Dubai Gold Smuggling Gang Busted: मुफ्त टिकट का लालच देकर बनाते थे 'ह्यूमन कूरियर', सोने की तस्करी गिरोह का पर्दाफाश
दुबई से भारत में सोने की तस्करी करने वाले गिरोह का पुलिस ने पर्दाफाश किया है। गिरोह आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को मुफ्त एयर टिकट का लालच देकर 'ह्यूमन कूरियर' बनाता था।
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- दुबई से भारत में सोने की तस्करी का अनोखा तरीका: मुफ्त एयर टिकट के बदले आर्थिक रूप से कमजोर लोगों का इस्तेमाल, ऐसे हुआ पर्दाफाश
- Gold Smuggling Syndicate Busted: दुबई से सोना लाने वाले अंतर-राज्यीय गिरोह का भंडाफोड़, 'ह्यूमन कूरियर' मॉड्यूल का खुलासा
पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों ने अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर जारी सोने की अवैध तस्करी के एक बेहद शातिराना सिंडिकेट का पर्दाफाश किया है। 5 अगस्त 2026 को सामने आई इस कार्रवाई में पुलिस ने एक ऐसे अंतर-राज्यीय गिरोह का भंडाफोड़ किया जो दुबई में फंसे आर्थिक रूप से कमजोर भारतीयों को मुफ्त हवाई टिकट का लालच देकर उन्हें 'ह्यूमन कूरियर' के तौर पर इस्तेमाल करता था। यह गिरोह सोने के पाउडर को विशेष कैप्सूल में बंद कर यात्रियों के सामान में छिपाकर भारत लाता था। मामले का खुलासा किसी पूर्व नियोजित छापे से नहीं, बल्कि गिरोह के ही सदस्यों द्वारा सोने की खेप चोरी करने और पुलिस तक मामला पहुंचने के बाद हुआ। पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए कई संदिग्धों को गिरफ्तार कर लिया है और पूरे नेटवर्क की परतें खोलनी शुरू कर दी हैं।
तस्करी और संगठित अपराध के खिलाफ काम कर रही पुलिस टीम ने दुबई से भारत में सोने की अवैध आमद कराने वाले एक बड़े रैकेट को उजागर किया है। यह सिंडिकेट खाड़ी देशों में विषम परिस्थितियों का सामना कर रहे उन भारतीय नागरिकों को अपना निशाना बनाता था, जो स्वदेश लौटने के लिए हवाई जहाज के टिकट का खर्च उठाने में असमर्थ थे। गिरोह के सरगना ऐसे मजबूरी में फंसे यात्रियों को मुफ्त में रिटर्न एयर टिकट मुहैया कराते थे और इसके बदले उनके सामान के जरिए छुपाकर सोने की तस्करी कराते थे। पुलिस जांच में यह बात सामने आई है कि तस्कर सोने को पाउडर के रूप में ढालकर कंडोम में लिपटे कैप्सूल में भरकर यात्रियों के लगेज में सेट कर देते थे, जिससे हवाई अड्डों पर लगे सामान्य चेकिंग उपकरणों को चकमा दिया जा सके।
इस अंतर-राज्यीय गिरोह का तौर-तरीका बेहद आधुनिक और गोपनीय था। दुबई में बैठे हैंडलर्स भारत में मौजूद अपने नेटवर्क से संपर्क साधने के लिए एंड-टू-एंड एन्क्रिप्टेड मैसेजिंग प्लेटफॉर्म्स का सहारा लेते थे। वहां से हवाई जहाज के जरिए उत्तर प्रदेश के एक निवासी को 'ह्यूमन कूरियर' बनाकर भारत भेजा गया था। उसके सामान में सोने के पाउडर वाले कैप्सूल छिपाए गए थे। योजना के मुताबिक भारत पहुंचने पर इस खेप को स्थानीय रिसीवर्स के हवाले किया जाना था।
