Shahjahanpur: गुरुकुल महाविद्यालय रुद्रपुर तिलहर शाहजहांपुर का अमृत महोत्सव, बालक छात्रावास का भव्य उद्घाटन। 

विनोबा भावे के सर्वोदयी विचारों से प्रेरित कर्मयोगी परिवार सूरत के पुरुषार्थ से श्री लालचंद भाई जी ज्ञानचंद बजाज विक्रम भाई बजाज बालक छात्रावास

By INA News Desk
Nov 25, 2025 - 15:34
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Shahjahanpur: गुरुकुल महाविद्यालय रुद्रपुर तिलहर शाहजहांपुर का अमृत महोत्सव,  बालक छात्रावास का भव्य उद्घाटन। 
गुरुकुल महाविद्यालय रुद्रपुर में 239वाँ सरस्वती शिशु धाम छात्रावास का भव्य उद्घाटन। 
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रिपोर्ट- अम्बरीष कुमार सक्सेना

शाहजहांपुर: विनोबा भावे के सर्वोदयी विचारों से प्रेरित कर्मयोगी परिवार सूरत के पुरुषार्थ से श्री लालचंद भाई जी ज्ञानचंद बजाज विक्रम भाई बजाज बालक छात्रावास का उद्घाटन हुआ। भारत में गुजरात राज्य एक ऐसा प्रदेश है जहां का हर व्यक्ति समाज की मदद के लिए सबसे पहले आगे आता है। गांधी विनोबा के विचारों को आगे बढ़ाने में गुजरात की भूमिका बहुत है। गुरुकुल शिक्षा के प्रति भी।अद्भुत सहानुभूति कर्मयोगी परिवार में दिखी।    

उक्त विचार आचार्य विनोबा के विचारों से प्रेरित  कर्मयोगी परिवार के प्रमुख केशुभाई  हरिभाई गोटी अध्यक्ष मातो श्री गोटी चैरिटेविल ट्रस्ट सूरत ने  गुरुकुल महाविद्यालय रुद्रपुर तिलहर शाहजहांपुर में अपने निर्माण अभियान के 239 वें छात्रावास का उद्घाटन करते हुए व्यक्त किए।उन्होंने कहा कि  मातुश्री ट्रस्ट इस प्रकार के 351 छात्रालय बनवाने का संकल्प किया है।  सभी प्रकल्पों के।लिए सहयोगी दाता निकल कर स्वयं हांथ आगे बढ़ाते हैं।सुदूर गांव के इस  प्रकल्प के सहयोगी दाता विक्रम भाई  बजाज से मेरा कोई सीधा परिचय नहीं है । हम दोनों आज पहली बार मिले हैं। उन्होंने मातुश्री ट्रस्ट पर अपना विश्वास व्यक्त किया और उन्होंने 239 वें सरस्वती धाम  के सहयोगी दाता बनकर पुण्य कमाया है आज वे स्वयं बंबई से यहां चलकर उदघाट्न के निमित्त  आए। उन्होंने यह भी कहा कि गुरुकुल के बच्चे इसमें रहकर अपनी पढ़ाई आगे बढ़ाएंगे। 

 ट्रस्ट के कर्मयोगी जाकर कठिन परिस्थितियों में भी वहीं रहकर निर्माण कराके ही लौटते है। सही अर्थों में तो पुण्य इन सबको ही मिलना चाहिए। सहयोगी बाइब्रेंट इनकॉरपोरेशन एल एल पी मुंबई के प्रमुख विक्रम भाई लालचंद भाई बजाज ने समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि हम केशुभाई और  उनके ट्रस्ट के आभारी हैं कि उन्होंने ऐसे सुदूर इलाके में छात्रालय बनाने का अवसर हमें प्रदान किया है। हम सब गुरुकुल महाविद्यालय के प्रबंधतंत्र को आज छात्रावास बनाकर सौंप रहे है। वे अब इसकी देखभाल और।गुरुकुल।के बच्चों के लिए उपयोग करेंगे।

