनी होगी। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि इस अवधि के दौरान भोजन की गुणवत्ता में दोबारा कोई कमी पाई गई, तो रेस्टोरेंट का लाइसेंस हमेशा के लिए रद्द करने की कार्रवाई शुरू कर दी जाएगी।
इस अनोखे और कड़े अदालती फैसले के बाद पुडुचेरी के खाद्य सुरक्षा विभाग और स्थानीय स्वास्थ्य प्रशासन ने भी शहर के सभी छोटे-बड़े होटलों और भोजनालयों के खिलाफ अपनी प्रशासनिक निगरानी को अत्यधिक कड़ा कर दिया है। खाद्य सुरक्षा अधिकारियों की विशेष टीमों ने विभिन्न व्यावसायिक रसोइयों (कमर्शियल किचन्स) का औचक निरीक्षण करना शुरू कर दिया है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि जहां भोजन तैयार किया जा रहा है, वहां स्वच्छता और कीट नियंत्रण (पेस्ट कंट्रोल) के पुख्ता इंतजाम मौजूद हैं या नहीं। प्रशासन ने चेतावनी दी है कि बासी भोजन परोसने, रसोइयों में गंदगी रखने या एक्सपायर्ड कच्चे माल का उपयोग करने वाले किसी भी प्रतिष्ठान को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और पुडुचेरी की छवि को धूमिल करने वाले ऐसे होटलों पर सीलिंग की कार्रवाई की जाएगी।
Also Read- Nutrition Special: पोषण से कुपोषण पर वार: योगी सरकार की पौष्टिक थाली से मजबूत हो रही नई पीढ़ी।
What's Your Reaction?




