Shravasti: CMO श्रावस्ती के ऑफिस के ठीक पीछे कूड़े का ढेर बना आयरन टैबलेट का गोदाम, वीडियो वायरल, मचा हड़कंप।

सीएमओ श्रावस्ती डॉ. अशोक कुमार सिंह के कार्यालय के ठीक पीछे कूड़े के ढेर में सरकारी आयरन की गोलियों की भारी मात्रा मिलने से

Dec 4, 2025 - 19:58
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Shravasti: CMO श्रावस्ती के ऑफिस के ठीक पीछे कूड़े का ढेर बना आयरन टैबलेट का गोदाम, वीडियो वायरल, मचा हड़कंप।
CMO श्रावस्ती के ऑफिस के ठीक पीछे कूड़े का ढेर बना आयरन टैबलेट का गोदाम, वीडियो वायरल, मचा हड़कंप।

श्रावस्ती। सीएमओ श्रावस्ती डॉ. अशोक कुमार सिंह के कार्यालय के ठीक पीछे कूड़े के ढेर में सरकारी आयरन की गोलियों की भारी मात्रा मिलने से स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मच गया है। जहां एक तरफ एनीमिया से पीड़ित महिलाओं को दवाएं न मिलने की लगातार शिकायतें उठती रही हैं, वहीं दूसरी तरफ सरकारी दवाओं का इस तरह फेंका जाना विभागीय लापरवाही की पोल खोलता है।

स्थानीय लोगों द्वारा बनाए गए वीडियो के सोशल मीडिया पर वायरल होते ही पूरा मामला गरम हो गया। वीडियो में दिखाई दे रही दवाओं की बड़ी खेप ने दवा वितरण प्रणाली की पारदर्शिता, निगरानी और जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। लोगों का कहना है कि जब स्वास्थ्य केंद्रों पर दवाएं कम पड़ रही हैं, तब इतनी बड़ी मात्रा में गोलियां कूड़े में कैसे मिलीं?

जवाबदेही का बड़ा सवाल
लाभार्थियों तक दवाएं पहुंचाने में जिम्मेदार कौन था?
इतनी बड़ी अनियमितता कैसे हुई?
क्या दवा वितरण में घोर लापरवाही थी या फिर किसी स्तर पर इन्हें जानबूझकर फेंका गया?

इन सवालों पर विभागीय चुप्पी लोगों के संदेह को और बढ़ा रही है।

सीएमओ का बयान विवाद बढ़ा गया
मामले के तूल पकड़ने के बाद सीएमओ श्रावस्ती डॉ. अशोक कुमार सिंह ने सफाई देते हुए कहा कि “दवाओं की सप्लाई उनके कार्यालय से नहीं होती।” लेकिन इस बयान ने विवाद शांत करने के बजाय जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ने का आरोप और तेज कर दिया।
लोगों का कहना है कि अगर सप्लाई उनके कार्यालय से नहीं होती, तो फिर निगरानी कौन कर रहा है? और यह अनियमितता किस स्तर पर हुई?

जिले में स्वास्थ्य व्यवस्था पर फिर उठे सवाल
यह घटना श्रावस्ती स्वास्थ्य विभाग में पहले से उठ रहे सवालों को और गहरा करती है। क्या दवा वितरण में भ्रष्टाचार है?
क्या स्टॉक रजिस्टर में हेरफेर हो रहा है?
और आखिर विभागीय निगरानी तंत्र इतनी बड़ी लापरवाही से अनजान कैसे रहा?

फिलहाल मामले की जांच की मांग तेज हो गई है और जिले में स्वास्थ्य सेवाओं की विश्वसनीयता पर फिर गंभीर प्रश्नचिन्ह लग गया है।

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