'दिल्ली में तो सब कुछ चलता है' की मानसिकता ने ली 21 निर्दोष लोगों की जान, दमकल विभाग से बिना किसी NOC के धड़ल्ले से चल रहा था मौत का कारोबार।

राजधानी दिल्ली के मालवीय नगर इलाके में स्थित एक अवैध होटलनुमा इमारत में भड़की भीषण आग की घटना ने देश और

Jun 4, 2026 - 12:36
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'दिल्ली में तो सब कुछ चलता है' की मानसिकता ने ली 21 निर्दोष लोगों की जान, दमकल विभाग से बिना किसी NOC के धड़ल्ले से चल रहा था मौत का कारोबार।
'दिल्ली में तो सब कुछ चलता है' की मानसिकता ने ली 21 निर्दोष लोगों की जान, दमकल विभाग से बिना किसी NOC के धड़ल्ले से चल रहा था मौत का कारोबार।
  • मालवीय नगर अग्निकांड के मुख्य आरोपी लवकेश बजाज का दिल्ली पुलिस के सामने चौंकाने वाला कबूलनामा, कहा- कमाई के लालच में बनाए थे वैध सीमा से चार गुना अधिक कमरे।
  • हादसा होते ही डर के मारे मौके से फरार हो गया था आरोपी होटल संचालक, रात भर सड़कों पर भटकने के बाद दबोचा गया; पुलिस आज कोर्ट से मांगेगी रिमांड।

राजधानी दिल्ली के मालवीय नगर इलाके में स्थित एक अवैध होटलनुमा इमारत में भड़की भीषण आग की घटना ने देश और दुनिया को झकझोर कर रख दिया है। इस भयानक त्रासदी में 17 विदेशी नागरिकों सहित कुल 21 लोगों की दर्दनाक मौत हो गई, जिसके बाद से दिल्ली प्रशासन और कानून व्यवस्था पूरी तरह से सख्त रुख अपनाए हुए है। इस हादसे के बाद पूरी दिल्ली में अवैध रूप से चल रहे होटलों, गेस्ट हाउसों और लॉज के खिलाफ एक व्यापक और कड़ा प्रशासनिक अभियान शुरू कर दिया गया है। सरकार और जांच एजेंसियों के इस आक्रामक और एक्शन मोड को देखते हुए पूरी दिल्ली के अवैध होटल कारोबारियों में भारी हड़कंप मच गया है। अपनी संपत्तियों के सील होने और कानूनी कार्रवाई के डर से सैकड़ों अवैध होटलों और गेस्ट हाउसों के मालिकों ने खुद ही अपने प्रतिष्ठानों के शटर गिराने और उन्हें अस्थाई रूप से बंद करना शुरू कर दिया है ताकि वे प्रशासन की सीधी नजरों से बच सकें।

इस बीच, दिल्ली पुलिस की अपराध शाखा और स्थानीय पुलिस की संयुक्त टीम द्वारा इस पूरे अग्निकांड के मुख्य आरोपी और होटल संचालक लवकेश बजाज से की जा रही कस्टोडियल पूछताछ में बेहद चौंकाने वाले और विचलित कर देने वाले सच सामने आ रहे हैं। पुलिस की गहन पूछताछ के दौरान आरोपी लवकेश बजाज ने अपना अपराध पूरी तरह से स्वीकार कर लिया है। उसने बेहद गैर-जिम्मेदाराना अंदाज में कबूल किया है कि उसने केवल और केवल अत्यधिक वित्तीय मुनाफे और लालच के चक्कर में आकर होटल के भीतर कमरों की संख्या को अनाधिकृत रूप से बढ़ाया था। आरोपी ने बताया कि इस इलाके में विदेशी मरीजों और पर्यटकों की भारी आमद रहती है, जिससे कमरों की मांग हमेशा बनी रहती थी। इसी बंपर कमाई को देखते हुए उसने स्वीकृत नीति का उल्लंघन किया और कंक्रीट तथा प्लाईवुड के अवैध पार्टीशन खड़े करके एक छोटे से ढांचे में 26 कमरे ठूंस दिए।

