भोजन की थाली से दूर होगी खून की कमी, जानें एनीमिया से बचने के आसान और घरेलू उपाय
शरीर में खून की कमी यानी एनीमिया एक बड़ी समस्या है। सही खानपान, सहजन का उपयोग और जागरूकता के जरिए इस बीमारी से आसानी से बचा जा सकता है।
भोजन की सही थाली से दूर होगी खून की कमी, जानिए एनीमिया के लक्षण और बचाव के घरेलू उपाय
शरीर में खून की कमी यानी एनीमिया आज के समय में स्वास्थ्य के साथ-साथ सामाजिक विकास के लिए भी एक बड़ी चुनौती बना हुआ है। राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण के आंकड़े बताते हैं कि देश में आधे से अधिक महिलाएं और छोटे बच्चे इस समस्या से प्रभावित हैं। यह स्थिति स्पष्ट करती है कि बेहतर आर्थिक प्रगति के बाद भी सही पोषण को लेकर समझ बढ़ाना कितना जरूरी है। अच्छी बात यह है कि थोड़ा सा ध्यान देकर और अपने खानपान में बदलाव करके इस समस्या से पूरी तरह निपटा जा सकता है।
गोरखपुर के वरिष्ठ चिकित्सक डॉक्टर आलोक कुमार गुप्ता का कहना है कि खून की कमी से बचने का सबसे अच्छा तरीका हमारी रसोई में ही मौजूद है। भोजन में हरी पत्तेदार सब्जियां, दालें, काला चना, गुड़, बाजरा, तिल और मौसमी फलों को नियमित रूप से शामिल करना चाहिए। इसके साथ ही शरीर में आयरन की मात्रा को अच्छी तरह सोखने के लिए विटामिन-सी बहुत जरूरी है। इसके लिए खाने के साथ या बाद में नींबू, आंवला और संतरे जैसे खट्टे फलों का उपयोग करना चाहिए। एक बात का विशेष ध्यान रखें कि खाना खाने के तुरंत बाद चाय, कॉफी या शीतल पेय (कोल्ड ड्रिंक) पीने से बचें, क्योंकि ये तत्व शरीर को आयरन सोखने से रोकते हैं।
चिकित्सकों के अनुसार, भोजन में सुधार के साथ ही पेट की सेहत का ध्यान रखना भी जरूरी है। कई बार आंतों में कीड़ों का संक्रमण हो जाता है, जो अंदरूनी तौर पर खून की कमी की वजह बनता है। इसलिए साल में कम से कम एक बार पूरे परिवार को पेट के कीड़े साफ करने वाली दवा का सेवन डॉक्टर की सलाह पर जरूर करना चाहिए। इसके अलावा महिलाओं में अत्यधिक मासिक स्राव भी इसका एक बड़ा कारण होता है।
एनीमिया केवल शारीरिक थकावट तक सीमित नहीं रहता, बल्कि यह बच्चों की पढ़ाई, बड़ों की कार्यक्षमता और पूरे समाज की उत्पादकता को प्रभावित करता है। शरीर में हीमोग्लोबिन कम होने से अंगों तक ऑक्सीजन सही मात्रा में नहीं पहुंच पाती, जिससे कमजोरी, चक्कर आना, सांस फूलना और सिरदर्द जैसे लक्षण दिखाई देते हैं। गर्भवती महिलाओं और बच्चों के मामले में यह और भी खतरनाक हो सकता है। इससे शिशुओं का मानसिक विकास रुक सकता है और प्रसव के समय जोखिम बढ़ जाता है।
उत्तर प्रदेश जैसे बड़ी आबादी वाले राज्य में इस बीमारी के खिलाफ लड़ाई और भी महत्वपूर्ण है। पिछले कुछ वर्षों में राज्य सरकार, स्वास्थ्य विभाग और आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के मिले-जुले प्रयासों से स्थिति में काफी सुधार आया है। सरकार पोषण के प्रति लोगों को जागरूक करने के लिए लगातार काम कर रही है। इस मुहिम में सहजन (मोरिंगा) को पोषण का एक बेहतरीन जरिया माना गया है। विशेषज्ञों के अनुसार सहजन की पत्तियों और फलियों में संतरे से ज्यादा विटामिन-सी, गाजर से ज्यादा विटामिन-ए और दूध से ज्यादा कैल्शियम पाया जाता है। यही वजह है कि इसे अब बच्चों के आहार कार्यक्रमों में शामिल किया जा रहा है।
देश को इस समस्या से मुक्त करने के लिए सरकारी स्तर पर मुफ्त आयरन की गोलियां बांटने और नियमित जांच जैसे कदम उठाए जा रहे हैं। अस्पतालों और स्कूलों के माध्यम से लगातार मदद पहुंचाई जा रही है। हालांकि, केवल प्रशासनिक प्रयासों से ही बदलाव संभव नहीं है। जब तक हर परिवार अपनी थाली को संतुलित और पोषक तत्वों से भरपूर नहीं बनाएगा, तब तक इस समस्या का जड़ से खात्मा मुश्किल है। सही समय पर लक्षणों को पहचानना, जैसे लगातार थकावट या पीलापन दिखने पर जांच कराना और सही भोजन अपनाना ही इसका सबसे पक्का इलाज है।
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