मगहर नगर पंचायत में वित्तीय पारदर्शिता की मांग: मनोनीत सभासद गौरव कुमार निषाद ने सरकारी अभिलेखों के निरीक्षण के लिए सौंपा पत्र

संत कबीर नगर के मगहर नगर पंचायत में मनोनीत सभासद गौरव कुमार निषाद ने विकास कार्यों में पारदर्शिता के लिए धारा 332 के तहत अभिलेखों के निरीक्षण की मांग की।

Jul 9, 2026 - 23:22
Jul 9, 2026 - 23:32
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मगहर नगर पंचायत में वित्तीय पारदर्शिता की मांग: मनोनीत सभासद गौरव कुमार निषाद ने सरकारी अभिलेखों के निरीक्षण के लिए सौंपा पत्र
मगहर नगर पंचायत के विकास कार्यों और खर्चों की खुलेगी फाइल, मनोनीत सभासद गौरव कुमार निषाद ने कानून का हवाला देकर मांगी जांच की अनुमति

संत कबीर नगर जिले में स्थित नगर पंचायत मगहर के प्रशासनिक गलियारों में वित्तीय पारदर्शिता और जवाबदेही को लेकर सरगर्मी बढ़ गई है। नगर पंचायत के मनोनीत सभासद गौरव कुमार निषाद ने उत्तर प्रदेश नगर पालिका अधिनियम 1916 की धारा 332 के तहत मिले अपने कानूनी अधिकारों का उपयोग करते हुए स्थानीय विकास कार्यों से जुड़े समस्त दस्तावेजों और सरकारी अभिलेखों के निरीक्षण की मांग की है। इस सिलसिले में उन्होंने नगर पंचायत अध्यक्ष को एक औपचारिक पत्र सौंपकर फाइलों की जांच करने के लिए समय और स्थान तय करने का अनुरोध किया है। जनप्रतिनिधि के इस कड़े रुख के बाद स्थानीय प्रशासन में हड़कंप का माहौल है।

सौंपे गए आधिकारिक पत्र के अनुसार, मनोनीत सभासद ने पिछले दो वित्तीय वर्षों (2024-25 और 2025-26) के दौरान नगर क्षेत्र में कराए गए सभी छोटे-बड़े विकास कार्यों की फाइलों को देखने की मांग की है। इसके तहत उन्होंने बोर्ड बैठक की कार्यवाही पुस्तिका, संकल्प रजिस्टर, निर्माण कार्यों की माप पुस्तिका (एमबी), प्रशासनिक और तकनीकी स्वीकृतियों के आदेश, टेंडर से जुड़े दस्तावेज, भुगतान के बिल-वाउचर, चेक जारी करने का विवरण, उपयोगिता प्रमाणपत्र (यूसी), कैश बुक, लेजर बुक के साथ-साथ संपत्ति और स्टॉक रजिस्टर की जांच करने की इच्छा जताई है।

गौरव कुमार निषाद का कहना है कि एक सजग जनप्रतिनिधि होने के नाते नगर पंचायत के विकास कार्यों में पूरी पारदर्शिता लाना, वित्तीय गड़बड़ियों को रोकना और जनता के पैसे का सही इस्तेमाल सुनिश्चित करना उनकी मुख्य जिम्मेदारी है। उन्होंने अपने पत्र में स्पष्ट किया है कि प्रशासन 15 दिनों के भीतर निरीक्षण के लिए कोई एक दिन और समय तय कर उन्हें लिखित रूप से सूचित करे ताकि वे कानून के तहत मिले अधिकारों का सही इस्तेमाल कर सकें।

पत्र में यह चेतावनी भी दी गई है कि यदि तय समय के भीतर नगर पंचायत प्रशासन द्वारा दस्तावेजों को दिखाने में टालमटोल की जाती है या बिना किसी ठोस कानूनी कारण के रोका जाता है, तो वह चुप नहीं बैठेंगे। ऐसी स्थिति में वे मामले की शिकायत जिला प्रशासन के आला अधिकारियों, मंडलायुक्त और शासन स्तर पर कर आवश्यक वैधानिक कदम उठाएंगे। स्थानीय स्तर पर सरकारी फाइलों के निरीक्षण की इस मांग को नगर पंचायत के कामकाज में जवाबदेही तय करने और भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने की दिशा में एक बड़ा और जरूरी कदम माना जा रहा है।

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