Sitapur: परिषदीय विद्यालयों में भारी फर्जीवाड़ा: 28 फर्जी शिक्षक बर्खास्त, 11 और संदिग्ध – शिक्षा व्यवस्था पर गहरा संकट।
परिषदीय विद्यालयों में 12,460 शिक्षक भर्ती के नाम पर हुए फर्जीवाड़े ने शिक्षा व्यवस्था की जड़ों को हिला कर रख दिया है। मामला
सीतापुर। परिषदीय विद्यालयों में 12,460 शिक्षक भर्ती के नाम पर हुए फर्जीवाड़े ने शिक्षा व्यवस्था की जड़ों को हिला कर रख दिया है। मामला अब केवल कुछ शिक्षकों की बर्खास्तगी तक सीमित नहीं रहा, बल्कि पूरी भर्ती प्रक्रिया की निष्पक्षता और पारदर्शिता पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े हो गए हैं। जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ रही है, वैसे-वैसे परतें खुलती जा रही हैं और सिस्टम की बड़ी चूकें उजागर हो रही हैं। जिले में अब तक 28 शिक्षक फर्जी पाए जा चुके हैं, जिन्हें सेवा से बाहर का रास्ता दिखाया जा चुका है, जबकि 11 और शिक्षकों के अभिलेख प्रारंभिक जांच में ही संदिग्ध मिले हैं। इनका अंतिम सत्यापन संबंधित विश्वविद्यालयों से होना बाकी है, जिसकी रिपोर्ट एक सप्ताह के भीतर आने की संभावना जताई जा रही है। सूत्र बताते हैं कि जांच की भनक लगते ही संदिग्ध शिक्षकों में हड़कंप मच गया। स्थिति यह है कि ये शिक्षक पिछले एक सप्ताह से बिना किसी सूचना के विद्यालयों से नदारद हैं। वर्ष 2025 में इस भर्ती प्रक्रिया के तहत जनपद में करीब 1100 शिक्षकों की नियुक्ति हुई थी। अब तक लगभग 800 अभिलेखों का सत्यापन हो चुका है, जिनमें 28 शिक्षक फर्जी पाए गए। किसी का टीईटी प्रमाणपत्र जाली निकला तो किसी के इंटरमीडिएट और स्नातक स्तर के शैक्षिक दस्तावेज फर्जी साबित हुए। विश्वविद्यालय से पुष्टि मिलते ही विभाग ने इन सभी को तत्काल बर्खास्त कर दिया।
वहीं अब दूसरे चरण में शेष शिक्षकों के अभिलेख सत्यापन के लिए भेजे गए हैं। इनमें 11 शिक्षकों के दस्तावेजों को खुद बेसिक शिक्षा विभाग ने संदिग्ध माना है। अधिकारियों का दावा है कि ये प्रकरण लगभग शत-प्रतिशत फर्जी प्रतीत हो रहे हैं। चौंकाने वाली बात यह है कि ये शिक्षक बीते एक वर्ष से नियमित वेतन भी उठा रहे थे। जांच की भनक लगते ही इन्होंने विद्यालय आना छोड़ दिया और सभी फिलहाल गैरहाजिर चल रहे हैं। इस पूरे प्रकरण ने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जानकारों का कहना है कि यदि इतने बड़े पैमाने पर फर्जीवाड़ा हुआ है तो नियुक्ति से पहले कागजी कार्रवाई और अभिलेखों की जांच कैसे की गई? क्या यह केवल लापरवाही का मामला है या फिर इसके पीछे कोई संगठित साठगांठ काम कर रही थी? यदि दस्तावेज इतने आसानी से पार हो गए तो जिम्मेदारी केवल फर्जी शिक्षकों की ही नहीं बनती, बल्कि चयन प्रक्रिया से जुड़े अधिकारियों पर भी सवालिया निशान लगना स्वाभाविक है। फ़िलहाल अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि क्या जांच की आंच ऊपर तक पहुंचेगी या मामला केवल निचले स्तर पर कार्रवाई कर रफा-दफा कर दिया जाएगा।
फर्जी शिक्षक मामले में अब प्रशासन का रुख और सख्त हो गया है। बीएसए अखिलेश प्रताप सिंह ने स्पष्ट किया है कि विश्वविद्यालयों से सत्यापन रिपोर्ट मिलते ही न सिर्फ बर्खास्तगी की कार्रवाई की जा रही है, बल्कि एफआईआर दर्ज कराकर वेतन की रिकवरी भी सुनिश्चित की जाएगी। दोषियों को किसी भी हाल में बख्शा नहीं जाएगा।
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