पाकिस्तान में 9 शेर और 2 जिराफ को दया मृत्यु, लाइलाज बीमारियों के कारण लिया गया फैसला।
पाकिस्तान के पंजाब प्रांत में 9 शेरों और 2 जिराफों को दया मृत्यु दी गई है। यह फैसला लाइलाज वंशानुगत बीमारियों और अपरिवर्तनीय स्थितियों
- पंजाब के चिड़ियाघरों में 11 जानवरों की दया मृत्यु, वंशानुगत रोगों से पीड़ित थे शेर-जिराफ
- लाहौर सफारी पार्क में 9 शेर 2 जिराफ euthanized, अपरिवर्तनीय स्थिति में दर्द से मुक्ति दी गई
पाकिस्तान के पंजाब प्रांत में 9 शेरों और 2 जिराफों को दया मृत्यु दी गई है। यह फैसला लाइलाज वंशानुगत बीमारियों और अपरिवर्तनीय स्थितियों के कारण लिया गया, ताकि जानवरों को लंबे समय तक दर्द और पीड़ा से बचाया जा सके। यह कार्रवाई लाहौर सफारी पार्क और स्थानीय चिड़ियाघरों में रहने वाले इन जानवरों पर लागू की गई। पशु चिकित्सकों और वन्यजीव अधिकारियों ने जांच के बाद यह निर्णय लिया कि कोई प्रभावी उपचार संभव नहीं है। पाकिस्तान के पंजाब प्रांत की सरकार ने 12 फरवरी को एक बयान जारी किया जिसमें बताया गया कि कुल 9 शेरों और 2 जिराफों को दया मृत्यु दी गई है। ये जानवर लाहौर सफारी पार्क और प्रांत के अन्य चिड़ियाघरों में रखे गए थे। दया मृत्यु का कारण इन जानवरों में पाई गई लाइलाज वंशानुगत बीमारियां और ऐसी अपरिवर्तनीय स्थितियां थीं जिनके लिए कोई प्रभावी इलाज उपलब्ध नहीं था।
पंजाब के वन्यजीव एवं उद्यान मंत्री ने स्पष्ट किया कि कुछ शेरों में वंशानुगत रोग थे जो असाध्य थे। इनमें से कुछ शेर अपरिवर्तनीय स्थितियों से गुजर रहे थे जहां उपचार संभव नहीं था। जिराफों के मामले में भी समान कारण थे। यह फैसला पशु कल्याण कानूनों के तहत लिया गया जो जानवरों को अनावश्यक पीड़ा से बचाने पर जोर देते हैं। दया मृत्यु एक मानक प्रक्रिया है जब जानवर की स्थिति ऐसी हो कि वह ठीक होने की संभावना न रखता हो और दर्द में जी रहा हो।
ये जानवर लंबे समय से इन सुविधाओं में थे और उनकी स्वास्थ्य जांच नियमित रूप से होती रही। जब पशु चिकित्सकों ने पुष्टि की कि रोग लाइलाज हैं और स्थिति अपूरणीय है तो दया मृत्यु का विकल्प चुना गया। यह कदम जानवरों को आगे की पीड़ा से मुक्त करने के लिए उठाया गया। प्रक्रिया में पशु चिकित्सक टीम शामिल थी जो humane तरीके से euthanasia करती है।
पंजाब प्रांत में चिड़ियाघर और सफारी पार्क जानवरों की देखभाल के लिए जिम्मेदार हैं। लाहौर सफारी पार्क एक प्रमुख स्थान है जहां विभिन्न प्रजातियों के जानवर रखे जाते हैं। इनमें शेर और जिराफ शामिल हैं। इन जानवरों की संख्या और स्वास्थ्य पर नजर रखी जाती है। जब कोई जानवर गंभीर बीमारी से ग्रस्त होता है तो विशेषज्ञों की सलाह ली जाती है। इस मामले में कई जानवरों की एक साथ स्थिति खराब होने पर सामूहिक निर्णय लिया गया।
दया मृत्यु की प्रक्रिया में इंजेक्शन या अन्य humane विधियों का उपयोग किया जाता है ताकि जानवर को दर्द न हो। यह फैसला वन्यजीव संरक्षण और पशु कल्याण दोनों को ध्यान में रखकर लिया गया। सरकार के बयान में कहा गया कि यह कदम जानवरों के कल्याण के लिए आवश्यक था। कोई अन्य विकल्प जैसे इलाज या स्थानांतरण संभव नहीं था क्योंकि स्थितियां अपरिवर्तनीय थीं।
यह घटना हाल की है और फरवरी 2026 में सामने आई। पंजाब सरकार ने इस पर विस्तृत जानकारी दी कि कुल 11 जानवर प्रभावित थे। 9 शेर विभिन्न उम्र के थे और 2 जिराफ भी। सभी में या तो hereditary diseases थे या irreversible conditions। मंत्री ने कहा कि कुछ शेरों में hereditary diseases असाध्य थे जबकि अन्य में irreversible conditions थीं जिनका कोई इलाज नहीं था।
वन्यजीव विभाग ने इन जानवरों की जांच की और रिपोर्ट तैयार की। रिपोर्ट में पुष्टि हुई कि दया मृत्यु ही एकमात्र विकल्प बचा है। यह प्रक्रिया कानूनी रूप से मान्य है और पशु कल्याण नियमों के अनुरूप है। जानवरों को लंबे समय तक दर्द सहने से बचाने के लिए यह कदम उठाया गया।
लाहौर सफारी पार्क में शेरों की देखभाल के लिए विशेष enclosures हैं। जिराफों के लिए भी ऊंचे क्षेत्र और भोजन की व्यवस्था है। लेकिन जब स्वास्थ्य बिगड़ता है तो प्राथमिकता कल्याण की होती है। इस मामले में सभी जानवरों की स्थिति ऐसी थी कि वे सामान्य जीवन नहीं जी पा रहे थे। दया मृत्यु से उन्हें मुक्ति मिली। पंजाब में ऐसे फैसले पहले भी लिए जाते रहे हैं जब जानवर गंभीर रूप से बीमार होते हैं। यह पहली बार नहीं है लेकिन संख्या अधिक होने से ध्यान आकर्षित हुआ। सरकार ने कहा कि यह निर्णय विशेषज्ञों की सलाह पर आधारित है। कोई व्यक्तिगत कारण नहीं था बल्कि पूरी तरह स्वास्थ्य आधारित था।
What's Your Reaction?











