PM Surya Ghar Yojana: पीएम सूर्य घर योजना में यूपी का जलवा, महाराष्ट्र को पछाड़कर देश में हासिल किया दूसरा स्थान

UP PM Surya Ghar Yojana: उत्तर प्रदेश ने पीएम सूर्य घर योजना में महाराष्ट्र को पीछे छोड़कर दूसरा स्थान हासिल किया है। राज्य में 6.74 लाख से अधिक घरों पर सोलर पैनल लगे हैं।

By INA News Desk
Jul 17, 2026 - 22:06
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PM Surya Ghar Yojana: पीएम सूर्य घर योजना में यूपी का जलवा, महाराष्ट्र को पछाड़कर देश में हासिल किया दूसरा स्थान

उत्तर प्रदेश ने स्वच्छ ऊर्जा और आत्मनिर्भरता की दिशा में कदम बढ़ाते हुए एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में राज्य ने प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना के तहत छतों पर सोलर पैनल (घरेलू रूफटॉप सोलर) लगाने के मामले में महाराष्ट्र को पीछे छोड़ दिया है। इस बड़ी कामयाबी के साथ उत्तर प्रदेश अब देश में दूसरे पायदान पर पहुंच गया है। ताज़ा आंकड़ों के मुताबिक, राज्य में अब तक 6,74,393 घरों की छतों पर सौर ऊर्जा संयंत्र स्थापित किए जा चुके हैं। इस राष्ट्रीय रैंकिंग में गुजरात पहले स्थान पर बना हुआ है, जबकि महाराष्ट्र अब खिसक कर तीसरे स्थान पर आ गया है। इस योजना को तेजी से लागू करने के लिए उत्तर प्रदेश में बेहतर तालमेल और बैंक ऋण की आसान प्रक्रियाओं के साथ लगातार काम किया गया है।

यूपी नेडा के निदेशक रविन्दर सिंह ने जानकारी देते हुए बताया कि इस तेज विस्तार से राज्य में 2,283.8 मेगावाट यानी करीब 2.28 गीगावाट सौर ऊर्जा की क्षमता तैयार हो चुकी है। इस नई व्यवस्था से लाखों परिवारों की पारंपरिक बिजली पर निर्भरता कम हुई है और उनके हर महीने आने वाले बिजली बिल में भारी कमी दर्ज की गई है। अनुमान के मुताबिक, सूबे के परिवारों को हर दिन लगभग 6.5 करोड़ रुपये की मुफ्त बिजली का फायदा मिल रहा है। उपभोक्ता अब सिर्फ बिजली का इस्तेमाल ही नहीं कर रहे, बल्कि खुद बिजली बनाकर अतिरिक्त उत्पादन को मुख्य ग्रिड में वापस भी भेज रहे हैं।

इस योजना के बड़े पैमाने पर फैलने से राज्य में एक मजबूत सौर बाजार तैयार हुआ है। इस क्षेत्र से जुड़ी 7,000 से अधिक कंपनियां सक्रिय रूप से काम कर रही हैं, जिससे लगभग 85,000 से अधिक लोगों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष तौर पर काम मिला है। पैनल लगाने से लेकर उनके सर्वे, डिजाइन, बिजली के काम और देखरेख के क्षेत्र में युवाओं और स्थानीय कारीगरों के लिए रोजगार की एक बड़ी चेन बन गई है। इसके साथ ही इनवर्टर, तार और सोलर मॉड्यूल बनाने वाले छोटे उद्योगों (एमएसएमई) को भी भारी मांग मिल रही है, जो औद्योगिक विकास को नई रफ्तार दे रही है।

पर्यावरण के लिहाज से भी यह कदम बेहद फायदेमंद साबित हो रहा है। छतों का इस्तेमाल होने की वजह से लगभग 9,000 एकड़ से अधिक उपजाऊ भूमि की बचत हुई है, जिसका उपयोग कृषि या अन्य जरूरी विकास कार्यों में किया जा सकेगा। इसके अलावा, इस पूरी स्थापित क्षमता से हर साल करीब 3.8 अरब यूनिट स्वच्छ बिजली का उत्पादन होगा, जिससे सालाना 27 लाख टन से अधिक कार्बन डाइऑक्साइड के फैलाव को रोका जा सकेगा। यह पर्यावरणीय बदलाव देश के बड़े लक्ष्यों को पूरा करने और प्रदूषण को कम करने में एक बड़ा मददगार साबित हो रहा है।

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