Karni Sena Protest in Jaipur: यूजीसी के नियमों के खिलाफ करणी सेना का जयपुर में बड़ा प्रदर्शन, कानून वापस लेने की मांग
जयपुर में यूजीसी के विवादित नियमों को वापस लेने की मांग को लेकर करणी सेना ने बड़ा विरोध प्रदर्शन किया। जानें क्या हैं संगठन की मांगें और पूरा घटनाक्रम।
- Jaipur Karni Sena UGC Protest: यूजीसी कानून के विरोध में सड़कों पर उतरी करणी सेना, जानें जयपुर में क्यों बढ़ा विवाद
- जयपुर की सड़कों पर करणी सेना का हल्लाबोल: यूजीसी कानून वापस लेने की मांग को लेकर बड़ा प्रदर्शन
- जयपुर: यूजीसी के विवादित नियमों के विरोध में उतरी करणी सेना, कानून तुरंत वापस लेने की उठाई मांग
राजस्थान की राजधानी जयपुर में विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) द्वारा जारी किए गए नए नियमों के विरोध में श्री राष्ट्रीय राजपूत करणी सेना और करणी सेना के कार्यकर्ताओं ने 4 अगस्त 2026 को उग्र विरोध प्रदर्शन किया। संगठन के पदाधिकारी और कार्यकर्ता भारी संख्या में एकत्रित होकर यूजीसी के विवादित प्रावधानों को पूरी तरह से निरस्त करने की मांग कर रहे हैं। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि ये नियम सामान्य वर्ग और उच्च शिक्षा के सामाजिक ताने-बाने को प्रभावित कर रहे हैं, जिससे युवाओं में भारी असंतोष है। जंतर-मंतर से लेकर जयपुर की सड़कों तक फैले इस विरोध के बाद प्रशासनिक तंत्र अलर्ट पर है, जबकि करणी सेना ने साफ कर दिया है कि जब तक मांगें पूरी नहीं होतीं, उनका आंदोलन चरणबद्ध तरीके से जारी रहेगा।
जयपुर में विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) की हालिया नीतियों और नियमों को लेकर विरोध की आग और भड़क गई है। छात्र संगठनों और अभ्यर्थियों के बाद अब सामाजिक संगठनों ने भी इस मुद्दे पर मोर्चा खोल दिया है। श्री राष्ट्रीय राजपूत करणी सेना के नेतृत्व में कार्यकर्ताओं ने जयपुर में बड़ा प्रदर्शन आयोजित कर केंद्र सरकार और यूजीसी प्रशासन से विवादित नियमों को तुरंत वापस लेने की मांग की। प्रदर्शन के दौरान करणी सेना के सदस्यों ने हाथों में तख्तियां और संगठन के झंडे लेकर यूजीसी की नीतियों के खिलाफ नारेबाजी की। उनका कहना है कि उच्च शिक्षण संस्थानों में लागू किए जा रहे नए नियम समरसता और निष्पक्षता के सिद्धांतों के खिलाफ हैं।
जयपुर के मुख्य प्रशासनिक और शैक्षणिक क्षेत्रों के आसपास करणी सेना के कार्यकर्ताओं का एकत्र होना सुबह से ही शुरू हो गया था। दोपहर तक विशाल रैली के रूप में कार्यकर्ता विरोध जताने पहुंचे। पुलिस प्रशासन द्वारा लगाए गए शुरुआती अवरोधकों पर प्रदर्शनकारियों ने जमकर नारेबाजी की और प्रशासनिक अधिकारियों को अपनी मांगों का ज्ञापन सौंपा।
प्रदर्शन के दौरान सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने के लिए भारी पुलिस बल तैनात किया गया था। सुरक्षा बलों ने संवेदनशील क्षेत्रों में अतिरिक्त बैरिकेडिंग की ताकि यातायात और सामान्य जनजीवन प्रभावित न हो।
तनावपूर्ण माहौल लेकिन नियंत्रण में स्थिति: बैरिकेड्स के पास प्रदर्शनकारियों की पुलिसकर्मियों के साथ हल्की धक्का-मुक्की भी देखने को मिली। हालांकि, संगठन के वरिष्ठ नेताओं के हस्तक्षेप और पुलिस की मुस्तैदी से स्थिति नियंत्रण में रही और प्रदर्शनकारियों ने प्रशासनिक प्रतिनिधि को अपना मांग पत्र सौंपा।
करणी सेना के पदाधिकारियों का वक्तव्य: करणी सेना के प्रतिनिधियों का कहना है कि "यूजीसी द्वारा लागू किए जा रहे नियम युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ हैं। यदि इन नियमों को बिना संशोधन या पूरी तरह वापस लिए लागू करने की कोशिश की गई, तो आंदोलन केवल जयपुर तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसे पूरे देश में फैलाया जाएगा।"
प्रशासन का पक्ष: मौके पर मौजूद वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने बताया कि प्रदर्शनकारियों को शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखने का अवसर दिया गया और ज्ञापन स्वीकार कर उसे उच्च अधिकारियों एवं संबंधित मंत्रालय को प्रेषित किया जा रहा है। कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए पर्याप्त सुरक्षा प्रबंध किए गए थे।
जयपुर में करणी सेना के सड़कों पर उतरने से यूजीसी नियमों से जुड़े विवाद को नया राजनीतिक और सामाजिक आयाम मिल गया है। इससे पहले केवल अभ्यर्थियों और छात्र संगठनों तक सीमित दिख रहा यह आंदोलन अब व्यापक सामाजिक लामबंदी का रूप लेता जा रहा है। इस घटना के बाद राजस्थान के प्रमुख शिक्षण संस्थानों और विश्वविद्यालयों में पुलिस की सतर्कता बढ़ा दी गई है। सोशल मीडिया पर भी इस प्रदर्शन के वीडियो तेजी से प्रसारित हो रहे हैं, जिसके चलते राजस्थान के अन्य जिलों जैसे जोधपुर, उदयपुर और कोटा में भी विरोध की सुगबुगाहट तेज हो गई है।
करणी सेना के नेतृत्व ने चेतावनी दी है कि यदि ज्ञापन में उठाई गई मांगों पर एक निश्चित समयावधि के भीतर केंद्र सरकार या यूजीसी की ओर से कोई सकारात्मक निर्णय नहीं लिया जाता, तो वे उग्र आंदोलन के लिए बाध्य होंगे। आने वाले दिनों में संगठन के प्रतिनिधिमंडल द्वारा केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय और संबंधित उच्च अधिकारियों से संपर्क करने की योजना है। इस बीच, प्रशासनिक एजेंसियां पूरे घटनाक्रम पर बारीक नजर बनाए हुए हैं ताकि राज्य में कानून-व्यवस्था की स्थिति न बिगड़े।
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