पूछताछ के दौरान लवकेश बजाज की घोर लापरवाही और लचर कानून व्यवस्था का फायदा उठाने की बीमार मानसिकता भी पूरी तरह से सामने आ गई है। जब पुलिस अधिकारियों ने उससे पूछा कि क्या उसे इतने बड़े पैमाने पर अवैध निर्माण करने और सुरक्षा मानकों को ताक पर रखने से पहले कानून का डर नहीं लगा, तो उसने बताया कि उसे लगता था कि दिल्ली जैसे महानगर में इस तरह की चीजें बेहद आम हैं और 'यहां सब कुछ चलता है'। उसकी इसी खतरनाक और लापरवाह सोच ने अंततः 21 बेकसूर इंसानों को एक बंद गैस चैंबर में तब्दील हो चुकी इमारत के भीतर तड़प-तड़प कर मरने के लिए छोड़ दिया। आरोपी ने यह भी स्पष्ट किया कि प्रशासनिक अधिकारियों के ढीले रवैये और नियमित जांच न होने के कारण उसका हौसला हमेशा बढ़ता चला गया और वह लगातार नियमों को तोड़ता रहा।

बिना NOC के चल रहा था अवैध धंधा

दिल्ली पुलिस के शीर्ष अधिकारियों के अनुसार, आरोपी लवकेश बजाज ने यह बेहद चौंकाने वाला खुलासा किया है कि उसने इस पांच मंजिला कमर्शियल इमारत को संचालित करने के लिए दिल्ली फायर सर्विस (दमकल विभाग) से किसी भी प्रकार का अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) या सुरक्षा मंजूरी प्रमाण पत्र हासिल ही नहीं किया था। इमारत में आपातकालीन निकास की कोई व्यवस्था नहीं थी और न ही वहां कोई वेंटिलेशन शाफ्ट मौजूद था, जिसकी वजह से आग लगने के तुरंत बाद पूरी बिल्डिंग के भीतर दम घोंटू धुआं भर गया।

इस संवेदनशील मामले की कानूनी विधिक प्रक्रिया को आगे बढ़ाते हुए दिल्ली पुलिस की टीम आज दोपहर बाद आरोपी लवकेश बजाज को कड़े सुरक्षा घेरे के बीच स्थानीय अदालत के समक्ष पेश करने जा रही है। जांच अधिकारी अदालत से आरोपी की कम से कम सात दिनों की पुलिस कस्टडी रिमांड की मांग करेंगे। पुलिस का तर्क है कि इस पूरे अवैध रैकेट के पीछे छिपे अन्य किरदारों, बेनामी पार्टनर और उन भ्रष्ट सरकारी कर्मचारियों की पहचान करना बेहद जरूरी है, जिन्होंने समय-समय पर घूस लेकर इस अवैध डेथ ट्रैप को फलने-फूलने की पूरी छूट दे रखी थी। कस्टडी रिमांड के दौरान पुलिस आरोपी के वित्तीय खातों, बैंक ट्रांजैक्शन और संपत्ति के मूल दस्तावेजों को भी अपने कब्जे में लेगी ताकि इस मामले में गैर-इरादतन हत्या के साथ-साथ धोखाधड़ी और आपराधिक साजिश की कड़ियों को भी मजबूती से जोड़ा जा सके।

गिरफ्तारी से पहले के अपने घटनाक्रम को बयां करते हुए लवकेश बजाज ने पुलिस को बताया कि जैसे ही बेसमेंट की रसोई में शॉर्ट सर्किट हुआ और पूरी इमारत में चीख-पुकार मची, वह पूरी तरह से घबरा गया था। जब उसने देखा कि आग की लपटें बेकाबू हो चुकी हैं और विदेशी मेहमान खिड़कियों से नीचे कूद रहे हैं, तो वह अपनी कानूनी जिम्मेदारी निभाने या लोगों की जान बचाने में मदद करने के बजाय चुपके से भीड़ का फायदा उठाकर मौके से फरार हो गया था। कानूनी शिकंजे और जनता के गुस्से के डर से वह इस कदर सहमा हुआ था कि वह अपने परिवार से मिलने अपने घर भी नहीं गया। पुलिस से बचने के लिए उसने अपना मोबाइल फोन पूरी तरह से बंद कर दिया था और पूरी रात दिल्ली के अलग-अलग इलाकों, रेलवे स्टेशनों और सुनसान सड़कों पर आवारा लोगों की तरह भटकता रहा, जिसके बाद तकनीकी सर्विलांस की मदद से उसे धर-दबोचा गया।

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