Mayawati Action on Akash Anand: ससुर अशोक सिद्धार्थ के संन्यास के बाद मायावती का बड़ा एक्शन, आकाश आनंद को बसपा से किया 'मुक्त'

BSP Chief Mayawati on Akash Anand: ससुर अशोक सिद्धार्थ के संन्यास के बाद मायावती ने आकाश आनंद को बसपा से पूरी तरह मुक्त कर दिया है। जानिए क्या है पूरा सियासी घटनाक्रम।

By INA News Desk
Sep 10, 2026 - 15:23
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Mayawati Action on Akash Anand: ससुर अशोक सिद्धार्थ के संन्यास के बाद मायावती का बड़ा एक्शन, आकाश आनंद को बसपा से किया 'मुक्त'
बसपा सुप्रीमो मायावती और उनके भतीजे आकाश आनंद की फाइल तस्वीर
  • BSP Crisis: अशोक सिद्धार्थ के राजनीति से संन्यास को मायावती ने बताया 'देर से उठाया कदम', भतीजे आकाश आनंद पर गिरी गाज
  • बसपा में बड़ा सियासी भूचाल: ससुर अशोक सिद्धार्थ के संन्यास के तुरंत बाद मायावती ने आकाश आनंद को पार्टी से किया पूरी तरह 'मुक्त' 
  • BSP Big Breaking: मायावती ने भतीजे आकाश आनंद को बसपा से किया 'मुक्त', ससुर के संन्यास के बाद उठाया कड़ा कदम

बहुजन समाज पार्टी (बसपा) में चल रही अंदरूनी खींचतान के बीच पार्टी प्रमुख मायावती ने गुरुवार, 10 सितंबर 2026 को एक बार फिर कड़ा रुख अख्तियार किया है। पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने अपने भतीजे आकाश आनंद के ससुर और पूर्व राज्यसभा सांसद अशोक सिद्धार्थ द्वारा राजनीति एवं सामाजिक जीवन से संन्यास लेने की घोषणा को 'देरी से उठाया गया कदम' करार दिया। इसके कुछ ही घंटों के भीतर बसपा सुप्रीमो ने आकाश आनंद को भी बहुजन समाज पार्टी से पूरी तरह 'मुक्त' करने का सार्वजनिक ऐलान कर दिया। मायावती के अनुसार, पारिवारिक मोह और व्यक्तिगत हितों को आंदोलन से ऊपर रखने के चलते संगठन के हित में यह फैसला लिया गया है। उत्तर प्रदेश के आगामी विधानसभा चुनाव की तैयारियों के बीच पार्टी के भीतर हुए इस अप्रत्याशित उलटफेर से राज्य का सियासी तापमान अचानक चढ़ गया है। 

बहुजन समाज पार्टी के शीर्ष नेतृत्व में लंबे समय से सुलग रहा पारिवारिक व संगठनात्मक विवाद गुरुवार को खुलकर सामने आ गया। बसपा अध्यक्ष मायावती ने एक लंबा आधिकारिक बयान जारी करते हुए अपने भतीजे और पूर्व नेशनल कोऑर्डिनेटर आकाश आनंद को पार्टी के सभी बंधनों और जिम्मेदारियों से पूरी तरह अलग यानी 'मुक्त' करने की घोषणा कर दी।

यह कार्रवाई आकाश आनंद के ससुर और निष्कासित वरिष्ठ नेता डॉ. अशोक सिद्धार्थ द्वारा सक्रिय राजनीति व सामाजिक जीवन को हमेशा के लिए अलविदा कहने के चंद घंटों बाद सामने आई। मायावती ने सिद्धार्थ के संन्यास को 'देर से लिया गया फैसला' बताते हुए कहा कि यदि उन्हें अपने दामाद के राजनीतिक भविष्य और बहुजन मिशन की वास्तविक फिक्र होती तो वे यह निर्णय पहले ही ले लेते। मायावती ने यह भी स्पष्ट किया कि दोहरे रवैये और पारिवारिक मोह के साथ पार्टी व मिशन का भला नहीं किया जा सकता।

  • पारिवारिक रिश्तों और बहुजन आंदोलन के बीच टकराव

बसपा सुप्रीमो ने अपने सार्वजनिक संदेश में सीधे तौर पर संकेत दिया कि पार्टी और मिशन किसी भी व्यक्ति या उसके पारिवारिक संबंधों से कहीं अधिक बड़े हैं। उन्होंने साफ किया कि संगठन ने जिन नेताओं को फर्श से अर्श तक पहुंचाया, उन्हें अपनी व्यक्तिगत महत्वाकांक्षाओं को किनारे रखना चाहिए था। आकाश आनंद द्वारा ससुर के प्रति दिखाई गई कथित निष्ठा को अनुशासनहीनता और आंदोलन के प्रति असमर्पण के रूप में देखा गया, जिसके चलते आखिरकार उन्हें पार्टी से पूरी तरह किनारे करने का रास्ता चुना गया।

इस पूरे राजनीतिक घटनाक्रम की पटकथा पिछले कुछ दिनों से तेजी से लिखी जा रही थी। बहुजन समाज पार्टी ने 3 सितंबर को लखनऊ में आयोजित राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में आकाश आनंद को नेशनल कोऑर्डिनेटर के अहम पद से हटा दिया था। उस वक्त मायावती ने कहा था कि आकाश को अभी राजनीतिक परिपक्वता हासिल करने के लिए और वक्त की जरूरत है। इससे पहले 2 अगस्त को आकाश आनंद के ससुर अशोक सिद्धार्थ को पार्टी विरोधी गतिविधियों के आरोप में बसपा से निष्कासित किया जा चुका था।

