मिर्जापुर कलेक्ट्रेट परिसर में पुलिस की वर्दी पहनकर रौब झाड़ता दबोचा गया फर्जी सब-इंस्पेक्टर, जिला मुख्यालय पर मचा भारी हड़कंप

पुलिस प्रशासन द्वारा की गई प्रारंभिक जांच और तफ्तीश के दौरान इस फर्जी दरोगा की पहचान और उसके आपराधिक इतिहास को लेकर कई महत्वपूर्ण जानकारियां हाथ लगी हैं। पुलिस की गिरफ्त में आए इस शातिर जालसाज के तार उत्तर प्रदेश के ही प्रयागराज जिले से गहराई से

Jun 18, 2026 - 14:33
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मिर्जापुर कलेक्ट्रेट परिसर में पुलिस की वर्दी पहनकर रौब झाड़ता दबोचा गया फर्जी सब-इंस्पेक्टर, जिला मुख्यालय पर मचा भारी हड़कंप
मिर्जापुर कलेक्ट्रेट परिसर में पुलिस की वर्दी पहनकर रौब झाड़ता दबोचा गया फर्जी सब-इंस्पेक्टर, जिला मुख्यालय पर मचा भारी हड़कंप

  • दरोगा के हाव-भाव और बातचीत के लहजे पर कलेक्ट्रेट कर्मियों और स्थानीय लोगों को हुआ शक, पूछताछ के बाद असलियत आई सामने
  • प्रयागराज से जुड़े निकले शातिर जालसाज के तार, फर्जी दरोगा बनकर लोगों को ठगने और डराने के बड़े गिरोह की जांच में जुटी पुलिस

उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर जिला कलेक्ट्रेट परिसर में उस समय अचानक अफरा-तफरी और भारी हड़कंप का माहौल पैदा हो गया, जब प्रशासनिक अधिकारियों और आम जनता के बीच पुलिस की पूर्ण वर्दी धारण किए एक संदिग्ध युवक दरोगा (सब-इंस्पेक्टर) बनकर घूमता हुआ पाया गया। जिला मुख्यालय जैसे अत्यधिक संवेदनशील और सुरक्षित माने जाने वाले क्षेत्र में इस तरह एक फर्जी पुलिस अधिकारी का खुलेआम घूमना कानून-व्यवस्था और सुरक्षा इंतजामों पर बड़े सवाल खड़े करता है। कलेक्ट्रेट परिसर में रोजाना सैकड़ों लोग अपने प्रशासनिक और कानूनी कार्यों के सिलसिले में आते हैं, और ऐसे में पुलिस महकमे की साख का इस्तेमाल कर लोगों को प्रभावित करने की कोशिश की जा रही थी। इस घटना की जानकारी मिलते ही कलेक्ट्रेट में तैनात सुरक्षाकर्मियों और जिला पुलिस प्रशासन के आला अधिकारी तुरंत हरकत में आ गए और आरोपी को हिरासत में लेकर गहन पूछताछ की प्रक्रिया शुरू कर दी गई।

इस पूरे मामले की शुरुआत तब हुई जब कलेक्ट्रेट परिसर के विभिन्न काउंटरों और दफ्तरों के आस-पास यह कथित दरोगा काफी समय से चक्कर काट रहा था और वहां मौजूद आम नागरिकों पर बेवजह रौब झाड़ रहा था। उत्तर प्रदेश पुलिस की सब-इंस्पेक्टर की पूरी वर्दी, नेम प्लेट और कंधे पर चमकते सितारों को देखकर पहली नजर में किसी को भी उसकी प्रामाणिकता पर कोई संदेह नहीं हुआ। परंतु, जैसे-जैसे वह परिसर के भीतर अलग-अलग लोगों से बातचीत करने लगा, तो उसके बात करने के अजीब लहजे, असंसदीय भाषा और पुलिस मैनुअल के विपरीत आचरण ने वहां मौजूद कलेक्ट्रेट कर्मचारियों और कुछ स्थानीय प्रबुद्ध नागरिकों का ध्यान अपनी ओर खींचा। पुलिस विभाग के वास्तविक अधिकारियों की चाल-ढाल और कार्यशैली से एकदम जुदा व्यवहार दिखने पर लोगों के मन में इस कथित दरोगा को लेकर गहरा संदेह पैदा होने लगा। स्थानीय नागरिकों और कलेक्ट्रेट कर्मियों ने जब इस संदिग्ध दरोगा से उसके पोस्टिंग के थाने और बैच के बारे में सामान्य सवाल पूछना शुरू किया, तो वह पूरी तरह सकपका गया। आरोपी ने खुद को जिले के एक प्रतिष्ठित थाने का प्रभारी बताने का प्रयास किया, लेकिन जब उससे पुलिस महकमे के बुनियादी तकनीकी शब्दों और अधिकारियों के नामों के बारे में पूछा गया, तो वह लगातार अपने बयान बदलने लगा और वहां से खिसकने की फिराक में जुट गया।

