BSP to Zero in UP Assembly: बसपा को लगा अब तक का सबसे बड़ा झटका, इकलौते विधायक उमाशंकर सिंह नहीं रहे
यूपी में बसपा के इकलौते विधायक उमाशंकर सिंह का 55 वर्ष की उम्र में दिल्ली के फोर्टिस अस्पताल में निधन हो गया। उनके निधन से पार्टी का विधानसभा में प्रतिनिधित्व समाप्त हो गया है।
- Uma Shankar Singh Passed Away: यूपी में बसपा को बड़ा झटका, इकलौते विधायक उमाशंकर सिंह का निधन
- BSP MLA Uma Shankar Singh Death: दिल्ली में बसपा विधायक उमाशंकर सिंह का निधन, यूपी विधानसभा में पार्टी का प्रतिनिधित्व शून्य
- BSP MLA Uma Shankar Singh Passes Away: बसपा के इकलौते विधायक उमाशंकर सिंह का निधन, दिल्ली के फोर्टिस अस्पताल में ली अंतिम सांस
उत्तर प्रदेश की राजनीति और बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के लिए एक बेहद दुखद खबर सामने आई है। बलिया जिले की रसड़ा विधानसभा सीट से बसपा के वरिष्ठ नेता और राज्य विधानसभा में पार्टी के इकलौते विधायक उमाशंकर सिंह का निधन हो गया है। 55 वर्षीय उमाशंकर सिंह ने दिल्ली स्थित फोर्टिस अस्पताल में इलाज के दौरान अंतिम सांस ली। वह पिछले कुछ समय से अस्वस्थ चल रहे थे और अस्पताल में भर्ती थे। उनके अचानक चले जाने से पूरे राज्य के राजनीतिक गलियारों में शोक की लहर दौड़ गई है। इस दुखद घटना के साथ ही उत्तर प्रदेश विधानसभा में बहुजन समाज पार्टी की मौजूदगी अब शून्य हो गई है, जो पार्टी के लिए एक बहुत बड़ा सांगठनिक और राजनीतिक झटका है। आगे उनके पार्थिव शरीर को अंतिम दर्शन और अंतिम संस्कार के लिए उनके गृह जनपद लाने की तैयारी की जा रही है।
उत्तर प्रदेश के राज्य विधानमंडल के इतिहास और बहुजन समाज पार्टी के राजनीतिक सफर में एक दुखद अध्याय जुड़ गया है। रसड़ा विधानसभा क्षेत्र से लगातार विधायक चुने जाते आ रहे बसपा नेता उमाशंकर सिंह का 55 वर्ष की आयु में निधन हो गया। दिल्ली के फोर्टिस अस्पताल में डॉक्टरों के तमाम प्रयासों के बावजूद उन्हें बचाया नहीं जा सका। उमाशंकर सिंह उत्तर प्रदेश की 18वीं विधानसभा में बहुजन समाज पार्टी के एकमात्र प्रतिनिधि थे। वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव में जब राज्य में बसपा का प्रदर्शन काफी निराशाजनक रहा था, तब उमाशंकर सिंह ने अकेले अपनी साख और जनसमर्थन के बल पर रसड़ा सीट जीतकर विधानसभा में पार्टी का परचम लहराया था। उनके निधन से न केवल बलिया और रसड़ा क्षेत्र ने अपना एक लोकप्रिय जननेता खो दिया है, बल्कि बसपा ने विधानसभा के भीतर अपनी इकलौती और सबसे मजबूत आवाज भी गंवा दी है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, उमाशंकर सिंह पिछले कुछ समय से गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहे थे। तबीयत अधिक बिगड़ने पर उन्हें बेहतर इलाज के लिए राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के फोर्टिस अस्पताल में भर्ती कराया गया था। अस्पताल में विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम उनकी देखरेख कर रही थी। हालांकि, स्वास्थ्य में सुधार न होने के कारण उन्होंने अस्पताल में अंतिम सांस ली।
