ओडिशा के भद्रक में CBI की अब तक की सबसे बड़ी और प्रभावी कार्रवाई, आयकर विभाग के कार्यालय में रिश्वतखोरी के बड़े रैकेट का भंडाफोड़।

ओडिशा के प्रशासनिक और वित्तीय गलियारों में उस समय हड़कंप मच गया जब CBI (सीबीआई) की एक विशेष भ्रष्टाचार निरोधक

Jun 4, 2026 - 12:11
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ओडिशा के भद्रक में CBI की अब तक की सबसे बड़ी और प्रभावी कार्रवाई, आयकर विभाग के कार्यालय में रिश्वतखोरी के बड़े रैकेट का भंडाफोड़।
ओडिशा के भद्रक में CBI की अब तक की सबसे बड़ी और प्रभावी कार्रवाई, आयकर विभाग के कार्यालय में रिश्वतखोरी के बड़े रैकेट का भंडाफोड़।
  • आयकर रिफंड और टीडीएस क्लीयरेंस के एवज में मोटी रकम वसूल रहा था ऑफिस सुपरिटेंडेंट रमेश कुमार महांति, सीबीआई ने जाल बिछाकर किया गिरफ्तार।
  • शिकायतकर्ता की सतर्कता से सलाखों के पीछे पहुंचा भ्रष्ट लोक सेवक, केंद्रीय एजेंसी की छापेमारी में आरोपी के ठिकानों से बेहिसाब संपत्ति के दस्तावेज बरामद।

ओडिशा के प्रशासनिक और वित्तीय गलियारों में उस समय हड़कंप मच गया जब CBI (सीबीआई) की एक विशेष भ्रष्टाचार निरोधक टीम ने भद्रक जिले में स्थित आयकर विभाग के कार्यालय पर अचानक धावा बोल दिया। यह पूरी कार्रवाई भ्रष्टाचार के खिलाफ शून्य सहिष्णुता की नीति के तहत की गई, जिसने सरकारी दफ्तरों में बैठे भ्रष्ट अधिकारियों के बीच डर का माहौल पैदा कर दिया है। केंद्रीय एजेंसी को काफी समय से इनपुट मिल रहे थे कि भद्रक के आयकर कार्यालय में आम करदाताओं और स्थानीय व्यवसायियों को विभिन्न तकनीकी प्रक्रियाओं के नाम पर परेशान किया जा रहा है और उनसे अवैध रूप से मोटी रकम की उगाही की जा रही है। इसी सिलसिले में सीबीआई की भुवनेश्वर इकाई ने एक ठोस और पुख्ता रणनीति तैयार की, ताकि इस भ्रष्ट तंत्र के मुख्य चेहरे को कानून के शिकंजे में कसा जा सके और सरकारी विभागों की शुचिता को बहाल किया जा सके।

इस हाई-प्रोफाइल भ्रष्टाचार के मामले में पकड़े गए मुख्य आरोपी की आधिकारिक पहचान आयकर कार्यालय, भद्रक के ऑफिस सुपरिटेंडेंट रमेश कुमार महांति के रूप में हुई है। महांति लंबे समय से इस कार्यालय में कार्यरत थे और उनके पास प्रशासनिक व वित्तीय फाइलों के निस्तारण की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी थी। जांच के दौरान यह बात सामने आई है कि वे अपने पद और प्रभाव का दुरुपयोग करके करदाताओं के वैध कामों को अटकाने और उनके बदले वित्तीय लाभ उठाने के आदी हो चुके थे। उनके खिलाफ एक स्थानीय नागरिक ने सीधे केंद्रीय जांच एजेंसी से संपर्क किया था, जिसके बाद इस पूरे आपराधिक कृत्य का आधिकारिक तौर पर संज्ञान लिया गया और बिना कोई समय गंवाए एक गोपनीय एफआईआर दर्ज करके जाल बिछाने की प्रक्रिया शुरू की गई।

