Sitapur : बिसवां में हसरत मोहानी की याद में गोष्ठी, सोशल मीडिया पर भाईचारा बनाए रखने और आतंकवाद के विरोध की अपील
मुख्य अतिथि रहबर प्रतापगढ़ी ने कहा कि मौलाना हसरत मोहानी ने अपनी शायरी और पत्रकारिता से देश को आजादी दिलाने में बड़ी भूमिका निभाई। उनका दिया हुआ नारा “इंकलाब जिंदाबाद” आज भी युवाओं को अन्याय के खिलाफ लड़ने की ताकत देता है। आज के युवाओं
Report : संदीप चौरसिया INA NEWS सीतापुर
सीतापुर जिले के बिसवां कस्बे में स्थित सेठ जय दयाल इंटर कॉलेज में उत्तर प्रदेश श्रमजीवी पत्रकार यूनियन के तत्वावधान में एक गोष्ठी का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम महान स्वतंत्रता संग्राम सेनानी, कवि और पत्रकार मौलाना हसरत मोहानी की याद में आयोजित हुआ, जिसका मुख्य उद्देश्य आतंकवाद का विरोध करना, राष्ट्रीय एकता को मजबूत बनाना और सोशल मीडिया पर आपसी भाईचारा व सौहार्द बढ़ाना था। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में स्वामी विवेकानंद इंटर कॉलेज के प्रधानाचार्य व शायर रहबर प्रतापगढ़ी मौजूद रहे। विशिष्ट अतिथि के तौर पर वरिष्ठ पत्रकार पदम कांत शर्मा ‘प्रभात’ और वरिष्ठ अधिवक्ता आरएन सिंह शामिल हुए। गोष्ठी की अध्यक्षता शायर डॉ. सईदुल हसन ने की और संचालन शिक्षक व कवि आनंद खत्री ने किया।
मुख्य अतिथि रहबर प्रतापगढ़ी ने कहा कि मौलाना हसरत मोहानी ने अपनी शायरी और पत्रकारिता से देश को आजादी दिलाने में बड़ी भूमिका निभाई। उनका दिया हुआ नारा “इंकलाब जिंदाबाद” आज भी युवाओं को अन्याय के खिलाफ लड़ने की ताकत देता है। आज के युवाओं को उनकी देशभक्ति और लेखन शैली से प्रेरणा लेनी चाहिए। मुख्य वक्ता पदम कांत शर्मा ‘प्रभात’ ने कहा कि आज के समय में सोशल मीडिया युवाओं को गलत रास्ते पर ले जाने और देश विरोधी गतिविधियों में फंसाने का काम कर रहा है, इसलिए सभी को सावधान रहने की जरूरत है। समाज में शांति और एकता के लिए ऐसी गोष्ठियां लगातार होनी चाहिए।
विद्वान फारुख रशीद फारुकी ने कहा कि हसरत मोहानी ने उर्दू पत्रकारिता को नई दिशा दी। डॉ. सईदुल हसन ने कहा कि उनके विचारों ने देश में क्रांति की भावना पैदा की। आर्य समाज के मंत्री अजीत आर्य और अधिवक्ता आरएन सिंह ने कहा कि सोशल मीडिया पर फैल रही गलत जानकारियों से समाज को बचाने के लिए हसरत मोहानी जैसे क्रांतिकारियों के विचारों की बहुत जरूरत है। मौलाना एखलाक कासमी ने उनके जीवन के बारे में बताया।
आयोजक और संगठन के जिला अध्यक्ष सिराज अहमद ने सभी का आभार व्यक्त किया और बच्चों को उनके बताए रास्ते पर चलाने की अपील की। कार्यक्रम की शुरुआत कवियों और शायरों की प्रस्तुतियों से हुई, जिसमें डॉ. कफील बिसवानी, अनवर बिसवानी, शमीम नातिक, हाफिज आफाक बिसवानी, सलीम कुरैशी, डॉ. शकील सागर, जुबेर वारिस और मकसूद अली ने अपनी रचनाएं पढ़ीं। इस मौके पर पत्रकारों, लेखकों, शिक्षकों और वकीलों को अंगवस्त्र व स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया गया तथा यूनियन के सदस्यों को परिचय पत्र बांटे गए। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में स्थानीय लोग उपस्थित रहे।
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