इसके बाद 9 सितंबर को मायावती ने सार्वजनिक तौर पर एक शर्त रखी थी कि यदि अशोक सिद्धार्थ अपने राजनीतिक हितों को त्यागकर पूरी तरह संन्यास ले लेते हैं, तभी पार्टी आकाश आनंद की जिम्मेदारियों को बहाल करने पर सहानुभूतिपूर्वक विचार करेगी। इस शर्त के दबाव में गुरुवार सुबह अशोक सिद्धार्थ ने भावुक पत्र जारी करते हुए राजनीति और सामाजिक जीवन से तत्काल प्रभाव से संन्यास की घोषणा कर दी। उन्होंने अपने बयान में कहा कि उनके लिए बहनजी का आदेश सर्वोच्च है और वे बसपा के लिए अपनी जान भी दे सकते हैं।

हालांकि, अशोक सिद्धार्थ के इस त्याग के बावजूद बात नहीं बनी। मायावती ने अपने नए बयान में आरोप लगाया कि आकाश आनंद अपने ससुर के प्रभाव से पूरी तरह बाहर नहीं निकल पाए और उन्होंने पार्टी के आधिकारिक संदेशों के प्रति वैसा समर्पण नहीं दिखाया जैसी अपेक्षा थी। इसके बाद उन्होंने आकाश को पूरी तरह स्वतंत्र करते हुए पार्टी से बाहर का रास्ता दिखा दिया।

  • संगठन में नए चेहरों की एंट्री और पावर बैलेंस

आकाश आनंद को हाशिए पर धकेलने के समानांतर मायावती ने संगठन में संतुलन साधने के लिए नए विकल्प तैयार करना शुरू कर दिया था। हाल ही में आकाश के छोटे भाई ईशान आनंद को मुख्य सेक्टर प्रभारी की अहम जिम्मेदारी सौंपी गई थी। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि पार्टी के कैडर को एकजुट रखने और युवा चेहरे की भरपाई के लिए यह बदलाव किया गया, जिससे यह संदेश साफ हो गया कि परिवार के किसी एक सदस्य पर नेतृत्व निर्भर नहीं रहेगा।

इस अप्रत्याशित फैसले के बाद बसपा सुप्रीमो मायावती ने तीखा प्रहार करते हुए कहा कि पार्टी ने आकाश आनंद और अशोक सिद्धार्थ दोनों को जमीन से उठाकर शीर्ष तक पहुंचाया। जब कोई व्यक्ति पार्टी और अपने राजनीतिक करियर की तुलना में नाते-रिश्तेदारों को अधिक प्राथमिकता देने लगे, तो उसका दोमुंहा रुख मिशन को नुकसान पहुंचाता है।

वहीं, संन्यास की घोषणा करते हुए पूर्व सांसद अशोक सिद्धार्थ ने कहा था कि उन्होंने पिछले 35 वर्षों तक कांशीराम और मायावती के मार्गदर्शन में पूरी निष्ठा से काम किया है। उन्होंने इस बात का खंडन किया कि उन्होंने आकाश आनंद को गुमराह करने या संगठन में समानांतर सत्ता चलाने की कोशिश की। दूसरी ओर, आकाश आनंद की तरफ से इस निष्कासन पर कोई औपचारिक पलटवार नहीं आया है, लेकिन हाल ही में उनके सोशल मीडिया हैंडल पर पद हटाए जाने के बाद उनके बदले रुख की चर्चा सियासी हलकों में जोरों पर रही। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि मायावती ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि बसपा में अनुशासन और एकछत्र नेतृत्व के आगे कोई भी रिश्तेदार सुरक्षित नहीं है।

दलित युवाओं में असमंजस: आकाश आनंद को बसपा के युवा और आक्रामक चेहरे के रूप में प्रस्तुत किया जा रहा था। उनके बार-बार बाहर होने और लौटने के सिलसिले से जमीनी स्तर के युवा कार्यकर्ताओं का मनोबल प्रभावित हो सकता है।

विरोधी दलों को मौका: आजाद समाज पार्टी के चंद्रशेखर आजाद और समाजवादी पार्टी जैसे दल बसपा के इस अंतर्कलह का फायदा उठाकर दलित वोट बैंक में अपनी पैठ गहरी करने की कोशिश तेज करेंगे।

विधानसभा चुनाव की रणनीति: उत्तर प्रदेश सहित उत्तराखंड और पंजाब विधानसभा चुनावों से पहले पार्टी के भीतर इस प्रकार की अस्थिरता चुनावी तैयारियों की गति को धीमा कर सकती है।

कैडर में अनुशासन का कड़ा संदेश: दूसरी तरफ, इस फैसले से मायावती ने समूचे संगठन को यह संदेश दिया है कि पार्टी में सर्वोच्च केवल विचारधारा और सुप्रीमो का निर्णय है, जहां परिवारवाद को भी हावी होने की अनुमति नहीं है।

आकाश आनंद के बसपा से पूरी तरह मुक्त होने के बाद अब उनकी राजनीतिक दिशा को लेकर कयास लगाए जा रहे हैं। क्या वे राजनीति से दूरी बनाएंगे या स्वतंत्र राह चुनेंगे, यह अभी स्पष्ट नहीं है। वहीं बहुजन समाज पार्टी के भीतर अब सबकी निगाहें ईशान आनंद और अन्य वरिष्ठ रणनीतिकारों पर टिकी हैं कि वे आगामी चुनावों के लिए प्रचार अभियान को किस प्रकार आगे बढ़ाते हैं। मायावती खुद पार्टी की कमान संभालते हुए जिला और सेक्टर स्तर पर संगठनात्मक फेरबदल को अंतिम रूप देने में जुटी हैं, ताकि आंतरिक कलह का चुनावी नतीजों पर कोई विपरीत असर न पड़े।

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