'अपनी सुरक्षा अपने घर ले जाएं, हमें इसकी कोई आवश्यकता नहीं' - सरकारी सुरक्षाकर्मियों को वापस भेजने पर अड़े पूर्व मंत्री तेज प्रताप यादव

इस पूरे राजनीतिक ड्रामे के बीच राज्य की सत्ताधारी जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू) और भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) गठबंधन सरकार ने विपक्ष के इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। सरकार के प्रशासनिक अधिकारियों और प्रवक्ताओं का कहना है कि किसी भी नेता या जनप्रतिनिधि

Jun 18, 2026 - 14:31
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'अपनी सुरक्षा अपने घर ले जाएं, हमें इसकी कोई आवश्यकता नहीं' - सरकारी सुरक्षाकर्मियों को वापस भेजने पर अड़े पूर्व मंत्री तेज प्रताप यादव
'अपनी सुरक्षा अपने घर ले जाएं, हमें इसकी कोई आवश्यकता नहीं' - सरकारी सुरक्षाकर्मियों को वापस भेजने पर अड़े पूर्व मंत्री तेज प्रताप यादव

  • बिहार की राजनीति में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर छिड़ा सियासी घमासान, लालू प्रसाद के बाद अब तेज प्रताप यादव ने नीतीश सरकार पर साधा तीखा निशाना
  • पटना में राबड़ी आवास के बाहर सुरक्षा कटौती को लेकर बढ़ा भारी तनाव, राष्ट्रीय जनता दल और जेडीयू-बीजेपी गठबंधन के बीच जुबानी जंग तेज

बिहार की सियासत में इन दिनों सुरक्षा व्यवस्था और वीआईपी नेताओं के सुरक्षा घेरे को लेकर एक नया और बेहद गंभीर राजनीतिक गतिरोध पैदा हो गया है। राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) के वरिष्ठ नेता, पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव के बड़े बेटे और सूबे के पूर्व पर्यावरण मंत्री तेज प्रताप यादव ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व वाली राज्य सरकार के खिलाफ अपना कड़ा आक्रोश व्यक्त किया है। तेज प्रताप यादव ने सरकार द्वारा उनके परिवार और उनके अपने सुरक्षा घेरे में की गई कथित कटौती पर बेहद सख्त रुख अख्तियार करते हुए सरकारी सुरक्षा को वापस लौटाने का ऐलान कर दिया है। पटना स्थित अपने आवास पर मीडिया और समर्थकों के सामने अपनी नाराजगी जाहिर करते हुए उन्होंने दोटूक शब्दों में कहा कि उन्हें इस तरह की भेदभावपूर्ण और राजनीतिक द्वेष से प्रेरित सुरक्षा की कोई आवश्यकता नहीं है और सरकार को चाहिए कि वह अपने सुरक्षाकर्मियों को वापस बुला ले।

यह पूरा विवाद तब और गहरा गया जब तेज प्रताप यादव से ठीक पहले उनके पिता और आरजेडी के राष्ट्रीय अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव ने भी राज्य सरकार की सुरक्षा नीतियों पर अपनी कड़ी आपत्ति दर्ज कराई थी। लालू प्रसाद यादव ने सरकारी सुरक्षा व्यवस्था पर असंतोष जताते हुए अपनी सुरक्षा में तैनात विशेष बलों को हटाने की बात कही थी, जिसके तुरंत बाद उनके बड़े बेटे ने मोर्चा संभाल लिया। तेज प्रताप यादव ने सरकार पर सीधा हमला बोलते हुए कहा कि विपक्ष के नेताओं को निशाना बनाने और उनका मनोबल तोड़ने के लिए सुरक्षा को एक राजनीतिक हथियार के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है। उन्होंने प्रशासनिक अमले पर आरोप लगाया कि जानबूझकर राष्ट्रीय जनता दल के शीर्ष नेतृत्व की सुरक्षा समीक्षा के नाम पर उनके अंगरक्षकों और गाड़ियों की संख्या को कम किया जा रहा है, जो उनके जीवन के साथ एक बड़ा खिलवाड़ है। पटना के 10, सर्कुलर रोड स्थित पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी के सरकारी आवास की सुरक्षा हमेशा से बिहार की राजनीति में एक बेहद संवेदनशील मुद्दा रही है। इस परिसर में लालू प्रसाद यादव, राबड़ी देवी, तेजस्वी यादव और तेज प्रताप यादव सहित परिवार के कई प्रमुख सदस्य निवास करते हैं, जिसके कारण यहां चौबीसों घंटे भारी सुरक्षा घेरा तैनात रहता है। इससे पहले भी कई बार इस आवास की सुरक्षा व्यवस्था में फेरबदल को लेकर सरकार और विपक्ष के बीच तीखी झड़पें देखने को मिली हैं।

