Moradabad : जाट आरक्षण आंदोलन से जुड़े मुकदमे में सभी आरोपियों को अदालत ने दोषमुक्त कर बरी किया
पांच मार्च 2011 को जाट समुदाय ने केंद्र में आरक्षण की मांग को लेकर अमरोहा के काफूरपुर रेलवे स्टेशन पर रेल रोको आंदोलन शुरू किया था। जाट आरक्षण संघर्ष समिति के अध्यक्ष यशपाल
मुरादाबाद में 2011 के काफूरपुर जाट आरक्षण आंदोलन से जुड़े मुकदमे में सभी आरोपियों को अदालत ने दोषमुक्त कर बरी कर दिया है। बरी होने वालों में अमरोहा की नौगावां सादात सीट से समाजवादी पार्टी के विधायक चौधरी समरपाल सिंह और पूर्व डिप्टी एसपी उमेद सिंह समेत कई प्रमुख जाट नेता शामिल हैं।
पांच मार्च 2011 को जाट समुदाय ने केंद्र में आरक्षण की मांग को लेकर अमरोहा के काफूरपुर रेलवे स्टेशन पर रेल रोको आंदोलन शुरू किया था। जाट आरक्षण संघर्ष समिति के अध्यक्ष यशपाल मलिक के नेतृत्व में हजारों लोग रेलवे ट्रैक पर बैठ गए थे। उन्होंने अपनी गाय-भैंसें भी ट्रैक पर बांध दी थीं और वहीं खाना बनाकर खाया। उस समय उत्तर प्रदेश में बसपा की सरकार थी। प्रशासन ने जाटों की नाराजगी को देखते हुए कोई सख्त कार्रवाई नहीं की। 15 दिन तक ट्रैक बंद रहने से देशभर में परेशानी हुई। बाद में हाईकोर्ट के आदेश पर 19 मार्च 2011 को ट्रैक खाली कराया गया।
हाईकोर्ट के आदेश पर गजरौला आरपीएफ थाने में यशपाल मलिक और 1500 अन्य लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया था। इसमें रेलवे एक्ट की धाराओं के साथ अन्य धाराएं लगाई गईं। इसी मुकदमे में चौधरी समरपाल सिंह का नाम भी था।
मुरादाबाद एसीजेएम कोर्ट में सुनवाई के बाद अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट मनेंद्र पाल सिंह ने सभी आरोपियों को 145, 146, 147, 153, 174, 164/166 रेलवे एक्ट के आरोपों से बरी कर दिया। सभी आरोपी जमानत पर थे। अदालत ने उनके जमानतनामे और बंधपत्र निरस्त कर दिए। अभियुक्तों के अधिवक्ता अनुज कुमार ने बताया कि दोनों पक्षों को सुनने और साक्ष्यों का मूल्यांकन करने के बाद अदालत ने यह फैसला सुनाया।
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