मॉनसून से पहले दिल्ली सरकार का बड़ा कदम- जलभराव और बाढ़ से निपटने के लिए अभूतपूर्व तैयारियां शुरू

मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने इस उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक के दौरान आधिकारिक रूप से ‘बाढ़ नियंत्रण आदेश 2026’ (Flood Control Order 2026) जारी कर दिया है। इस व्यापक नीतिगत दस्तावेज़ के तहत दिल्ली के उन सभी संवेदनशील इलाकों की सूची तैयार की गई है, जहां भारी बारिश के दौ

Jun 18, 2026 - 14:30
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मॉनसून से पहले दिल्ली सरकार का बड़ा कदम- जलभराव और बाढ़ से निपटने के लिए अभूतपूर्व तैयारियां शुरू
मॉनसून से पहले दिल्ली सरकार का बड़ा कदम- जलभराव और बाढ़ से निपटने के लिए अभूतपूर्व तैयारियां शुरू

दिल्ली में मॉनसून के आगमन से ठीक पहले शासन और प्रशासन पूरी तरह से सतर्क नज़र आ रहा है। राष्ट्रीय राजधानी में आगामी मानसूनी सीजन के दौरान बाढ़ की स्थिति को रोकने और जलभराव की गंभीर समस्या से निपटने के लिए दिल्ली सरकार ने अभी से अपनी कमर कस ली है। इसी कड़ी में मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने एक बेहद महत्वपूर्ण बैठक बुलाई, जिसमें लोक निर्माण विभाग (PWD), दिल्ली जल बोर्ड, बाढ़ एवं नियंत्रण विभाग और सभी नगर निगमों के वरिष्ठ अधिकारियों ने हिस्सा लिया। सरकार का पूरा ध्यान इस बात पर है कि पिछले वर्षों की तरह इस बार दिल्ली की जनता को जलभराव के कारण किसी भी तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े। इसके लिए सभी विभागों को आपसी समन्वय के साथ चौबीसों घंटे काम करने के निर्देश दिए गए हैं।

मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने इस उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक के दौरान आधिकारिक रूप से ‘बाढ़ नियंत्रण आदेश 2026’ (Flood Control Order 2026) जारी कर दिया है। इस व्यापक नीतिगत दस्तावेज़ के तहत दिल्ली के उन सभी संवेदनशील इलाकों की सूची तैयार की गई है, जहां भारी बारिश के दौरान पानी भरने या यमुना का जलस्तर बढ़ने पर बाढ़ का खतरा सबसे ज्यादा रहता है। सरकार ने इन सभी चिन्हित क्षेत्रों में अत्याधुनिक ड्रेनेज सिस्टम को दुरुस्त करने, गाद (सिल्ट) निकालने की प्रक्रिया को समय से पूरा करने और पानी की निकासी के लिए भारी क्षमता वाले पंपों की तैनाती करने का फैसला किया है। इस आदेश के लागू होने के साथ ही दिल्ली के सभी ड्रेनेज और बाढ़ नियंत्रण से जुड़े कंट्रोल रूम को तुरंत प्रभाव से सक्रिय कर दिया गया है।

कंट्रोल रूम की चौबीसों घंटे निगरानी

‘बाढ़ नियंत्रण आदेश 2026’ के अंतर्गत दिल्ली के सभी प्रमुख नालों और यमुना नदी के जलस्तर पर नजर रखने के लिए एक सेंट्रलाइज्ड वॉर रूम बनाया गया है। यह कंट्रोल रूम बिना रुके लगातार काम करेगा, जहां जलभराव की शिकायत मिलते ही संबंधित क्षेत्र की क्विक रिस्पांस टीम (QRT) को तुरंत मौके पर रवाना किया जाएगा।

मुख्यमंत्री ने बैठक में अधिकारियों को सख्त लहजे में चेतावनी देते हुए साफ कर दिया है कि इस बार बारिश के दौरान किसी भी प्रमुख सड़क या रिहायशी इलाके में जलभराव होने पर सीधे तौर पर जिम्मेदार प्रशासनिक अधिकारियों के खिलाफ कड़ी दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि जनता की सहूलियत से बढ़कर कुछ भी नहीं है और ड्रेनेज की सफाई में किसी भी प्रकार की कोताही या लापरवाही को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। यदि किसी इलाके में पानी जमा होने के कारण यातायात बाधित होता है या आम लोगों के घरों में पानी घुसता है, तो वहां के संबंधित नोडल अफसर और इंजीनियरों की जवाबदेही तय की जाएगी और दोषी पाए जाने पर उन्हें तत्काल प्रभाव से निलंबित भी किया जा सकता है।

सरकार की ओर से जारी नई गाइडलाइंस के मुताबिक, दिल्ली के सभी छोटे-बड़े नालों की सफाई का काम एक निश्चित समय सीमा के भीतर पूरा करने के निर्देश दिए गए हैं। इसके लिए लोक निर्माण विभाग और दिल्ली नगर निगम को संयुक्त रूप से काम करने को कहा गया है ताकि सीमाओं के विवाद के कारण काम में कोई देरी न हो। उन सभी अंडरपासों और नीची सड़कों पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है, जहां हर साल मॉनसून के दौरान मिंटो ब्रिज की तरह भारी जलभराव देखने को मिलता है। इन जगहों पर सीसीटीवी कैमरों के जरिए लाइव मॉनिटरिंग की जाएगी ताकि पानी का स्तर बढ़ते ही यातायात को समय रहते डाइवर्ट किया जा सके और किसी भी अप्रिय घटना को रोका जा सके।

यमुना नदी के तटीय इलाकों और निचले मैदानी भागों (फ्लडप्लेन) में रहने वाले लोगों की सुरक्षा के लिए भी सरकार ने एक विस्तृत कार्ययोजना तैयार की है। यदि पहाड़ी इलाकों में भारी बारिश के कारण हथनीकुंड बैराज से पानी छोड़ा जाता है और यमुना का जलस्तर खतरे के निशान को पार करता है, तो निचले इलाकों से लोगों को सुरक्षित निकालने के लिए नौकाओं और गोताखोरों की व्यवस्था अभी से पूरी कर ली गई है। इसके साथ ही विस्थापित होने वाले नागरिकों के लिए राहत शिविरों, टेंटों, साफ पेयजल और चिकित्सा सुविधाओं का खाका भी तैयार कर लिया गया है ताकि आपातकालीन स्थिति में तुरंत राहत पहुंचाई जा सके।

प्रशासनिक तैयारियों को और मजबूत करने के लिए मुख्यमंत्री ने सभी जिला मजिस्ट्रेटों (DM) को अपने-अपने क्षेत्रों में औचक निरीक्षण करने के आदेश दिए हैं। अधिकारी केवल फाइलों पर काम न दिखाकर जमीनी स्तर पर जाकर नालों की सफाई की वास्तविक स्थिति की जांच करेंगे। इसके अतिरिक्त, स्थानीय निवासियों को भी इस अभियान से जोड़ने के लिए एक विशेष हेल्पलाइन नंबर और मोबाइल ऐप जारी करने की योजना है, जिसके माध्यम से आम नागरिक अपने आस-पास के नालों में जमा कचरे या जलभराव की लाइव तस्वीरें सीधे सरकार के वॉर रूम तक भेज सकेंगे, जिस पर तुरंत एक्शन लिया जाएगा।

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