Jaipur UGC Protest: यूजीसी के इक्विटी नियमों पर जयपुर में भड़का बवाल, प्रदर्शनकारियों पर लाठीचार्ज और वाटर कैनन का इस्तेमाल
जयपुर में UGC के Promotion of Equity Regulations 2026 के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर पुलिस ने लाठीचार्ज और वाटर कैनन का इस्तेमाल किया। जानें क्या है पूरा विवाद।
- जयपुर में UGC Regulations 2026 के खिलाफ सड़कों पर उतरे छात्र, पुलिस से झड़प के बाद माहौल गरमाया
- UGC के नए नियमों पर जयपुर में बड़ा बवाल: प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर चला वाटर कैनन, जानें पूरा मामला
- जयपुर: यूजीसी के 'इक्विटी रेगुलेशन 2026' के विरोध में प्रदर्शन, पुलिस ने किया लाठीचार्ज और वाटर कैनन का इस्तेमाल
राजस्थान की राजधानी जयपुर में विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) के 'Promotion of Equity in Higher Education Institutions Regulations, 2026' के विरोध में जारी आंदोलन ने हिंसक रूप ले लिया है। 4 अगस्त 2026 को विभिन्न सवर्ण संगठनों और छात्रों द्वारा आयोजित विरोध प्रदर्शन के दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच तीखी झड़प हुई। स्थिति को बेकाबू होते देख पुलिस प्रशासन ने भीड़ को तितर-बितर करने के लिए लाठीचार्ज किया और वाटर कैनन का प्रयोग किया। यह विरोध यूजीसी के उन नियमों के खिलाफ हो रहा है जिन्हें जनवरी 2026 में अधिसूचित किया गया था और जिन पर सर्वोच्च अदालत पहले ही रोक लगा चुकी है। इसके बावजूद आयोग द्वारा इन नियमों को पुनः प्रभावी रूप से लागू करने की सुगबुगाहट से छात्रों में आक्रोश व्याप्त है। मामले में आने वाले दिनों में आंदोलन और तेज होने की संभावना जताई जा रही है।
जयपुर की सड़कों पर विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) के एक विवादास्पद नोटिफिकेशन को लेकर छात्रों और सवर्ण समाज से जुड़े संगठनों का प्रदर्शन लगातार उग्र होता जा रहा है। प्रदर्शनकारी यूजीसी द्वारा इसी साल जनवरी में जारी किए गए 'Promotion of Equity in Higher Education Institutions Regulations, 2026' का कड़ा विरोध कर रहे हैं।
सोमवार को प्रदर्शनकारी अपनी मांगों को लेकर सड़कों पर उतरे और प्रशासनिक इमारतों का घेराव करने की कोशिश की। माहौल तब तनावपूर्ण हो गया जब बैरिकेड्स तोड़कर आगे बढ़ने का प्रयास कर रहे युवाओं को रोकने के लिए पुलिस को बल प्रयोग करना पड़ा। जयपुर में सुबह से ही राज्य के विभिन्न हिस्सों से आए युवा और छात्र प्रतिनिधि जुटने लगे थे। प्रदर्शनकारी यूजीसी के इक्विटी नियमों को वापस लेने और उच्च शिक्षण संस्थानों में सामान्य वर्ग के हितों की अनदेखी बंद करने की मांग को लेकर नारेबाजी कर रहे थे।
दोपहर होते-होते जब प्रदर्शनकारियों ने पूर्व निर्धारित मार्ग से हटकर प्रतिबंधित क्षेत्र की ओर बढ़ने का प्रयास किया, तो पुलिस बल ने उन्हें बैरिकेडिंग लगाकर रोक दिया। स्थिति उस समय बिगड़ गई जब प्रदर्शनकारी और पुलिसकर्मी आमने-सामने आ गए।
पुलिस की कार्रवाई: भीड़ को नियंत्रित करने के लिए पुलिस प्रशासन की ओर से पहले चेतावनी दी गई। स्थिति में सुधार न होने पर पुलिस ने प्रदर्शनकारियों पर वाटर कैनन (पानी की बौछार) छोड़ी और बाद में लाठीचार्ज कर भीड़ को खदेड़ दिया। इस झड़प में कुछ प्रदर्शनकारी छात्रों और पुलिसकर्मियों को हल्की चोटें आने की भी खबर है।
प्रदर्शनकारी छात्र संगठन: आंदोलन का नेतृत्व कर रहे युवा नेताओं का कहना है कि जनवरी 2026 में जारी किए गए यूजीसी के इस नियम पर जब देश की शीर्ष अदालत (सुप्रीम कोर्ट) ने पहले ही स्टे लागू कर रखा है, तो आयोग इसे किसी अन्य रूप में दोबारा थोपने की कोशिश क्यों कर रहा है। उनका आरोप है कि यह नियम शैक्षणिक वातावरण में असंतुलन पैदा करता है।
पुलिस और प्रशासन का पक्ष: जयपुर पुलिस के अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि शांति व्यवस्था बनाए रखने और सरकारी संपत्ति की सुरक्षा के लिए सीमित बल प्रयोग किया गया। प्रशासन का कहना है कि किसी को भी कानून-व्यवस्था हाथ में लेने की अनुमति नहीं दी जाएगी।
अकादमिक व सामाजिक विचारक: शिक्षाविदों का मानना है कि उच्च शिक्षण संस्थानों में समता और न्याय की नीतियां बनाते समय सभी वर्गों के हितों का ध्यान रखा जाना चाहिए, ताकि किसी भी वर्ग में असुरक्षा की भावना न पनपे।
जयपुर में हुए इस लाठीचार्ज की घटना के बाद से राज्य के अन्य विश्वविद्यालय परिसरों में भी तनाव का माहौल देखा जा रहा है। छात्र संगठनों ने पुलिसिया कार्रवाई की कड़ी निंदा की है और इस घटना के विरोध में सांकेतिक प्रदर्शन की घोषणा की है। इस विवाद का सीधा असर राज्य की राजनीतिक और सामाजिक गतिविधियों पर भी पड़ता दिख रहा है। विभिन्न सामाजिक संगठनों ने छात्रों का समर्थन करते हुए इस मुद्दे को राष्ट्रीय स्तर पर उठाने की बात कही है, जिससे आने वाले दिनों में यह आंदोलन राजस्थान की सीमाओं से बाहर भी फैल सकता है।
घटना के बाद जयपुर के संवेदनशील इलाकों में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात कर दिया गया है। छात्र प्रतिनिधियों ने स्पष्ट किया है कि जब तक यूजीसी इस नियम को पूरी तरह रद्द करने की औपचारिक घोषणा नहीं करता और लाठीचार्ज के दोषियों पर कार्रवाई नहीं होती, तब तक उनका शांतिपूर्ण विरोध जारी रहेगा। वहीं दूसरी ओर, कानूनी विशेषज्ञों की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि सुप्रीम कोर्ट में इस विनियम (Regulations 2026) से जुड़ी आगामी सुनवाई में केंद्र सरकार और यूजीसी क्या रुख अपनाते हैं।
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