वाराणसी: गंगा नदी में नाव पर मांस पकाने और शराब पार्टी का वीडियो वायरल, 5 गिरफ्तार, बीजेपी पार्षद से जुड़ा लिंक
वाराणसी के दशाश्वमेध घाट पर गंगा नदी में नाव पर मांस पकाने और शराब पार्टी करने का वीडियो वायरल हुआ है। पुलिस ने पांच आरोपियों को गिरफ्तार कर नाव सीज की।
- Varanasi News: दशाश्वमेध घाट पर गंगा के बीचोबीच चिकन-शराब पार्टी, पुलिस ने नाव सीज कर आरोपियों को दबोचा
- वाराणसी के दशाश्वमेध घाट पर नाव पर शराब और मीट पार्टी का वीडियो वायरल, पुलिस एक्शन में
- वाराणसी: पवित्र गंगा नदी में शराब पार्टी और मांस पकाने का वीडियो वायरल, पुलिस ने 5 लोगों को किया गिरफ्तार
उत्तर प्रदेश के वाराणसी में धार्मिक आस्था के केंद्र दशाश्वमेध घाट के पास पवित्र गंगा नदी के बीचोबीच एक नाव पर मांस पकाने और शराब पार्टी करने का सनसनीखेज मामला सामने आया है। हाल ही में इस घटना का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से प्रसारित होने के बाद स्थानीय लोगों और तीर्थयात्रियों में भारी आक्रोश फैल गया। वाराणसी पुलिस ने मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए त्वरित कानूनी कार्रवाई की है, जिसके तहत पांच आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया है और घटना में इस्तेमाल की गई नाव को सीज कर दिया गया है। वायरल वीडियो के साथ प्रसारित संदेशों में इस नाव का संबंध भारतीय जनता पार्टी (BJP) के एक स्थानीय पार्षद से होने का दावा किया जा रहा है। आने वाले दिनों में पुलिस इस बात की गहराई से पड़ताल करेगी कि इस कृत्य में और कौन लोग शामिल थे और क्या नाव मालिक की इस पार्टी में प्रत्यक्ष भूमिका थी।
आध्यात्मिक नगरी काशी में गंगा नदी को अत्यंत पवित्र और पूजनीय माना जाता है, जहां किसी भी प्रकार के मांसाहार या मदिरापान पर पूर्ण प्रतिबंध है। इसके बावजूद, कुछ असामाजिक तत्वों द्वारा दशाश्वमेध घाट के पास बहती गंगा की धारा में एक नाव के ऊपर चूल्हा जलाकर चिकन पकाने और सरेआम शराब परोसने की घटना को अंजाम दिया गया। इस पूरे कृत्य का वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर डाल दिया गया, जिससे सनातन धर्म की मान्यताओं को ठेस पहुंचने का आरोप लगाते हुए स्थानीय लोगों ने विरोध दर्ज कराया। पुलिस प्रशासन ने इंटरनेट पर वीडियो का संज्ञान लेते हुए इसे धार्मिक भावनाओं और स्थानीय नियमों का गंभीर उल्लंघन माना है।
प्राप्त विवरण के अनुसार, कुछ युवक दशाश्वमेध घाट से एक नाव किराए पर या किसी माध्यम से लेकर गंगा नदी के बीच पहुंचे थे। वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि चलती नाव पर ही कड़ाही चढ़ाकर मांस तैयार किया जा रहा था और साथ ही शराब के गिलास परोसे जा रहे थे। इस दौरान घाट के आसपास मौजूद अन्य लोगों या नाव पर सवार किसी व्यक्ति ने इस अभद्र आचरण का वीडियो रिकॉर्ड कर लिया।
जैसे ही यह वीडियो सोशल मीडिया के विभिन्न प्लेटफॉर्म्स पर प्रसारित हुआ, वाराणसी के प्रबुद्ध नागरिकों और तीर्थ पुरोहितों ने इस पर कड़ी आपत्ति जताई। वीडियो के वायरल होते ही पुलिस मुख्यालय हरकत में आया और दशाश्वमेध थाना पुलिस को तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए गए। पुलिस ने सर्विलांस और स्थानीय इनपुट के आधार पर त्वरित छापेमारी करते हुए इस पार्टी में शामिल पांच मुख्य आरोपियों को चिन्हित कर हिरासत में ले लिया। इसके साथ ही, परिवहन और धार्मिक नियमों के उल्लंघन के आरोप में उस नाव को भी जब्त (सीज) कर लिया गया है जिस पर यह पूरा घटनाक्रम चल रहा था।
चूंकि सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे मैसेज में इस नाव का कनेक्शन सत्ताधारी दल बीजेपी के एक स्थानीय पार्षद से जोड़ा जा रहा है, इसलिए इस मामले ने राजनीतिक तूल भी पकड़ लिया है। विपक्षी दलों और स्थानीय सामाजिक संगठनों ने इस घटना की तीखी निंदा करते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की है।
इस मामले पर वाराणसी पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों ने संतुलित प्रतिक्रिया देते हुए कहा:
"सोशल मीडिया पर गंगा नदी में नाव पर अमर्यादित कृत्य का वीडियो सामने आने के बाद तुरंत प्राथमिकी दर्ज की गई थी। कानून व्यवस्था और धार्मिक संवेदनशीलता को ध्यान में रखते हुए पांच व्यक्तियों को गिरफ्तार किया गया है। नाव को सीज कर दिया गया है। वीडियो के साथ चल रहे दावों और नाव के मालिकाना हक की जांच की जा रही है। आरोपी चाहे किसी भी पृष्ठभूमि का हो, कानून के मुताबिक सख्त कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।"
वहीं, बीजेपी से जुड़े स्थानीय सूत्रों का कहना है कि पार्टी ऐसी किसी भी अमर्यादित गतिविधि का समर्थन नहीं करती है और यदि नाव किसी कार्यकर्ता या प्रतिनिधि की पाई भी जाती है, तो भी कानून को अपना काम करने की पूरी स्वतंत्रता है।
काशी के घाटों पर हर साल लाखों की संख्या में श्रद्धालु देश-विदेश से आते हैं। गंगा नदी में इस तरह की गतिविधियों से न केवल स्थानीय घाटों की पवित्रता प्रभावित होती है, बल्कि पर्यटन और धार्मिक छवि पर भी नकारात्मक असर पड़ता है। घटना के बाद दशाश्वमेध घाट और आसपास के क्षेत्रों में गश्त बढ़ा दी गई है। नाविक संघों ने भी इस घटना पर दुख व्यक्त किया है और अपने सदस्यों से अपील की है कि वे किसी भी यात्री को नाव पर ऐसी सामग्री ले जाने की अनुमति न दें जिससे शहर की मर्यादा धूमिल हो।
गिरफ्तार किए गए पांचों आरोपियों को अदालत में पेश करने की कानूनी प्रक्रिया चल रही है। पुलिस इस बात की जांच कर रही है कि क्या इन युवकों का कोई पुराना आपराधिक इतिहास है या उन्होंने यह कृत्य केवल मनोरंजन और सोशल मीडिया पर पब्लिसिटी पाने के लिए किया था। इसके अलावा, नाव के पंजीकरण दस्तावेजों की जांच की जा रही है ताकि यह स्पष्ट हो सके कि नाव का वास्तविक मालिक कौन है और क्या उसे इस बात की जानकारी थी कि उसकी नाव का उपयोग किस कार्य के लिए किया जा रहा है। जल पुलिस को भी निर्देश दिए गए हैं कि वे भविष्य में नदी के बीच में होने वाली हर गतिविधि पर पैनी नजर रखें।
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