उमाशंकर सिंह की गिनती बहुजन समाज पार्टी के सबसे विश्वसनीय और निष्ठावान नेताओं में होती थी। वह पहली बार वर्ष 2012 में बसपा के टिकट पर रसड़ा विधानसभा क्षेत्र से विधायक चुने गए थे। इसके बाद वर्ष 2017 और फिर 2022 के चुनावों में भी उन्होंने लगातार जीत हासिल की। राजनीतिक हवा चाहे जिस दिशा में रही हो, उमाशंकर सिंह ने अपने क्षेत्र पर अपनी पकड़ हमेशा मजबूत रखी। यही कारण था कि 2022 के चुनावों में प्रचंड लहरों के बावजूद वह अपनी सीट बचाने में सफल रहे थे। उनके निधन की खबर जैसे ही बलिया और लखनऊ पहुंची, समर्थकों और पार्टी कार्यकर्ताओं में गहरा शोक व्याप्त हो गया। उमाशंकर सिंह के असमय निधन पर विभिन्न राजनीतिक दलों के दिग्गजों और सामाजिक हस्तियों ने गहरा शोक व्यक्त किया है।
बहुजन समाज पार्टी की सर्वोच्च नेता और उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने उनके निधन पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए इसे पार्टी के लिए एक अपूरणीय क्षति बताया है। उन्होंने परिजनों के प्रति अपनी संवेदना प्रकट करते हुए उमाशंकर सिंह के पार्टी के प्रति योगदान को याद किया।
उत्तर प्रदेश के राजनीतिक क्षेत्र के अन्य प्रमुख नेताओं, जिनमें सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों के प्रतिनिधि शामिल हैं, ने भी उमाशंकर सिंह को श्रद्धांजलि दी है। नेताओं ने उन्हें एक मिलनसार, जनसेवक और अपने क्षेत्र के विकास के लिए समर्पित रहने वाला प्रतिनिधि करार दिया। विधानसभा अध्यक्ष और विभिन्न दलीय नेताओं ने भी उनके निधन पर शोक संवेदना संदेश जारी किए हैं। उमाशंकर सिंह के जाने का प्रभाव बहुजन समाज पार्टी की आंतरिक और बाहरी दोनों तरह की राजनीति पर बेहद गहरा पड़ने वाला है।
विधानसभा में शून्य प्रतिनिधित्व: उत्तर प्रदेश की राजनीति में दशकों तक शीर्ष पर रहने वाली और राज्य में पूर्ण बहुमत की सरकार बना चुकी बहुजन समाज पार्टी का अब 403 सदस्यीय उत्तर प्रदेश विधानसभा में कोई विधायक नहीं बचा है। यह बसपा के राजनीतिक इतिहास में एक अभूतपूर्व स्थिति है।
बलिया और रसड़ा की राजनीति पर असर: रसड़ा क्षेत्र में उमाशंकर सिंह का व्यक्तिगत प्रभाव काफी अधिक था। उनकी छवि एक ऐसे नेता की थी जो दलीय सीमाओं से परे जाकर अपने क्षेत्र के लोगों की मदद के लिए तत्पर रहते थे। उनके जाने से रसड़ा में एक बड़ा राजनीतिक शून्य पैदा हो गया है जिसे भरना किसी भी दल के लिए आसान नहीं होगा।
उपचुनाव का समीकरण: उमाशंकर सिंह के निधन के बाद अब रसड़ा विधानसभा सीट रिक्त हो गई है। नियमानुसार इस सीट पर आगामी समय में उपचुनाव कराया जाएगा। इस सीट पर होने वाला उपचुनाव बसपा के लिए अपनी साख बचाने की एक बड़ी चुनौती होगा, वहीं अन्य प्रमुख राजनीतिक दल भी इस सीट को अपने पाले में करने के लिए पूरी ताकत झोंकेंगे।
उमाशंकर सिंह के पार्थिव शरीर को दिल्ली से उनके गृह जनपद बलिया ले जाने की प्रक्रिया पूरी की जा रही है। उनके पैतृक निवास पर अंतिम दर्शनों के लिए समर्थकों, क्षेत्रीय नागरिकों और पार्टी कार्यकर्ताओं का हुजूम जुटने की संभावना है। इसके पश्चात पूरे राजकीय सम्मान और धार्मिक रीति-रिवाजों के अनुसार उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा।
दूसरी ओर, इस दुखद घटना के बाद उत्तर प्रदेश विधानसभा सचिवालय नियमानुसार रसड़ा सीट को रिक्त अधिसूचित करने की प्रक्रिया शुरू करेगा। इस संबंध में भारत निर्वाचन आयोग को सूचना भेजी जाएगी, जिसके बाद चुनाव आयोग रसड़ा सीट पर उपचुनाव की तिथियों का निर्णय करेगा। बसपा के दृष्टिकोण से देखें तो पार्टी नेतृत्व को अब न केवल विधानसभा के बाहर अपनी सांगठनिक संरचना को मजबूत करना होगा, बल्कि आने वाले उपचुनाव में अपनी उपस्थिति दर्ज कराने के लिए नए और मजबूत नेतृत्व की तलाश भी करनी होगी।
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