यह पूरा मामला एक स्थानीय करदाता के आयकर रिफंड और टीडीएस (स्रोत पर कर कटौती) से जुड़े दस्तावेजों को मंजूरी देने से संबंधित था। शिकायतकर्ता ने वित्तीय वर्ष के दौरान नियमानुसार अपने टैक्स का भुगतान किया था, लेकिन उसका एक बड़ा रिफंड विभाग के पास अटका हुआ था। जब वह इस सिलसिले में भद्रक कार्यालय के चक्कर काट रहा था, तब ऑफिस सुपरिटेंडेंट रमेश कुमार महांति ने फाइल को आगे बढ़ाने और रिफंड की राशि को जल्द से जल्द बैंक खाते में ट्रांसफर करवाने के एवज में एक निश्चित प्रतिशत के हिसाब से रिश्वत की मांग की। शिकायतकर्ता इस अवैध मांग के आगे झुकना नहीं चाहता था और उसने इस भ्रष्टाचार को समाज के सामने लाने का साहसिक फैसला किया, जिसके बाद केंद्रीय एजेंसी की विशेष विंग हरकत में आई।

  • केमिकल पाउडर से हुआ अपराध सिद्ध

सीबीआई की टीम ने आरोपी को रंगे हाथों पकड़ने के लिए एक विशेष वैज्ञानिक पद्धति का इस्तेमाल किया। शिकायतकर्ता को दिए गए नोटों पर 'फिनाफ्थलीन' नामक एक अदृश्य रासायनिक पाउडर लगाया गया था। जैसे ही भद्रक कार्यालय के भीतर रमेश कुमार महांति ने अपनी दराज से हाथ निकालकर रिश्वत की वह रकम पकड़ी और उसे छुपाने की कोशिश की, वैसे ही सादे कपड़ों में मुस्तैद सीबीआई अधिकारियों ने उन्हें दबोच लिया। इसके बाद जब आरोपी के हाथों को सोडियम कार्बोनेट के घोल में डुलवाया गया, तो पानी का रंग तुरंत गुलाबी हो गया, जो कानून की अदालत में घूसखोरी का सबसे पुख्ता और अकाट्य वैज्ञानिक प्रमाण माना जाता है।

सीबीआई के जांबाज़ अधिकारियों ने इस पूरे ऑपरेशन को इतनी गोपनीयता और चपलता से अंजाम दिया कि आयकर विभाग के अन्य कर्मचारियों और अधिकारियों को भनक तक नहीं लगी। जैसे ही पैसे का लेन-देन पूरा हुआ, पहले से घेराबंदी करके खड़े अधिकारियों ने महांति को उनकी कुर्सी पर ही दबोच लिया और उनके पास से रिश्वत की पूरी राशि बरामद कर ली। इसके तुरंत बाद दफ्तर के मुख्य द्वारों को बंद कर दिया गया और सभी फाइलों को कब्जे में ले लिया गया। इस त्वरित कार्रवाई के कारण आरोपी को अपने बचाव या साक्ष्यों को नष्ट करने का तनिक भी अवसर नहीं मिला। दफ्तर में मौजूद अन्य सहकर्मियों से भी इस संदर्भ में पूछताछ की जा रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि इस अवैध वसूली में दफ्तर के अन्य किन लोगों की संलिप्तता थी।

कार्यालय में रंगे हाथों गिरफ्तारी के तुरंत बाद सीबीआई की अलग-अलग टीमों ने रमेश कुमार महांति के पैतृक आवास और अन्य अचल संपत्तियों पर एक साथ छापेमारी शुरू कर दी। भद्रक और भुवनेश्वर सहित उनके विभिन्न ठिकानों पर देर रात तक चली इस तलाशी के दौरान भारी मात्रा में नकदी, सोने के आभूषण और महंगे जमीनों के दस्तावेज बरामद किए गए हैं। शुरुआती जांच से संकेत मिलते हैं कि महांति ने अपनी वैध आय के स्रोतों से कहीं अधिक संपत्ति अर्जित कर रखी थी, जिसकी बाजार दर करोड़ों रुपये आंकी जा रही है। जांच एजेंसी अब उनके बैंक खातों, फिक्स्ड डिपॉजिट और पारिवारिक निवेशों की गहनता से स्क्रूटनी कर रही है ताकि आय से अधिक संपत्ति का एक अलग और मजबूत मुकदमा भी दर्ज किया जा सके।

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