मसूरी के पास नौथा गांव में सीवरेज संकट पर प्रशासन हरकत में, एक हफ्ते में पानी डायवर्ट करने का आश्वासन; ग्रामीणों ने दी चुनाव बहिष्कार की चेतावनी।
मसूरी के करीब 20 किलोमीटर दूर टिहरी जनपद के नौथा गांव में प्राकृतिक स्रोत और नहरों में गिर रहे सीवरेज के पानी की समस्या को लेकर ग्रामीण
रिपोर्टर सुनील सोनकर
मसूरी के करीब 20 किलोमीटर दूर टिहरी जनपद के नौथा गांव में प्राकृतिक स्रोत और नहरों में गिर रहे सीवरेज के पानी की समस्या को लेकर ग्रामीण परेशान है परन्तु संबंधित विभाग और जनप्रतिनिधि ध्यान नहीं दे रहे है जिससे ग्रामीणों में भारी आक्रोश है। नौथा गांव के ग्रामीणों प्रभा देवी, चंपा देवी, मोहन सिंह, प्रेम सिंह,सूरत सिंह, अनिल सिंह ने प्रशासन के सामने अपनी नाराजगी भी खुलकर जाहिर की।
ग्रामीणों ने साफ कहा कि यदि जल्द ही प्राकृतिक स्रोत में आ रहे गंदे पानी को नहीं रोका गया तो वे उग्र आंदोलन के लिए मजबूर होंगे। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर समस्या का समाधान नहीं हुआ तो वर्ष 2027 में होने वाले चुनाव का बहिष्कार भी किया जाएगा। ग्रामीणों का कहना है कि मसूरी से आ रहा सीवरेज का गंदा पानी नहरों के जरिए खेतों तक पहुंच रहा है, जिससे फसलें खराब हो रही हैं और मवेशी भी बीमार पड़ रहे हैं। गांव में फैली बदबू और गंदगी से लोगों का जीवन मुश्किल हो गया है। ग्रामीणों ने बताया कि इस समस्या को लेकर कई बार प्रशासन और संबंधित विभागों को शिकायत की गई, लेकिन लंबे समय तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। उनका आरोप है कि विभागीय लापरवाही के कारण गांव के लोग पलायन तक करने को मजबूर हो रहे हैं। ग्रामीणों ने कहा कि सरकार जहां एक ओर गांवों से पलायन रोकने के लिए योजनाएं चला रही है, वहीं दूसरी ओर इस तरह की लापरवाही ग्रामीणों को गांव छोड़ने पर मजबूर कर रही है। ऐसे में यदि जल्द समाधान नहीं हुआ तो गांव के लोग आंदोलन के साथ-साथ लोकतांत्रिक विरोध के तौर पर चुनाव बहिष्कार भी करेंगे।
अधिशासी अभियंता अमित कुमार ने ग्रामीणों को भरोसा दिलाया कि एक सप्ताह के भीतर एसटीपी प्लांट से निकलने वाले पानी को प्राकृतिक स्रोत से अलग करने के लिए सोकपीट बनाए जाएंगे, ताकि गंदा पानी स्रोत में न मिल सके। उन्होंने बताया कि एसटीपी से निकलने वाले पानी को स्थायी रूप से दूसरी दिशा में डायवर्ट करने के लिए शासन को 67 लाख रुपये का प्रस्ताव भेजा गया है। प्रस्ताव को स्वीकृति मिलते ही इस समस्या का स्थायी समाधान कर दिया जाएगा। वही उन्होने बताया कि एसडीपी प्लांट का संचालन करने वाले ठेकेदार के खिलाफ भी सख्त कार्यवाही कर उसका टेंडर को पिरस्त कर दूसरे ठेकेदार को एसटीपी प्लांट को सचालित करने का कार्य दिया जायेगा। उन्होंने कहा कि ग्रामीणों की परेशानी को देखते हुए तत्काल अस्थायी व्यवस्था के रूप में सोकपीट बनाकर पानी को दूसरी दिशा में मोड़ा जाएगा। साथ ही जल्द ही ग्रामीणों के साथ गढ़वाल जल संस्थान, स्थानीय प्रशासन और जल निगम के अधिकारियों की संयुक्त बैठक भी कराई जाएगी, जिसमें एसटीपी से निकलने वाले पानी का उपयोग पॉलीहाउस और खेती में किस प्रकार किया जा सकता है, इस पर भी चर्चा की जाएगी।
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