तेज प्रताप यादव ने अपनी नाराजगी को एक कदम और आगे बढ़ाते हुए अपने सरकारी आवास और काफिले में तैनात सुरक्षाकर्मियों को वापस जाने का निर्देश दे दिया। उन्होंने साफ तौर पर कहा कि जब राज्य के पूर्व मंत्रियों और वरिष्ठ जनप्रतिनिधियों की सुरक्षा के साथ राजनीतिक आधार पर भेदभाव किया जा रहा हो, तो ऐसी स्थिति में वे खुद अपनी सुरक्षा करने में पूरी तरह सक्षम हैं। उनके इस आक्रामक तेवर के बाद पटना के वीआईपी सुरक्षा जोन में हड़कंप मच गया और गृह विभाग के अधिकारियों को स्थिति को संभालने के लिए तुरंत सक्रिय होना पड़ा। तेज प्रताप के समर्थकों ने भी इस कदम का समर्थन करते हुए सरकार के खिलाफ नारेबाजी की और इसे विपक्ष की आवाज को दबाने का एक घटिया प्रयास करार दिया।

इस पूरे राजनीतिक ड्रामे के बीच राज्य की सत्ताधारी जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू) और भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) गठबंधन सरकार ने विपक्ष के इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। सरकार के प्रशासनिक अधिकारियों और प्रवक्ताओं का कहना है कि किसी भी नेता या जनप्रतिनिधि की सुरक्षा में कटौती किसी राजनीतिक द्वेष या पूर्वाग्रह के आधार पर नहीं की जाती है। सुरक्षा का निर्धारण पूरी तरह से गृह विभाग की 'सुरक्षा समीक्षा समिति' (Security Review Committee) द्वारा खुफिया इनपुट और खतरे के आकलन (थ्रेट परसेप्शन) के आधार पर किया जाता है। प्रशासन का तर्क है कि समय-समय पर सभी श्रेणियों के नेताओं की सुरक्षा की समीक्षा करना एक सामान्य और वैधानिक प्रक्रिया है, जिसे राजनीति से जोड़कर देखना पूरी तरह से अनुचित है।

राष्ट्रीय जनता दल के कार्यकर्ताओं और नेताओं ने इस घटनाक्रम को लेकर पूरे राज्य में सरकार के खिलाफ एक बड़ा अभियान शुरू करने की चेतावनी दी है। आरजेडी के वरिष्ठ नेताओं का मानना है कि लालू परिवार की लोकप्रियता और उनके जनाधार से घबराकर सरकार इस तरह के ओछे हथकंडे अपना रही है। तेज प्रताप यादव ने अपने बयान में इस बात पर भी जोर दिया कि बिहार में कानून-व्यवस्था की स्थिति लगातार बिगड़ती जा रही है, जहां आए दिन बड़ी आपराधिक घटनाएं हो रही हैं, लेकिन सरकार का पूरा ध्यान अपराधियों को पकड़ने के बजाय विपक्ष के नेताओं की सुरक्षा छीनने पर लगा हुआ है। उन्होंने कहा कि जनता खुद उनकी असली सुरक्षा कवच है और उन्हें सरकारी तंत्र के इस दिखावे की कोई जरूरत नहीं है।

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