Saharanpur News: नागल में भारी बारिश से खुली विकास कार्यों की पोल, जलभराव के बाद स्वच्छता बजट पर उठे गंभीर सवाल
नागल क्षेत्र में भारी बारिश के बाद गांवों और सरकारी दफ्तरों में भारी जलभराव हो गया है। ग्राम पंचायतों में स्वच्छता बजट के सही इस्तेमाल पर सवाल उठ रहे हैं।
सहारनपुर जिले के नागल क्षेत्र में पिछले तीन दिनों से हो रही मूसलाधार बारिश ने आम जनजीवन को पूरी तरह अस्त-व्यस्त कर दिया है। इस भारी बारिश के कारण जहां चारों तरफ पानी भर गया है, वहीं ग्राम पंचायतों में विकास और साफ-सफाई के दावों की जमीनी हकीकत भी सामने आ गई है। स्थानीय प्रशासन द्वारा स्वच्छता और जल निकासी के नाम पर बजट का एक बड़ा हिस्सा खर्च किए जाने के दावों के बावजूद ग्रामीण इलाकों में जलभराव की गंभीर समस्या पैदा हो गई है। सड़कों से लेकर गलियों तक पानी जमा होने से ग्रामीणों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है, जिससे सरकारी धन के सही इस्तेमाल पर बड़े सवाल खड़े हो रहे हैं।
नियमों के अनुसार, पंचायती राज विभाग के अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायतों को मिलने वाले कुल बजट का लगभग 60 प्रतिशत हिस्सा साफ-सफाई, नालियों की मरम्मत और जल निकासी जैसे जरूरी कार्यों पर खर्च करने का प्रावधान है। उदाहरण के तौर पर देखें तो जिन बड़ी ग्राम पंचायतों का सालाना बजट एक करोड़ रुपये या उससे अधिक है, वहां नियमानुसार लगभग 60 लाख रुपये केवल स्वच्छता व्यवस्था को दुरुस्त करने के लिए दिए जाते हैं। इतनी बड़ी रकम मिलने के बाद भी ग्रामीण क्षेत्रों में जलभराव और गंदगी की स्थिति में कोई खास सुधार देखने को नहीं मिल रहा है। इस बार हुई तेज बारिश ने नालियों की सफाई की व्यवस्था को पूरी तरह प्रभावित कर दिया है, जिससे साफ-सफाई के नाम पर हुए कार्यों की कमियां खुलकर सामने आ गई हैं।
बारिश का असर केवल रिहायशी इलाकों और गांवों की गलियों तक ही सीमित नहीं रहा, बल्कि कई सरकारी दफ्तरों के परिसरों में भी घुटनों तक पानी भर गया है। इससे दफ्तर आने-जाने वाले कर्मचारियों और अपने कामों के लिए पहुंचने वाले आम लोगों को भारी परेशानी उठानी पड़ रही है। स्थानीय लोगों का कहना है कि अगर कागजों पर दिखाए गए कार्यों के अनुसार नालियों और जल निकासी के रास्तों को समय रहते साफ किया गया होता, तो आज गांवों को इस तरह टापू में तब्दील होने से बचाया जा सकता था।
अब क्षेत्र के जागरूक नागरिकों और ग्रामीणों के बीच यह चर्चा तेज हो गई है कि जब हर साल लाखों रुपये का बजट केवल स्वच्छता और जल निकासी के नाम पर जारी किया जाता है, तो फिर पहली ही भारी बारिश में पूरा सिस्टम क्यों फेल हो जाता है। लोगों की मांग है कि इस गंभीर समस्या को देखते हुए उच्च अधिकारियों को मौके का मुआयना करना चाहिए और विकास कार्यों के नाम पर जारी किए गए बजट की जांच करानी चाहिए ताकि यह पता चल सके कि जनता का पैसा वास्तव में कहां इस्तेमाल हुआ है। आने वाले दिनों में अगर जल निकासी के पुख्ता इंतजाम नहीं किए गए, तो संक्रामक बीमारियों के फैलने का खतरा भी बढ़ सकता है।
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