Hardoi : राशन दुकान की जांच करने गए SDM पर ग्रामीणों का पथराव, सिर में आई गंभीर चोट, हमला कर आरोपी को छुड़ाने का प्रयास
प्रशासनिक टीम ने जब मौके पर जाकर देखा तो अन्नपूर्णा राशन दुकान परिसर के भीतर नियम विरुद्ध तरीके से काम होता पाया गया। परिसर के दो हिस्सों में से एक दुकान के भीतर तो राशन का सामान्य काम हो रहा था, जबकि दूसरे हिस्से में अवैध रूप से परचून (किराना) की निजी दुकान का सं
- सरकारी गाड़ी पर लाठी-डंडों से हमला कर आरोपी को छुड़ाने का प्रयास, इलाके में भारी पुलिस बल तैनात
- हरदोई के शाहाबाद में प्रशासनिक कार्रवाई के दौरान बवाल, मुख्य आरोपी समेत अन्य हमलावरों पर मुकदमा दर्ज
उत्तर प्रदेश के हरदोई जनपद अंतर्गत शाहाबाद तहसील क्षेत्र में प्रशासनिक जांच के दौरान एक बेहद गंभीर और हैरान करने वाला मामला सामने आया है। शाहाबाद के उप जिलाधिकारी सुशील कुमार मिश्र क्षेत्र में बाढ़ चौकियों का औचक निरीक्षण करने के बाद वापस लौट रहे थे। इसी दौरान रास्ते में ग्राम परियल के समीप बनी सरकारी अन्नपूर्णा राशन दुकान की अव्यवस्थाओं को देखकर जब उन्होंने आपत्ति जताई, तो वहां मौजूद कुछ लोगों ने शासकीय कार्य में न केवल बाधा डाली बल्कि प्रशासनिक टीम के साथ बेहद अभद्र व्यवहार भी किया। देखते ही देखते यह पूरा विवाद एक बड़े हिंसक टकराव में बदल गया, जिसने क्षेत्र की कानून व्यवस्था को चुनौती दे डाली।
शाहाबाद तहसील क्षेत्र का एक बड़ा हिस्सा नदी के तटीय इलाकों से सटा हुआ है, जिसके चलते प्रशासन मानसून और संभावित बाढ़ की तैयारियों को लेकर लगातार सतर्कता बरत रहा है। इसी सिलसिले में उप जिलाधिकारी सुशील कुमार मिश्र अपनी सरकारी टीम के साथ परियल गांव के निकट स्थापित की गई बाढ़ चौकी की जमीनी हकीकत और तैयारियों का जायजा लेने पहुंचे थे। बाढ़ चौकी का निरीक्षण पूरा करने के बाद जब वे अपनी सरकारी गाड़ी से वापस मुख्यालय की ओर लौट रहे थे, तभी उनकी नजर गांव के पास बनी सरकारी अन्नपूर्णा राशन की दुकान पर पड़ी। इस दुकान के संचालन और उपयोग को लेकर चल रही गड़बड़ियों को देखकर उन्होंने अपनी गाड़ी रुकवाई और जांच शुरू कर दी।
जांच में खुली पोल- सरकारी दुकान में प्राइवेट धंधा
निरीक्षण के दौरान सबसे बड़ी गड़बड़ी यह सामने आई कि जिस अन्नपूर्णा भवन को गरीबों को राशन बांटने के लिए सरकारी खर्च पर बनाया गया था, उसके एक हिस्से का पूरी तरह से निजीकरण कर दिया गया था। सरकारी नियमों को ताक पर रखकर वहां परचून की दुकान चलाई जा रही थी, जो सीधे तौर पर नियमों का उल्लंघन है।
प्रशासनिक टीम ने जब मौके पर जाकर देखा तो अन्नपूर्णा राशन दुकान परिसर के भीतर नियम विरुद्ध तरीके से काम होता पाया गया। परिसर के दो हिस्सों में से एक दुकान के भीतर तो राशन का सामान्य काम हो रहा था, जबकि दूसरे हिस्से में अवैध रूप से परचून (किराना) की निजी दुकान का संचालन धड़ल्ले से किया जा रहा था। सरकारी भवन के इस तरह के व्यावसायिक और निजी इस्तेमाल को देखकर उप जिलाधिकारी ने कड़ी आपत्ति जताई। उन्होंने जब इस संबंध में वहां मौजूद उदयवीर नामक व्यक्ति से पूछताछ की और सरकारी संपत्ति के गलत इस्तेमाल पर जवाब मांगा, तो आरोपी भड़क गया। उदयवीर ने अपनी गलती मानने के बजाय प्रशासनिक अधिकारी के साथ बेहद बदतमीजी, गाली-गलौज और अभद्रता करना शुरू कर दिया।