हालांकि, इस पूरे घटनाक्रम में एक नया मोड़ तब आया जब गिरोह के भीतर ही अविश्वास की स्थिति पैदा हो गई। भारत में खेप की डिलीवरी लेने पहुंचे स्थानीय गुर्गों ने कथित तौर पर उस सोने को खुद ही चुरा लिया और इसे गायब घोषित करने की साजिश रची। जब सोने की चोरी को लेकर विवाद बढ़ा, तो यह मामला किसी तरह पुलिस के संज्ञान में पहुंच गया। पुलिस ने जब चोरी की इस शिकायत की कड़ियों को जोड़ना शुरू किया, तो अधिकारियों के सामने केवल चोरी का मामला ही नहीं, बल्कि अंतर्राष्ट्रीय सोने की तस्करी का एक विशाल ताना-बाना खुलकर सामने आ गया।
मामले का खुलासा करते हुए वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने बताया कि आरोपी अत्यधिक सतर्कता और आधुनिक संचार तकनीकों का इस्तेमाल कर रहे थे। पुलिस प्रवक्ता के अनुसार, "यह गिरोह मजबूरी का फायदा उठाकर निर्दोष और आर्थिक रूप से तंग लोगों को अपने गैर-कानूनी काम में ढाल बनाता था। प्राथमिक जांच के आधार पर कई आरोपियों को हिरासत में लिया गया है और उनके पास से तस्करी के तरीके से जुड़ी अहम सामग्री बरामद की गई है।"
दूसरी ओर, सीमा शुल्क (कस्टम्स) और हवाई अड्डा सुरक्षा एजेंसियों ने भी इस नए मॉड्यूल को लेकर सतर्कता बढ़ा दी है। अधिकारियों का कहना है कि सोने के पाउडर के रूप में तस्करी करने की यह तकनीक सुरक्षा जांचों को चकमा देने की एक सोची-समझी रणनीति थी, जिसके खिलाफ अब विशेष निगरानी तंत्र तैयार किया जा रहा है।
इस अंतरराष्ट्रीय तस्करी रैकेट के पर्दाफाश के बाद देश के प्रमुख अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डों पर सुरक्षा व्यवस्था और अधिक सख्त कर दी गई है। विशेष रूप से खाड़ी देशों से आने वाली उड़ानों के यात्रियों और उनके लगेज की जांच के लिए अतिरिक्त प्रोटोकॉल लागू किए जा रहे हैं। इसके साथ ही, यह मामला उन प्रवासियों के लिए भी एक गंभीर चेतावनी बनकर सामने आया है जो अनजाने में या मुफ्त टिकट के लालच में आकर किसी अज्ञात व्यक्ति का सामान लाने-ले जाने के लिए तैयार हो जाते हैं। कानूनी विशेषज्ञों के मुताबिक, 'ह्यूमन कूरियर' बनने वाले व्यक्ति भले ही मजबूरी में काम कर रहे हों, लेकिन कड़े सीमा शुल्क कानूनों के तहत वे भी अपराध के भागीदार माने जा सकते हैं।
पुलिस अब इस गिरोह के वित्तीय तंत्र और डिजिटल पदचिन्हों (डिजिटल फुटप्रिंट्स) की गहन पड़ताल कर रही है। दुबई में बैठे मुख्य हैंडलर्स की पहचान के लिए केंद्रीय जांच एजेंसियों की मदद ली जा रही है ताकि उनके खिलाफ अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कानूनी कार्रवाई की जा सके। भारत में गिरफ्तार किए गए आरोपियों से पूछताछ के आधार पर यह पता लगाया जा रहा है कि अब तक यह गिरोह कितने किलो सोने की अवैध तस्करी कर चुका है और इस अवैध सोने को किन-किन भारतीय शहरों के ज्वैलर्स या मिडिलमेन को सप्लाई किया गया था। पुलिस का दावा है कि आने वाले दिनों में इस मामले में कई और बड़ी गिरफ्तारियां संभव हैं।
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