तिलहर विधायक सलोना कुशवाहा ने कहा कि यह गुरुकुल गांव के बच्चों के लिए   अच्छा काम कर रहा है। यहां के बच्चे खूब पढ़ाई करते हैं। और पढ़ाई करके बहुत आगे भी निकले है। हमारी भारतीय संस्कृति की रक्षा के लिए यहां सुन्दर भरसक प्रयास हो रहा है। हमारा सहयोग निरंतर गुरुकुल को मिलता रहेगा। बंबई से पधारे दिलीप कुमार लालवानी ने कहा कि  मातुश्री ट्रस्ट ने स्थान का सही चुनाव किया है। वास्तव में यहां के छात्रों को उचित आवास की उपलब्धता नहीं थी। इस छात्रावास निर्माण से वह कमी पूरी होगी।            

अतिथि जी एस टी के कमिश्नर डॉ श्याम सुंदर पाठक  ने  बच्चों में संस्कृति के भाव भरने की  अपील की।उन्होंने बच्चों के लिए और कई सुविधाएं बढ़ाने के  लिए अपने हांथ आगे बढ़ाए। जमनालाल बजाज पुरस्कार से सम्मानित विमला  बहन ने कहा कि भारत का हर बच्चा संस्कृति का अनुसरण करके आगे बढ़ता जाए। यहां के बच्चे अपने गुरुजनों से बहुत कुछ सीखे है। इस प्रकार बच्चों के अंदर राष्ट्रीयता के अनेक भाव भरे है। पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष वीरेंद्र पाल सिंह यादव ने कहा कि इन 75 वर्षों में   गुरुकुल ने  बहुत बड़ी यात्रा पार की है। हम तो अपना  जन्मदिन अनेक  वर्षों से यहीं आर्य जनों के बीच आकर प्रसन्नता से मनाते हैं।

एस एस यूनिवर्सिटी के सचिव डॉ अवनीश मिश्र ने  शिक्षा के क्षेत्र में हुई प्रगति को सराहा। भारतीय योग संस्थान के डॉ अवधेश मणि त्रिपाठी ने भी इस  गुरुकुल के शिक्षण की सराहना की। अध्यक्षता वरुण अर्जुन मेडिकल कॉलेज के अध्यक्ष डॉ अशोक अग्रवाल ने करते हुए कहा  कि यह गुरुकुल समाज में और ज्यादा प्रगति करता रहे।  संस्कृत विश्विद्यालय के क्षेत्रीय निरीक्षक ने अपनी शुभकामनाएं दी। संयुक्त निदेशक महोदय ने भी अपनी शुभेक्षा व्यक्त की। कन्नौज के पूर्व सांसद रामबक्स वर्मा जी ने कहा कि हमने इस संस्थान को प्रारंभ से देखा है। शास्त्री जी ने बहुत परिश्रम करके इस वृक्ष को रोपा। रमेश भइया  संस्थापक विनोबा  सेवा आश्रम जिनका एक वर्ष का मौन पूज्य विनोबा जी की मौन स्वर्णजयंती के क्रम में चल रहा है। उन्होंने  अपने आशीर्वाद लिखकर।दिए जिनका वाचन किया गया।

रमेश भइया ने कहा कि गुरुकुल शब्द सुनते ही रामायण महाभारत काल का स्मरण होने लगता है। भारत में शिक्षा की यह बहुत प्राचीन पद्धति है। गुरु के मुख से ही शिक्षा महत्वपूर्ण है। फिर उसके सानिध्य में रहकर शिक्षा प्राप्त करना, यह तो परम सौभाग्य ही माना जाएगा। विद्यार्थी  गुरु का आदर करना सीखते हैं। यह भाव उन्हें समाज में भी अमल करने की प्रेरणा देता है। भारत की संस्कृति में गुरुकुल का बहुत    महत्व माना गया है।            

इस अवसर पर  पतंजलि योगपीठ  हरिद्वार के स्वामी अभिषेक देव जी,डा सुद्दुमन आचार्य जी, जी एस वर्मा,सी ए वैभव भाई सुतरिया, सुरेश शिवानी, कर्मयोगी नाग जी भाई,  ज्योति बहन आदि सैकड़ों लोग यहां उपस्थित रहे। सभी का आभार गुरुकुल महाविद्यालय के व्यवस्थापक प्रणव आर्य ने व्यक्त किया। सभी अतिथियों का स्वागत  वेद मंत्रों की गूंज के साथ डा श्रेष्ठा बहन और डा. श्रद्धा बहन की टीम ने पुष्पवर्षा के साथ किया गया।

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