संदेह के पूरी तरह यकीन में बदलते ही वहां मौजूद भीड़ और स्थानीय लोगों ने तत्परता दिखाते हुए उस फर्जी दरोगा को चारों तरफ से घेर लिया और उसे भागने का कोई मौका नहीं दिया। कलेक्ट्रेट परिसर में तैनात स्थानीय पुलिस चौकी के जवानों को इस बात की तुरंत सूचना दी गई, जिसके बाद वास्तविक पुलिसकर्मी मौके पर पहुंचे और उन्होंने संदिग्ध युवक को अपनी कस्टडी में ले लिया। पुलिस टीम जब उसे पकड़कर थाने ले गई और वहां कड़ाई से पूछताछ शुरू की गई, तो आरोपी के पास से पुलिस विभाग का कोई भी वैध पहचान पत्र, नियुक्ति पत्र या सरकारी दस्तावेज बरामद नहीं हो सका। इसके बाद आरोपी ने घुटने टेकते हुए स्वीकार किया कि वह कोई असली पुलिस अधिकारी नहीं है, बल्कि केवल लोगों को डराने-धमकाने और अनुचित लाभ कमाने के उद्देश्य से पुलिस की फर्जी वर्दी पहनकर घूम रहा था।

पुलिस प्रशासन द्वारा की गई प्रारंभिक जांच और तफ्तीश के दौरान इस फर्जी दरोगा की पहचान और उसके आपराधिक इतिहास को लेकर कई महत्वपूर्ण जानकारियां हाथ लगी हैं। पुलिस की गिरफ्त में आए इस शातिर जालसाज के तार उत्तर प्रदेश के ही प्रयागराज जिले से गहराई से जुड़े हुए पाए गए हैं, जहां का वह मूल निवासी बताया जा रहा है। जांच अधिकारी अब इस बात का पता लगाने में जुटे हैं कि आरोपी केवल अकेले ही इस तरह की धोखाधड़ी की वारदातों को अंजाम दे रहा था या फिर उसके पीछे कोई बड़ा संगठित गिरोह काम कर रहा है। प्रयागराज और मिर्जापुर के बीच उसके आवागमन के रिकॉर्ड और मोबाइल फोन की कॉल डिटेल्स को खंगाला जा रहा है ताकि यह पता लगाया जा सके कि उसने पूर्व में कितने लोगों को अपना शिकार बनाया है।

इस गंभीर घटनाक्रम को लेकर मिर्जापुर के वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने मामले की कमान खुद संभाल ली है और स्थानीय कोतवाली में आरोपी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की विभिन्न सुसंगत और गंभीर धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। पुलिस इस बात को लेकर बेहद गंभीर है कि आरोपी ने पुलिस की वर्दी और स्टार जैसे राजकीय प्रतीकों का दुरुपयोग करके सरकारी व्यवस्था को चुनौती देने का दुस्साहस किया है। कलेक्ट्रेट जैसे महत्वपूर्ण स्थान पर उसकी उपस्थिति इस बात का भी संकेत देती है कि वह शायद किसी बड़े काम को अंजाम देने या किसी प्रशासनिक पैरवी के मामले में मोटी रकम ऐंठने के चक्कर में वहां आया था, जिसकी पूरी सूची तैयार की जा रही है।

आरोपी के पास से जब्त किए गए मोबाइल फोन और अन्य सामग्रियों की फॉरेंसिक जांच भी कराई जा रही है ताकि उसके सोशल मीडिया प्रोफाइल्स और संदेशों के जरिए उसके पूरे नेटवर्क को ध्वस्त किया जा सके। मिर्जापुर पुलिस ने प्रयागराज पुलिस से भी संपर्क साधा है ताकि वहां के थानों में आरोपी के खिलाफ दर्ज पुराने मामलों या उसकी संदिग्ध गतिविधियों का पूरा ब्यौरा हासिल किया जा सके।

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