Savarna Nyay Padayatra Jaipur: यूजीसी नियमों के खिलाफ 800 KM पैदल चलकर जयपुर पहुंची यात्रा, कलेक्ट्रेट घेराव में पुलिस से झड़प
यूजीसी के नियमों के विरोध में देशनोक से शुरू हुई 800 किमी लंबी 'सवर्ण न्याय पैदल यात्रा' जयपुर पहुंची। कलेक्ट्रेट घेराव के दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों में झड़प।
- जयपुर कलेक्ट्रेट पर सवर्ण समाज का हल्लाबोल: देशनोक से आई 800 KM लंबी 'सवर्ण न्याय पैदल यात्रा', पुलिस से तीखी झड़प
- 800 किलोमीटर चलकर जयपुर पहुंची 'सवर्ण न्याय पैदल यात्रा': कलेक्ट्रेट घेराव पर भारी बवाल, पुलिस और प्रदर्शनकारियों में झड़प
- जयपुर: देशनोक से आई 800 KM लंबी 'सवर्ण न्याय पैदल यात्रा' के दौरान कलेक्ट्रेट घेराव, पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच तीखी झड़प
विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) के नए नियमों के विरोध में बीकानेर के देशनोक से शुरू हुई 800 किलोमीटर लंबी 'सवर्ण न्याय पैदल यात्रा' 4 अगस्त 2026 को राजस्थान की राजधानी जयपुर पहुंची। जयपुर आगमन पर सवर्ण समाज के कार्यकर्ताओं और प्रदर्शनकारियों ने कलेक्ट्रेट का घेराव किया, जहां स्थिति को संभालने में जुटी पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच तीखी झड़प हो गई। सवर्ण समाज के युवाओं और कार्यकर्ताओं द्वारा यह लंबा पैदल मार्च यूजीसी की हालिया नीतियों के विरोध में अपनी आवाज बुलंद करने के उद्देश्य से निकाला गया था। कलेक्ट्रेट परिसर के बाहर बढ़े तनाव के बीच प्रदर्शनकारियों ने प्रशासनिक अधिकारियों को अपनी मांगों का ज्ञापन सौंपा है। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि यदि यूजीसी के विवादित प्रावधानों पर रोक नहीं लगाई गई, तो यह आंदोलन आने वाले दिनों में और अधिक व्यापक रूप ले सकता है।
विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) द्वारा जारी किए गए नए दिशानिर्देशों को लेकर राजस्थान में विरोध प्रदर्शन लगातार तेज होता जा रहा है। बीकानेर जिले के ऐतिहासिक धार्मिक स्थल देशनोक से शुरू हुई 'सवर्ण न्याय पैदल यात्रा' लगभग 800 किलोमीटर का सफर तय कर 4 अगस्त 2026 को राजधानी जयपुर पहुंची। जयपुर पहुंचने के बाद सैकड़ों की संख्या में पैदल मार्च में शामिल यात्रियों और स्थानीय सवर्ण समाज के समर्थकों ने कलेक्ट्रेट की ओर रुख किया। कलेक्ट्रेट परिसर का घेराव करने के दौरान मौके पर पहले से तैनात पुलिस बल और उग्र प्रदर्शनकारियों के बीच नोकझोंक और तीखी झड़प की स्थिति बन गई।
देशनोक से लगातार पैदल चलते हुए जयपुर पहुंचे युवाओं और सामाजिक कार्यकर्ताओं के चेहरे पर थकान के बजाय आक्रोश साफ दिख रहा था। जयपुर में प्रवेश करते ही स्थानीय युवाओं और विभिन्न छात्र व सामाजिक संगठनों ने यात्रा का स्वागत किया और कलेक्ट्रेट की तरफ कूच किया।
प्रदर्शनकारी कलेक्ट्रेट परिसर के भीतर प्रवेश करने का प्रयास कर रहे थे, लेकिन सुरक्षा कारणों से पुलिस प्रशासन ने भारी बैरिकेडिंग लगाकर उन्हें रोक दिया। इस दौरान नारेबाजी कर रहे युवाओं और पुलिसकर्मियों के बीच धक्का-मुक्की हुई और स्थिति कुछ समय के लिए काफी तनावपूर्ण हो गई। स्थिति को नियंत्रण में रखने के लिए कलेक्ट्रेट परिसर के आसपास भारी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया था। पुलिस अधिकारियों ने प्रदर्शनकारियों को समझाने और एक सीमित स्थान पर रोकने की कोशिश की। झड़प के बाद वरिष्ठ अधिकारियों के हस्तक्षेप से स्थिति को शांत कराया गया और प्रतिनिधिमंडल को ज्ञापन देने की अनुमति दी गई।
यात्रा का नेतृत्व कर रहे प्रतिनिधियों ने कहा कि 800 किलोमीटर की लंबी पैदल यात्रा सवर्ण समाज के युवाओं में व्याप्त पीड़ा और रोष का प्रतीक है। यूजीसी की नई नीतियां उच्च शिक्षा में असंतुलन पैदा कर रही हैं। जब तक सरकार और आयोग इस पर पुनर्विचार नहीं करते, हमारा संवैधानिक और शांतिपूर्ण विरोध जारी रहेगा। जयपुर जिला प्रशासन और पुलिस अधिकारियों ने बताया कि कलेक्ट्रेट की सुरक्षा और कानून-व्यवस्था बनाए रखना प्राथमिकता थी। प्रदर्शनकारियों से बातचीत कर शांति स्थापित की गई और उनका ज्ञापन स्वीकार कर उच्च स्तर पर भेजने का आश्वासन दिया गया है।
800 किलोमीटर लंबी 'सवर्ण न्याय पैदल यात्रा' के जयपुर पहुंचने और कलेक्ट्रेट घेराव के बाद यह मुद्दा पूरे राजस्थान में चर्चा का केंद्र बन गया है। इस यात्रा ने राज्य भर में सवर्ण समाज के युवाओं और अभ्यर्थियों को एक मंच पर ला खड़ा किया है जयपुर में हुई इस झड़प का असर आसपास के जिलों में भी देखा जा रहा है, जहां विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों के बाहर छात्र संगठन समर्थन में उतर रहे हैं। सोशल मीडिया पर भी पैदल यात्रा और कलेक्ट्रेट के सामने हुई झड़प के दृश्य व्यापक रूप से प्रसारित हो रहे हैं, जिससे इस विवाद को राष्ट्रीय पहचान मिल रही है।
कलेक्ट्रेट घेराव के बाद पैदल यात्रा के मुख्य प्रतिनिधियों ने प्रशासनिक अधिकारियों के माध्यम से राज्य सरकार और केंद्र सरकार को अपना ज्ञापन सौंप दिया है। प्रदर्शनकारियों ने स्पष्ट किया है कि वे इस ज्ञापन पर शासन के जवाब का इंतजार कर रहे हैं। यदि सरकार और यूजीसी प्रशासन की तरफ से कोई सकारात्मक कदम या संशोधन का आश्वासन नहीं मिलता है, तो सवर्ण समाज के संगठनों ने आने वाले समय में राज्यव्यापी हड़ताल और दिल्ली कूच की रणनीति बनाने की चेतावनी दी है।
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