Mob Lynching Controversy: वेशभूषा बदलने की सलाह पर भड़के मौलाना महमूद मदनी, बोले- पहचान छिपाना समाधान नहीं
जमीयत उलमा-ए-हिंद के अध्यक्ष मौलाना महमूद मदनी ने पूर्व आईएएस नियाज खान के बयान पर आपत्ति जताई है। उन्होंने कहा कि पहचान छिपाना मॉब लिंचिंग का हल नहीं है।
जमीयत उलमा-ए-हिंद के अध्यक्ष मौलाना महमूद मदनी ने पूर्व आईएएस अधिकारी नियाज खान के उस बयान का कड़ा विरोध किया है, जिसमें उन्होंने मुसलमानों को हिंसा से बचने के लिए अपनी पारंपरिक पहचान और पहनावा बदलने की बात कही थी। देवबंद से जारी एक आधिकारिक बयान में उन्होंने स्पष्ट किया कि देश में कानून का कड़ाई से पालन होना ही इस तरह की हिंसा का असली समाधान है। उन्होंने कहा कि असली दिक्कत किसी समुदाय विशेष के पहनावे में नहीं है, बल्कि समाज में फैल रही नफरत और कानून को अपने हाथ में लेने वाली हिंसक भीड़ की सोच में है। किसी भी जिम्मेदार पद पर रहे व्यक्ति द्वारा प्रभावित समुदाय को अपनी पहचान छिपाने की बात कहना न तो न्याय के सिद्धांतों के अनुकूल है और न ही लोकतांत्रिक अधिकारों के मेल में है।
उन्होंने अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए कहा कि गलत काम करने वालों पर कार्रवाई करने के स्थान पर प्रभावित लोगों से अपनी वेशभूषा बदलने की उम्मीद करना किसी भी तरह से ठीक नहीं ठहराया जा सकता। पूर्व में हुई कई हिंसक घटनाओं का संदर्भ देते हुए उन्होंने साफ किया कि इन मामलों में लोगों की पारंपरिक पोशाक हमलों की वजह नहीं थी। उन्होंने बोस्निया का उदाहरण देते हुए समझाया कि केवल अपनी बाहरी पहचान को बदल लेने से किसी भी समाज या वर्ग की सुरक्षा पक्की नहीं हो जाती। असली विचार इस बात पर होना चाहिए कि आखिर ऐसी हिंसक भीड़ को किसी भी आम नागरिक को रोकने, उसकी पहचान पूछने और उस पर हमला करने की हिम्मत कहां से मिलती है।
उनका मानना है कि यदि पूरी बहस का मुख्य बिंदु अपराधियों को छोड़कर प्रभावित व्यक्ति के पहनावे को बना दिया जाएगा, तो यह अनजाने में हिंसा की पूरी जिम्मेदारी उसी व्यक्ति पर डालने जैसा होगा जिसके साथ गलत हुआ है। देश के भीतर अमन-चैन और बेहतर कानून-व्यवस्था की बहाली तभी संभव है, जब इस तरह के मामलों में शामिल दोषियों के खिलाफ बिना किसी भेदभाव के सख्त से सख्त कानूनी कदम उठाए जाएं। इसके लिए देश की सर्वोच्च अदालत द्वारा समय-समय पर जारी किए गए दिशा-निर्देशों को पूरी गंभीरता से जमीन पर लागू करना होगा। उन्होंने समाज के सभी बुद्धिजीवियों और जिम्मेदार नागरिकों से अपील की कि वे नफरत भरे माहौल को दूर करने और देश में पूरी तरह से कानून का राज स्थापित करने में अपना सहयोग दें।
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