आरोपी के इस अड़ियल और हिंसक रवैये को देखते हुए उप जिलाधिकारी सुशील कुमार मिश्र ने तत्काल सुरक्षाकर्मियों को निर्देश देकर उदयवीर को हिरासत में लेने और गाड़ी में बैठककर थाने ले जाने के लिए कहा। जैसे ही प्रशासनिक टीम आरोपी उदयवीर को अपने साथ गाड़ी में बैठाकर गांव से बाहर निकलने लगी, वैसे ही आरोपी ने चालाकी से अपने मोबाइल फोन के जरिए स्थानीय ग्रामीणों और अपने सहयोगियों को पूरी बात बताकर मौके पर इकट्ठा होने के लिए बुला लिया। आरोपी की सूचना मिलते ही गांव के दर्जनों लोग लाठी, डंडे, बांस और पत्थर लेकर मुख्य रास्ते पर जमा हो गए और उन्होंने प्रशासनिक काफिले को घेरने की पूरी रणनीति तैयार कर ली।
प्रशासनिक सुरक्षा पर बड़ा हमला
सरकारी अमले और तहसील के सर्वोच्च अधिकारियों पर इस तरह का हिंसक हमला सीधे तौर पर कानून व्यवस्था को ठेंगा दिखाने जैसा है। राशन दुकान की जांच जैसी सामान्य प्रशासनिक प्रक्रिया का इस तरह खूनी संघर्ष में बदलना क्षेत्र में पनप रहे दुस्साहस को दर्शाता है।
जैसे ही उप जिलाधिकारी की सरकारी गाड़ी परियल गांव की सीमा से थोड़ा आगे बढ़ी, पहले से घात लगाकर बैठे उग्र ग्रामीणों ने पूरी गाड़ी को चारों तरफ से घेर लिया। हमलावरों ने आव देखा न ताव और सरकारी वाहन पर बांस के डंडों तथा भारी पत्थरों से ताबड़तोड़ हमला बोल दिया। इस अचानक हुए पथराव में गाड़ी के शीशे टूट गए और एक बड़ा पत्थर सीधे उप जिलाधिकारी सुशील कुमार मिश्र के सिर पर जा लगा, जिससे वे लहूलुहान हो गए। ग्रामीणों के इस उग्र और हिंसक रूप को देखकर मौके पर अफरा-तफरी मच गई और सुरक्षाकर्मियों ने किसी तरह सूझबूझ दिखाकर अधिकारी को भीड़ के चंगुल से बाहर निकाला और सुरक्षित स्थान पर ले गए।
लहूलुहान हालत में उप जिलाधिकारी को तुरंत नजदीकी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) शाहाबाद ले जाया गया, जहां डॉक्टरों की टीम ने उन्हें प्राथमिक उपचार दिया। सिर की चोट गंभीर होने और बेहतर जांच की आवश्यकता को देखते हुए डॉक्टरों ने उन्हें प्राथमिक इलाज के बाद तुरंत जिला अस्पताल हरदोई के लिए रेफर कर दिया। जिला अस्पताल के डॉक्टरों ने उनके घाव की पट्टी की और आवश्यक चिकित्सीय परीक्षण किए। गनीमत रही कि चोट जानलेवा नहीं थी, जिसके बाद प्राथमिक उपचार पूरा होने पर उन्हें अस्पताल से छुट्टी दे दी गई। वर्तमान में उनकी स्थिति पूरी तरह स्थिर है और वे अपने आवास पर स्वास्थ्य लाभ ले रहे हैं।
कड़ी कानूनी कार्रवाई की तैयारी
इस हमले के बाद जिला प्रशासन और पुलिस बेहद सख्त रुख अपना रहे हैं। सरकारी काम में रुकावट डालने, जानलेवा हमला करने और बलवा करने के आरोप में नामजद और अज्ञात लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है। पुलिस गांव में लगे सीसीटीवी और वीडियो फुटेज के आधार पर अन्य हमलावरों की पहचान करने में जुटी है।
इस सनसनीखेज वारदात की सूचना मिलते ही हरदोई के जिलाधिकारी अनुनय झा और पुलिस प्रशासन के आला अधिकारी भारी पुलिस बल के साथ तत्काल सक्रिय हो गए। जिलाधिकारी अनुनय झा ने पूरे मामले की पुष्टि करते हुए सख्त लहजे में कहा कि राजकीय कार्य में बाधा डालने, लोकसेवक पर जानलेवा हमला करने और सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने वाले किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा। पुलिस ने इस मामले में तत्परता दिखाते हुए सुसंगत और कड़ी धाराओं के तहत अभियोग पंजीकृत कर लिया है। परियल गांव और उसके आसपास के इलाकों में शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए पर्याप्त संख्या में पुलिस बल तैनात कर दिया गया है और आरोपियों की धरपकड़ के लिए लगातार दबिश दी जा रही है।
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