Delhi High Court Contempt Case: जज जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा मामले में सौरव दास और AAP नेताओं को नोटिस, 4 हफ्ते में मांगा जवाब

Delhi High Court Contempt Case: दिल्ली हाईकोर्ट ने जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा से जुड़े आपराधिक अवमानना केस में सौरव दास और आप नेताओं को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।

Aug 5, 2026 - 13:46
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Delhi High Court Contempt Case: जज जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा मामले में सौरव दास और AAP नेताओं को नोटिस, 4 हफ्ते में मांगा जवाब
  • Contempt Case Delhi High Court: दिल्ली हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणी, जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा से जुड़े अवमानना मामले में सौरव दास और गोपाल राय को नोटिस
  • जज से जुड़ा आपराधिक अवमानना केस: दिल्ली हाईकोर्ट की सख्ती, सौरव दास और AAP नेताओं को नोटिस जारी कर चार हफ्ते में मांगा जवाब
  • Contempt Notice Delhi High Court: महिला जज से जुड़े अवमानना केस में सौरव दास और AAP नेताओं को नोटिस, 4 हफ्ते में मांगा जवाब
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दिल्ली हाईकोर्ट ने अपनी ही अदालत की महिला जज जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा के खिलाफ सोशल मीडिया पर चलाए गए कथित अभियान से जुड़े आपराधिक अवमानना मामले में सख्त रुख अपनाया है। 5 अगस्त 2026 को सामने आई इस कानूनी कार्रवाई के तहत हाईकोर्ट की खंडपीठ ने नेता सौरव दास, आम आदमी पार्टी के वरिष्ठ नेता गोपाल राय सहित दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल, पूर्व उप मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया और राज्यसभा सांसद संजय सिंह को नोटिस जारी किया है। जस्टिस नवीन चावला और जस्टिस रविंदर दुडेजा की बेंच ने सभी पक्षों को चार सप्ताह के भीतर अपना लिखित जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है। इसके अलावा, सौरव दास पर मामले से संबंधित इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य मिटाने का गंभीर आरोप भी लगा है, जिसकी अदालत द्वारा समीक्षा की जा रही है।

दिल्ली हाईकोर्ट में संस्थागत गरिमा और न्यायपालिका की साख से जुड़े एक संवेदनशील आपराधिक अवमानना मामले की सुनवाई हुई। यह मामला दिल्ली हाईकोर्ट की सिटिंग जज जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा को कथित तौर पर बदनाम करने की नीयत से सोशल मीडिया पर चलाई गई एक समन्वित मुहिम (को-ऑर्डिनेटेड कैंपेन) से संबंधित है। मामले की सुनवाई करते हुए जस्टिस नवीन चावला और जस्टिस रविंदर दुडेजा की दो सदस्यीय खंडपीठ ने इस मामले में नामजद कॉकरोच जनता पार्टी के नेता सौरव दास और आम आदमी पार्टी के नेता गोपाल राय को औपचारिक नोटिस जारी कर अपनी सफाई पेश करने को कहा है। अदालत ने इस अवमानना याचिका पर विस्तृत जवाब के लिए सभी प्रतिवादियों को चार सप्ताह का समय दिया है।

यह पूरा मामला तब गरमाया जब न्यायपालिका की कार्यप्रणाली और एक महिला न्यायाधीश की व्यक्तिगत व पेशेवर छवि को नुकसान पहुंचाने के उद्देश्य से डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर आपत्तिजनक सामग्री और टिप्पणियां प्रसारित की गईं। अदालत के संज्ञान में लाया गया कि सोशल मीडिया पर चली इस सोची-समझी मुहिम का हिस्सा कई राजनीतिक हस्तियां और डिजिटल प्लेटफॉर्म संचालक थे। सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता पक्ष ने अदालत को बताया कि आरोपी पक्ष ने न्यायिक प्रक्रिया को प्रभावित करने और जनता के बीच जज की साख को धूमिल करने का प्रयास किया।

सुनवाई के दौरान एक और बड़ा और गंभीर तथ्य सामने आया। खंडपीठ को सूचित किया गया कि नोटिस जारी होने और कानूनी प्रक्रिया शुरू होने के बावजूद सौरव दास पर इस मामले से जुड़े डिजिटल और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों को मिटाने या उनके साथ छेड़छाड़ करने का आरोप है। हाईकोर्ट की पीठ ने मामले की गंभीरता को देखते हुए पूर्व में दर्ज अवमानना याचिकाओं के साथ-साथ इन नए आरोपों को भी रिकॉर्ड पर लिया है। इसी कड़ी में पीठ ने आम आदमी पार्टी के शीर्ष नेताओं—अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया और संजय सिंह को भी उनके खिलाफ लंबित आपराधिक अवमानना के मामलों में अपना अंतिम जवाब दाखिल करने के लिए चार हफ्तों की मोहलत दी है।

न्यायिक कार्यवाही के दौरान अदालत ने यह स्पष्ट संदेश दिया है कि न्यायाधीशों और न्यायपालिका की स्वतंत्रता एवं सम्मान पर किसी भी तरह का आघात बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। पीठ ने कहा कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के नाम पर न्यायपीठ की अवमानना या दुर्भावनापूर्ण अभियान चलाने की इजाजत कानून के दायरे में नहीं दी जा सकती। दूसरी ओर, नोटिस प्राप्त करने वाले पक्षों के कानूनी प्रतिनिधियों ने अदालत के समक्ष अपनी बात रखते हुए कहा कि वे निर्धारित चार हफ्तों की अवधि में अपना विस्तृत उत्तर दाखिल करेंगे और कानूनी प्रावधानों के तहत ही अपना पक्ष रखेंगे।

इस मामले के तूल पकड़ने से राजनीतिक और कानूनी गलियारों में हलचल तेज हो गई है। सोशल मीडिया पर न्यायाधीशों के फैसलों या उनकी साख को लेकर की जाने वाली टिप्पणियों पर कानून के कड़े नियंत्रण का यह एक बड़ा उदाहरण माना जा रहा है। कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि इस मामले में दिल्ली हाईकोर्ट का कड़ा रुख डिजिटल प्लेटफॉर्म पर सक्रिय राजनीतिक कार्यकर्ताओं और टिप्पणीकारों के लिए एक नजीर साबित होगा। इसके साथ ही, इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य मिटाने के आरोपों के जुड़ने से आरोपी पक्ष के लिए कानूनी मुश्किलें और बढ़ सकती हैं, क्योंकि साक्ष्य से छेड़छाड़ अपने आप में एक अलग और गंभीर अपराध की श्रेणी में आता है।

दिल्ली हाईकोर्ट द्वारा निर्धारित समय-सीमा के अनुसार अब सौरव दास, गोपाल राय, अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया और संजय सिंह को अगले चार हफ्तों में अपना पक्ष हलफनामे के माध्यम से अदालत के समक्ष प्रस्तुत करना होगा। चार सप्ताह की समयावधि समाप्त होने के बाद अदालत सभी पक्षों के जवाबों की समीक्षा करेगी। इसके बाद खंडपीठ यह तय करेगी कि क्या आरोपियों के खिलाफ आपराधिक अवमानना के तहत औपचारिक आरोप (चार्ज) तय किए जाएं या नहीं। यदि साक्ष्य मिटाने के आरोप सिद्ध होते हैं, तो अदालत इस संबंध में अलग से कठोर दिशा-निर्देश या कानूनी कार्रवाई का आदेश दे सकती है।

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